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Srinagar News: डॉ. अखून ने कहा- एलएएचडीसी कारगिल चेयरमैन पद से इस्तीफा नहीं दूंगा
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लेह। लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद कारगिल के चेयरमैन डॉ. मोहम्मद जाफर अखून ने शनिवार को चल रहे राजनीतिक विवाद और उनके खिलाफ लाए जा रहे अविश्वास प्रस्ताव के प्रयासों के बीच स्पष्ट किया कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे।
डॉ. अखून ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच ढाई वर्ष का समझौता लोकसभा चुनावों के बाद प्रभावी रूप से समाप्त हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को कभी लागू नहीं किया गया जबकि कुछ नेता अब केवल रोटेशनल चेयरमैनशिप व्यवस्था पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
अपने नेतृत्व का बचाव करते हुए डॉ. अखून ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों के दौरान कारगिल में विकास कार्य सुचारू रूप से आगे बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि जिले की प्रगति के लिए केंद्र सरकार के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखना आवश्यक है।
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उन्होंने दावा किया कि 12 में से 8 पार्षद अब भी उनके समर्थन में हैं और उन्हें हटाने के प्रयास राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। उन्होंने प्रस्तावित प्लान मीटिंग के लिए बिना शर्त समर्थन देने पर भारतीय जनता पार्टी की कारगिल इकाई का भी आभार व्यक्त किया।
सांसद मोहम्मद हनीफा जान की आलोचना करते हुए डॉ. अखून ने आरोप लगाया कि सांसद कारगिल के लिए ठोस परिणाम देने में विफल रहे हैं और परिषद नेतृत्व को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के जिला अध्यक्ष के रूप में हनीफा जान की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले की जांच दल-बदल विरोधी कानून (एंटी-डिफेक्शन लॉ) के प्रावधानों के तहत की जानी चाहिए।
डॉ. अखून ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर उपराज्यपाल और लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा कि कारगिल में विकास कार्य सुचारू रूप से जारी हैं, जबकि कुछ नेता प्लान मीटिंग आयोजित होने में बाधाएं उत्पन्न कर रहे हैं।
अपने इस्तीफे की मांगों को खारिज करते हुए डॉ. अखून ने कहा कि जब तक उन्हें जनता का समर्थन प्राप्त है, वह अपने पद पर बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह केंद्र सरकार के साथ रचनात्मक संवाद के पक्षधर हैं और भारत सरकार के प्रति किसी भी टकरावपूर्ण रवैये का समर्थन नहीं करते।
एलएएचडीसी कारगिल चेयरमैन ने यह भी घोषणा की कि पिछले ढाई वर्षों के दौरान उनकी उपलब्धियों पर आधारित एक विस्तृत रिपोर्ट जल्द जारी की जाएगी। इसके साथ ही कारगिल के वर्ष 2047 तक के दीर्घकालिक विकास दृष्टि दस्तावेज़ को भी सार्वजनिक किया जाएगा।
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डॉ. अखून ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच ढाई वर्ष का समझौता लोकसभा चुनावों के बाद प्रभावी रूप से समाप्त हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को कभी लागू नहीं किया गया जबकि कुछ नेता अब केवल रोटेशनल चेयरमैनशिप व्यवस्था पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
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अपने नेतृत्व का बचाव करते हुए डॉ. अखून ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों के दौरान कारगिल में विकास कार्य सुचारू रूप से आगे बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि जिले की प्रगति के लिए केंद्र सरकार के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखना आवश्यक है।
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उन्होंने दावा किया कि 12 में से 8 पार्षद अब भी उनके समर्थन में हैं और उन्हें हटाने के प्रयास राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। उन्होंने प्रस्तावित प्लान मीटिंग के लिए बिना शर्त समर्थन देने पर भारतीय जनता पार्टी की कारगिल इकाई का भी आभार व्यक्त किया।
सांसद मोहम्मद हनीफा जान की आलोचना करते हुए डॉ. अखून ने आरोप लगाया कि सांसद कारगिल के लिए ठोस परिणाम देने में विफल रहे हैं और परिषद नेतृत्व को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के जिला अध्यक्ष के रूप में हनीफा जान की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले की जांच दल-बदल विरोधी कानून (एंटी-डिफेक्शन लॉ) के प्रावधानों के तहत की जानी चाहिए।
डॉ. अखून ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर उपराज्यपाल और लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा कि कारगिल में विकास कार्य सुचारू रूप से जारी हैं, जबकि कुछ नेता प्लान मीटिंग आयोजित होने में बाधाएं उत्पन्न कर रहे हैं।
अपने इस्तीफे की मांगों को खारिज करते हुए डॉ. अखून ने कहा कि जब तक उन्हें जनता का समर्थन प्राप्त है, वह अपने पद पर बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह केंद्र सरकार के साथ रचनात्मक संवाद के पक्षधर हैं और भारत सरकार के प्रति किसी भी टकरावपूर्ण रवैये का समर्थन नहीं करते।
एलएएचडीसी कारगिल चेयरमैन ने यह भी घोषणा की कि पिछले ढाई वर्षों के दौरान उनकी उपलब्धियों पर आधारित एक विस्तृत रिपोर्ट जल्द जारी की जाएगी। इसके साथ ही कारगिल के वर्ष 2047 तक के दीर्घकालिक विकास दृष्टि दस्तावेज़ को भी सार्वजनिक किया जाएगा।