फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   Leh turns into a cantonment after violent protests, internet restored but roads deserted

Leh Protest: लेह के हर कोने में सन्नाटा, हिंसक प्रदर्शन के बाद शहर बना छावनी, इंटरनेट बहाल लेकिन सड़कें सुनसान

Fri, 26 Sep 2025 11:51 AM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, लेह
अमर उजाला नेटवर्क, लेह Published by: निकिता गुप्ता Updated Fri, 26 Sep 2025 11:51 AM IST
सार

लेह में हिंसक प्रदर्शन के बाद कर्फ्यू लगा दिया गया है, हर कोने पर सुरक्षा कड़ी है और आवाजाही पर सख्त पहरा है। युवाओं में रोजगार को लेकर गहरा असंतोष है, जो सोशल मीडिया पर तीखी बहस और विरोध के रूप में सामने आया।

विज्ञापन
Leh turns into a cantonment after violent protests, internet restored but roads deserted
लेह में हिंसा - फोटो : PTI

विस्तार

लेह के निवासियों ने इससे पहले इस तरह के हालात नहीं देखे थे। गत बुधवार को हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद यहां कर्फ्यू दिया गया था। हर कोने पर नाका है। सड़कों पर सन्नाटा और कंटीले तार लगे हैं। बीच-बीच में एंबुलेंस का सायरन गूंज रहा था।

विज्ञापन


अच्छी बात यह थी कि इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई है। युवा सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे। हर जुबां पर हिंसक प्रदर्शन का ही जिक्र था।कर्फ्यू की वजह से लोगों को अस्पताल तक पहुंचने में बेहद दिक्कत हुई। जगह-जगह पुलिस और सीआरपीएफ तैनात थी। सड़क पर निकलने वालों को रोक-रोककर सख्ती से पूछताछ की जा रही थी। केवल आवश्यक सेवाओं को कर्फ्यू से मुक्त रखा गया था। सड़कों पर गाड़ियां बेहद कम निकलीं। वे भी पुलिस की पूछताछ से जगह-जगह रुककर ही आगे बढ़ पा रहे थे। घरों में भी लोगों के बीच चर्चा लद्दाख के मुद्दों पर ही केंद्रित रही।
विज्ञापन


ऑल इंडिया लद्दाख स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष स्टेंजिन का कहना है कि जम्मू से भी बहुत से युवाओं के कॉल उनके पास आए। वे लद्दाख के वास्तविक हालात जानना चाहते थे। लद्दाख में जो प्रदर्शन हुआ उसकी जड़ में सबसे बड़ा मसला रोजगार था। युवा वर्तमान स्थिति से बेहद निराश थे और उन्हें इस निराशा से निकलने का कोई ठोस रास्ता नजर नहीं आ रहा था। 
विज्ञापन
विज्ञापन




सोशल मीडिया पर युवाओं में तर्क-वितर्क
युवाओं के बीच सोशल मीडिया पर भी प्रदर्शन को लेकर ही बहस चलती रही। उन्होंने कुछ लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद पर निशाना साध रहे थे तो कुछ लद्दाख प्रशासन पर। अलबत्ता, केंद्रीय गृह मंत्रालय से बैठक पर भी उनकी निगाहें लगी हैं। मारे गए युवाओं के प्रति भी उनकी सहानुभूति खुलकर नजर आई।

लद्दाख में विरोध प्रदर्शनों में हुई बहुमूल्य मानव जानों की हानि से अत्यंत दुखी हूं: मीरवाइज
मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने लेह में हिंसक हालातों को लेकर चिंता व्यक्त की और वहां हुए जानी नुकसान को लेकर अफसोस जाहिर किया। इसके अलावा उन्होंने एक बार फिर उन्हें प्रशासन द्वारा घर पर नजरबंद रखने का दावा किया।

मीरवाइज में एक्स पर किये गए एक पोस्ट में लिखा, लद्दाख में विरोध प्रदर्शनों में हुई बहुमूल्य मानव जानों की हानि से अत्यंत दुखी हूं। जम्मू-कश्मीर राज्य के विखंडन और निम्नीकरण के एकतरफा निर्णय तथा उसके बाद वहां के लोगों से किए गए अधूरे वादों के परिणाम स्वरूप ये दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम सामने आ रहे हैं। आशा है कि लद्दाख के लोगों से किए गए वादे पूरे होंगे और जानें बचेंगी।

वहीं एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, आज मुझे फिर से कड़ी नजरबंदी में रखा गया है और मेरे घर की ओर जाने वाली गलियों में कंटीले तारों से बैरिकेडिंग कर दी गई है। मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) की एक बैठक जिसमें प्रमुख धार्मिक संगठनों के प्रमुख भाग लेने वाले थे आज मेरे आवास पर होनी थी।

इस बैठक में वक्फ बोर्ड के अंतरिम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उत्पन्न चिंताओं और घाटी में सड़े हुए मांस और उससे जुड़े उत्पादों की आपूर्ति और खपत सहित अन्य जरूरी सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर चर्चा होनी थी हालांकि प्रतिबंध और पाबंदियां हास्यास्पद हैं और बार-बार इनका सहारा लेने वालों की कमजोरियों और असुरक्षाओं को उजागर करती हैं, फिर भी ऐसा लगता है कि अधिकारियों को इससे कोई परहेज नहीं है।

लद्दाख में हिंसक प्रदर्शन केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण भड़के हैं: महबूबा मुफ्ती
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष और जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने वीरवार को कहा कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में हिंसक विरोध प्रदर्शन केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण भड़के हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लद्दाख के लोगों से कई वादे किए थे लेकिन पिछले छह वर्षों में उनका कोई नतीजा नहीं निकला।

