दहशतगर्दो ने 11वीं के छात्र को मारी गोली: दो आतंकियों से अकेला भिड़ गया साहिल, बहन ने बताई उस शाम की आपबीती
साहिल बशीर की बहन ने बताया कि एक बार वो खून से लथपथ भाई को देखती फिर बाहर मदद के लिए पुकराने चली जाती। फिर ये क्रम दोहराती। लेकिन, गोलियों की आवाज सुन कोई भी उनके घर की तरफ नहीं आ रहा था। पढ़ें पूरी खबर...
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कश्मीर घाटी के अनंतनाग में आमदिनों की तरह शाम का वक्त था। 11वीं कक्षा के उस छात्र साहिल बशीर डार को भूख लगी थी। बहन के कमरे से निकल वो मां से खाने के लिए पूछने लगा। मां ने जवाब दिया बेटा, सब नमाज पढ़े रहे हैं। फुर्सत होते ही मिलकर खाना खाएंगे। लेकिन, समय को कुछ और ही मंजूर था। उसी समय अचानक घर में दो नकाबपोश आतंकियों ने गोली मारकर उसे घायल कर दिया। गुरुवार को अस्पताल में साहिल ने दम तोड़ दिया। नम आंखों के साथ साहिल को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
शुक्रवार को बड़ी संख्या में आसपास के लोग और पुलिस के अधिकारी साहिल के घर ढांढस बंधाने के लिए पहुंचे। उसकी मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। अनंतनाग के वत्रिगाम वानिहामा इलाके में स्थित साहिल घर पहुंचे हर व्यक्ति की जुबान पर एक ही सवाल था कि आखिर इसमें साहिल का क्या कसूर था। क्यों उसे खाने की जगह गोली मिली?
सब पढ़ रहे थे नमाज, अचानक आ धमके आतंकी
आंसुओं से भरी आंखों के साथ साहिल की बहन ने उस शाम की घटना के बारे में जानकारी दी है। जिसे जान कर कोई भी भावुक हो उठेगा। साहिल की बहन ने बताया कि बुधवार शाम पिता और भाई नमाज के लिए मस्जिद गए हुए थे। घर में वह, मां और साहिल थे। मां और वह भी नमाज पढ़ रहे थे। साहिल मां से खाने की जिद कर रहा था। इसी दौरान दो नकाबपोश घर में आ घुसे।
दोनों आतंकियों से जूझने लगा साहिल बशीर
मां और उसने शोर मचाना शुरू किया। साहिल ने एक नकाबपोश को पकड़ लिया और उससे जूझने लगा। दोनों नकाबपोश साहिल से गिरफ्त छुड़ाने की कोशिश कर रहे थे। कुछ ही पलों में एक नकाबपोश ने पिस्टल निकाल साहिल को शूट कर दिया। खून से लथपथ साहिल जमीन पर जा गिरा। नकाबपोश घर से बाहर निकले और हवा में दो फायर कर दिए। मां बाहर लोगों से मदद के लिए गुहार लगा रही थी।
'कभी साहिल को खून से लथपथ देखती फिर बाहर मदद के लिए पुकराती'
साहिल की बहन ने बताया, 'मैं एक बार अपने भाई को खून से लथपथ देखती फिर बाहर मदद के लिए पुकराने चली जाती। गोलियों की आवाज सुन कोई भी उनके घर की तरफ नहीं आ रहा था और वो भी अपने भाई को तड़पता हुआ देखने को मजबूर थी। कुछ देर बाद वो पिता को बुलाने मस्जिद गई और फिर पिता और अन्य लोग घर पहुंचे। आनन-फानन में साहिल को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन दो नकबापोश आतंकियों से एक जूझने वाले साहिल को बचाया नहीं जा सका।
'आखिर कब तक हम लोग यूहीं घुट-घुट कर जीते रहेंगे'
ये सब सुना कर साहिल की बहन की आंखे भर आती हैं और वह पूछती है कि आखिर कब तक हम लोग यूहीं घुट-घुट कर जीते रहेंगे। उसने कहा कि अब तो उन्हें अपने घर के ही दूसरे कमरे में भी जाने से डर लगता है कि कहीं वहां पहले से कोई बंदूकधारी तो मौजूद नहीं। कहीं कोई फिर से तो नहीं उनके घर घुस कर गोलियों से सब को मार देगा। कश्मीर में ऐसा कब तक चलेगा। साहिल के परिवार की मांग है कि उसके भाई को इंसाफ मिले, जिस तरह उसे गोली मारी गई है उसके हत्यारों को भी गोली मारी जाए।