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Srinagar News: उपराष्ट्रपति हॉल ऑफ फेम युद्ध स्मारक पर पहुंचे, बलिदानी सैनिकों को दी श्रद्धांजलि
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लेह। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने लद्दाख दौरे के दूसरे दिन लेह स्थित हॉल ऑफ फेम युद्ध स्मारक पर पहुंचकर भारतीय सशस्त्र बलों के वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने क्षेत्र के विकास में योगदान दे रहे सुरक्षा बलों और स्थानीय संस्थानों के कार्यों की भी सराहना की।
हॉल ऑफ फेम के दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति ने देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को नमन किया। उन्होंने कहा कि “नेशन फर्स्ट: ऑलवेज एंड एवरी टाइम” की भावना के प्रति सशस्त्र बलों की अटूट प्रतिबद्धता प्रत्येक आगंतुक के मन में देशभक्ति और कृतज्ञता की गहरी भावना पैदा करती है।
उन्होंने इस स्मारक की स्थापना और संरक्षण के लिए भारतीय सेना की प्रशंसा करते हुए इसे देश के वीर सैनिकों के साहस, बलिदान और विरासत का स्थायी प्रतीक बताया। उपराष्ट्रपति ने हॉल ऑफ फेम में भारत-पाक और भारत-चीन युद्धों से संबंधित सैन्य अभियानों को प्रदर्शित करने वाली दीर्घाओं का भी अवलोकन किया और कहा कि ये हमारे सशस्त्र बलों के साहस, समर्पण और त्याग की अमिट गाथा प्रस्तुत करती हैं।
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इसके बाद राधाकृष्णन ने उपशी स्थित पश्मीना बकरी फार्म का दौरा किया, जहां उन्होंने लद्दाख की प्रसिद्ध पश्मीना विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की। उन्होंने सतत पशुधन प्रबंधन तथा स्थानीय समुदायों, विशेषकर पश्मीना उत्पादन और उससे जुड़े कार्यों में संलग्न महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण में फार्म की भूमिका की सराहना की।
चांगथांगी बकरियों और उनसे प्राप्त विश्वप्रसिद्ध पश्मीना ऊन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह क्षेत्र लद्दाख के लोगों की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और कौशल का प्रतीक है। उन्होंने इस राष्ट्रीय धरोहर के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में जुटे वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और स्थानीय हितधारकों के समर्पण की भी प्रशंसा की।
उपराष्ट्रपति ने उपशी में सिंधु नदी पर निर्मित देश के पहले रॉक चेक डैम का भी दौरा किया, जिसे सिंधु जल समृद्धि अभियान के तहत विकसित किया गया है। उन्होंने इस पर्यावरण-अनुकूल और किफायती पहल की सराहना की, जिसकी परिकल्पना और उद्घाटन पिछले महीने लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना द्वारा क्षेत्र में बार-बार आने वाली जल समस्याओं के समाधान के रूप में किया गया था।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना सिंधु नदी के उथले हिस्सों में जल स्तर बढ़ाने में सहायक है, जिससे किसानों को बुवाई के महत्वपूर्ण मौसम में अपने खेतों की सिंचाई करने में सुविधा मिलती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप और टिकाऊ समाधान जल सुरक्षा को मजबूत करने, कृषि को समर्थन देने तथा लद्दाख के दीर्घकालिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
दिन में पहले राधाकृष्णन ने लेह के निकट पवित्र सिंधु घाट का दौरा किया और श्रद्धेय सिंधु नदी के तट पर प्रार्थना अर्पित की। उन्होंने सिंधु नदी को भारत की सभ्यतागत विरासत और सांस्कृतिक एकता का कालजयी प्रतीक बताते हुए कहा कि इसकी गौरवशाली विरासत पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
उपराष्ट्रपति ने लद्दाख में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की 5वीं बटालियन के जवानों से भी मुलाकात की। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए उनके समर्पण, पेशेवर दक्षता और अटूट प्रतिबद्धता की सराहना की तथा देश की सुरक्षा और अखंडता सुनिश्चित करने में उनकी निःस्वार्थ सेवा के लिए भारत की जनता की ओर से आभार व्यक्त किया।
यह दौरा लद्दाख के सामरिक महत्व, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तथा सतत विकास, ग्रामीण आजीविका और राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करता है।
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हॉल ऑफ फेम के दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति ने देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को नमन किया। उन्होंने कहा कि “नेशन फर्स्ट: ऑलवेज एंड एवरी टाइम” की भावना के प्रति सशस्त्र बलों की अटूट प्रतिबद्धता प्रत्येक आगंतुक के मन में देशभक्ति और कृतज्ञता की गहरी भावना पैदा करती है।
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उन्होंने इस स्मारक की स्थापना और संरक्षण के लिए भारतीय सेना की प्रशंसा करते हुए इसे देश के वीर सैनिकों के साहस, बलिदान और विरासत का स्थायी प्रतीक बताया। उपराष्ट्रपति ने हॉल ऑफ फेम में भारत-पाक और भारत-चीन युद्धों से संबंधित सैन्य अभियानों को प्रदर्शित करने वाली दीर्घाओं का भी अवलोकन किया और कहा कि ये हमारे सशस्त्र बलों के साहस, समर्पण और त्याग की अमिट गाथा प्रस्तुत करती हैं।
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इसके बाद राधाकृष्णन ने उपशी स्थित पश्मीना बकरी फार्म का दौरा किया, जहां उन्होंने लद्दाख की प्रसिद्ध पश्मीना विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की। उन्होंने सतत पशुधन प्रबंधन तथा स्थानीय समुदायों, विशेषकर पश्मीना उत्पादन और उससे जुड़े कार्यों में संलग्न महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण में फार्म की भूमिका की सराहना की।
चांगथांगी बकरियों और उनसे प्राप्त विश्वप्रसिद्ध पश्मीना ऊन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह क्षेत्र लद्दाख के लोगों की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और कौशल का प्रतीक है। उन्होंने इस राष्ट्रीय धरोहर के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में जुटे वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और स्थानीय हितधारकों के समर्पण की भी प्रशंसा की।
उपराष्ट्रपति ने उपशी में सिंधु नदी पर निर्मित देश के पहले रॉक चेक डैम का भी दौरा किया, जिसे सिंधु जल समृद्धि अभियान के तहत विकसित किया गया है। उन्होंने इस पर्यावरण-अनुकूल और किफायती पहल की सराहना की, जिसकी परिकल्पना और उद्घाटन पिछले महीने लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना द्वारा क्षेत्र में बार-बार आने वाली जल समस्याओं के समाधान के रूप में किया गया था।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना सिंधु नदी के उथले हिस्सों में जल स्तर बढ़ाने में सहायक है, जिससे किसानों को बुवाई के महत्वपूर्ण मौसम में अपने खेतों की सिंचाई करने में सुविधा मिलती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप और टिकाऊ समाधान जल सुरक्षा को मजबूत करने, कृषि को समर्थन देने तथा लद्दाख के दीर्घकालिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
दिन में पहले राधाकृष्णन ने लेह के निकट पवित्र सिंधु घाट का दौरा किया और श्रद्धेय सिंधु नदी के तट पर प्रार्थना अर्पित की। उन्होंने सिंधु नदी को भारत की सभ्यतागत विरासत और सांस्कृतिक एकता का कालजयी प्रतीक बताते हुए कहा कि इसकी गौरवशाली विरासत पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
उपराष्ट्रपति ने लद्दाख में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की 5वीं बटालियन के जवानों से भी मुलाकात की। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए उनके समर्पण, पेशेवर दक्षता और अटूट प्रतिबद्धता की सराहना की तथा देश की सुरक्षा और अखंडता सुनिश्चित करने में उनकी निःस्वार्थ सेवा के लिए भारत की जनता की ओर से आभार व्यक्त किया।
यह दौरा लद्दाख के सामरिक महत्व, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तथा सतत विकास, ग्रामीण आजीविका और राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करता है।