कल हमने जो देखा वह उनकी सहनशीलता की दीवार को तोड़ता हुआ दिखा। मुफ्ती कहा कि लद्दाख के लोग अपनी पहचान, संस्कृति, जमीन और रोजगार की रक्षा के लिए छठी अनुसूची में शामिल होने का प्रयास कर रहे हैं। वे निराश हैं कि कुछ नहीं हो रहा है।

अगर बाहर से लोग बड़ी संख्या में वहां आ गए तो उनका क्या बचेगा? उनकी संख्या तो बस कुछ लाख है। मुफ्ती ने कहा कि केंद्र को लद्दाख के घटनाक्रम पर विचार करना चाहिए जहां बुधवार को हिंसा भड़क उठी। केंद्र को इस पर विचार करना चाहिए। लद्दाख जैसा खुशहाल और समृद्ध इलाका आज जल रहा है। लद्दाख तब भी शांतिपूर्ण रहा जब कश्मीर और जम्मू हिंसा की चपेट में थे। लद्दाखियों ने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी।

भाजपा के इस दावे पर कि कांग्रेस ने हिंसा भड़काई है, को लेकर मुफ्ती ने इसे जनता का आक्रोश कहकर खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, सरकार अपनी नाकामी स्वीकार नहीं करना चाहती और उन्हें बलि का बकरा ढूंढना पड़ रहा है। अगर कांग्रेस को इतना समर्थन मिलता तो हालात अलग होते। यह अपनी पहचान, जमीन और नौकरियां खोने की आशंकाओं की एक सहज प्रतिक्रिया थी।

लद्दाख के उपराज्यपाल की उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक में सतर्कता बढ़ाने का आह्वान
लद्दाख में बंद के बीच व्यापक झड़पों में चार लोगों की मौत और 80 से ज्यादा घायल होने के एक दिन बाद उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने वीरवार को एक सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उपराज्यपाल ने शांति बनाए रखने के लिए सतर्कता बढ़ाने का आह्वान किया।

उपराज्यपाल ने लद्दाख में उभरती स्थिति का आकलन करने के लिए एक उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें पूरे केंद्र शासित प्रदेश में शांति, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी सतर्कता, निर्बाध अंतर-एजेंसी समन्वय और सक्रिय उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि पुलिस, सीआरपीएफ और नागरिक प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल हुए और क्षेत्र में मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।

केंद्र ने आरोप लगाया कि भीड़ की हिंसा जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भड़काऊ बयानों से प्रेरित थी, जबकि कुछ राजनीति से प्रेरित लोग सरकार और लद्दाखी समूहों के प्रतिनिधियों के बीच चल रही बातचीत में हुई प्रगति से खुश नहीं थे।

कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधी गोलीबारी को अस्वीकार्य बताया गया
कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने लेह में हुई गोलीबारी की घटना की न्यायिक जांच की मांग की है, जिसमें चार नागरिकों की जान चली गई और एक दर्जन से ज्यादा घायल हो गए। इसके विरोध में कारगिल में पूर्ण बंद रहा। केडीए के वरिष्ठ नेता असगर अली करबलाई ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह मांग उठाई।

उन्होंने प्रशासन पर त्रासदी की गंभीरता को समझने के बजाय दमनकारी नीतियों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि किसके आदेश पर सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की।

करबलाई ने संवाददाताओं से कहा, चार निर्दोष नागरिक गोलियों का शिकार हुए हैं और कई अस्पतालों में गंभीर रूप से घायल हैं। पछतावे के बजाय, सरकार गिरफ्तारियां, छापे और युवाओं की पिटाई कर रही है। यह अस्वीकार्य है। बातचीत ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है, न कि प्रदर्शनकारियों और उनके परिवारों को परेशान करना। उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्र की नाज़ुक शांति को भंग नहीं किया जाना चाहिए।

केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए, केडीए नेता ने नई दिल्ली पर लद्दाखियों की आकांक्षाओं के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया। उन्होंने याद दिलाया कि 2019 में विशेष दर्जा रद्द होने के बाद से, लद्दाख को राजनीतिक और संवैधानिक सुरक्षा उपायों से वंचित कर दिया गया है, जबकि जमीन और नौकरियां असुरक्षित हो गई हैं। उन्होंने कहा कि पांच साल से लद्दाखी लोग राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची में शामिल होने, रोजगार की सुरक्षा और आरक्षण की गारंटी की मांग कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि गृह मंत्रालय के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद, ठोस नतीजों के बिना केवल आश्वासन ही दिए गए।

करबलाई ने आगे खुलासा किया कि केंद्र ने इस साल मई से लद्दाखी नेतृत्व के साथ बातचीत बंद कर दी है। उन्होंने कहा कि 14 दिनों की भूख हड़ताल, जिसमें दो बुज़ुर्ग बेहोश हो गए थे, सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया। हिंसा भड़कने के बाद ही गृह मंत्रालय ने 6 अक्टूबर को बातचीत फिर से शुरू करने का वादा किया। यह उदासीनता लद्दाखियों के धैर्य की परीक्षा ले रही है।

करबलाई ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलीबारी किसी भी हालत में उचित नहीं ठहराई जा सकती। उन्होंने संकल्प लिया कि मारे गए लोगों के बलिदान को भुलाया नहीं जाएगा और दोहराया कि पीड़ितों के लिए न्याय लद्दाख के राजनीतिक संघर्ष का केंद्रबिंदु बना रहेगा।

केडीए ने गृह मंत्रालय से घटना की पारदर्शी जाच सुनिश्चित करने और प्रदर्शनकारियों व उनके परिवारों का उत्पीड़न रोकने की अपील की। करबलाई ने जोर देकर कहा कि लद्दाख के लोग शांति चाहते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed