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Leh: लेह एपेक्स बॉडी का ऐलान, छह अक्तूबर की बातचीत पर हमसे कोई रायशुमारी नहीं हुई, भूख हड़ताल जारी रहेगी

Tue, 23 Sep 2025 06:47 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, लेह
अमर उजाला नेटवर्क, लेह Published by: निकिता गुप्ता Updated Tue, 23 Sep 2025 06:47 PM IST
सार

लेह एपेक्स बॉडी ने कहा है कि लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने तक उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी और केंद्र सरकार से तत्काल बैठक की मांग की। संगठन ने छह अक्तूबर की वार्ता की तारीख तय करने से पहले उनसे सलाह न करने पर नाराजगी जताई है।

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Leh: Leh Apex Body declares, We were not consulted on the October 6 talks, hunger strike will continue
लेह एपेक्स बॉडी ने किया ऐलान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लेह एपेक्स बॉडी (लेह शीर्ष संगठन) ने सोमवार को स्पष्ट किया कि जब तक लद्दाख को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांगें पूरी नहीं होतीं तब तक उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी। संगठन ने केंद्र सरकार से तत्काल बैठक की मांग करते हुए चेतावनी दी कि लोगों का धैर्य अब टूट रहा है।

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गृह मंत्रालय ने 6 अक्तूबर को लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल के साथ अगले दौर की वार्ता की तारीख तय की है लेकिन लेह शीर्ष संगठन के नेताओं ने आरोप लगाया है कि इस तारीख को निर्धारित करने से पहले उनसे कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया। एलएबी के वरिष्ठ नेता छेरिंग दोरजे ने एक ऑनलाइन प्रेस वार्ता में कहा कि उन्होंने सरकार को सूचित कर दिया है कि कोई ठोस समझौता होने तक वे अपनी भूख हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, हमारा विरोध शांतिपूर्ण है, लेकिन लोग अधीर हो रहे हैं। हालात हाथ से निकल सकते हैं। बातचीत पहले ही काफी देर से हो रही है।

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भाजपा ने किया था वादा
पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने याद दिलाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने का वादा किया था और आगामी पहाड़ी परिषद चुनावों से पहले इस वादे को पूरा किया जाना चाहिए। वांगचुक ने कहा अगर उन्होंने अपना वादा पूरा किया तो लद्दाख के लोग उन्हें वोट देकर जिताएंगे।

इससे उन्हें सबसे अधिक लाभ होगा। हमें उम्मीद है कि वे सार्थक बातचीत करेंगे।उन्होंने कहा कि वार्ता में हो रही देरी से लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। हम चाहते हैं कि सभी मुद्दे शांतिपूर्ण ढंग से सुलझें। हमारा विरोध शांतिपूर्ण है लेकिन लोग अब थक गए हैं। वे हमसे कहते हैं कि शांतिपूर्ण विरोध से कुछ हासिल नहीं हो रहा। हम नहीं चाहते कि कुछ ऐसा हो जो देश के लिए शर्मिंदगी का कारण बने। बेहतर होगा कि शांति बनी रहे।

संगठन के सदस्यों ने कहा कि बैठक की तारीख तय करने से पहले उन पर विश्वास नहीं जताया गया। उन्होंने कहा हमारा मानना है कि यह एक मैत्रीपूर्ण प्रस्ताव नहीं है। जब दो पक्ष बातचीत करते हैं तो तारीख पर सहमति बनाई जाती है। यह तो मात्र एक आदेश था। 

अंजुमन इमामिया के अध्यक्ष अशरफ अली बर्चा ने बैठक में हो रही देरी पर निराशा जताई। उन्होंने कहा उन्होंने 15 दिन बाद की तारीख दी है। लोग दूर-दराज के इलाकों से यहां आए हैं और हम निराश हैं। ईसाई नेता सोनम परवेज ने बताया कि लेह जैसे ऊंचे इलाके में भूख हड़ताल करना एक बड़ी चुनौती है और लोग कठिनाई झेल रहे हैं। 

बता दें कि लेह शीर्ष संगठन और कारगिल लोकतांत्रिक गठबंधन पिछले चार साल से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और गृह मंत्रालय के साथ वार्ता कर रहे हैं। लेह शीर्ष संगठन के नेतृत्व ने 10 सितंबर से 35 दिनों की भूख हड़ताल शुरू की थी। इससे पहले, 13 सितंबर को लद्दाख बौद्ध संघ ने एक प्रस्ताव पारित कर राजनीतिक दलों को इस समूह से अलग होने को कहा था। गृह मंत्रालय की उच्चाधिकार प्राप्त समिति के साथ दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों की अंतिम बैठक 27 मई को हुई थी। पिछले महीने अगस्त में कारगिल में भी तीन दिवसीय भूख हड़ताल हुई थी।

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