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Srinagar News: पांच दशक बाद भी बुनियादी ढांचे को तरस रहा बांदीपोरा का स्कूल
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बांदीपोरा का स्कूल। संवाद
- फोटो : bandipora news
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बांदीपोरा। उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले में शिक्षा व्यवस्था की एक बदहाल तस्वीर सामने आई है। जिले के चोंटीमुल्ला स्थित ज़ेबान गांव का एक सरकारी प्राथमिक स्कूल पिछले 50 से अधिक वर्षों से बुनियादी ढांचे की भारी कमी से जूझ रहा है। इस स्कूल में 70 से अधिक बच्चे सिर्फ एक कमरे में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जबकि इसी इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर एक गोशाला संचालित हो रही है। छात्रों और स्थानीय निवासियों ने स्कूल की जर्जर इमारत की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
स्कूल में केवल दो शिक्षक तैनात हैं। जगह की भारी कमी के कारण अलग-अलग कक्षाओं के सभी छात्रों को एक ही कमरे में एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है। इससे पढ़ाई का माहौल पूरी तरह प्रभावित होता है। छात्रों का कहना है कि जगह न होने और लगातार होने वाले शोर-शराबे से उनका ध्यान भटकता है। इसके अलावा नीचे बनी गोशाला से आने वाली तेज बदबू के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
चौथी कक्षा की छात्रा सबरीना ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि यह इमारत सुरक्षित नहीं है और नीचे की गोशाला से आने वाली बदबू हमें लगातार परेशान करती है। यहां के हालात और शोर-शराबे के कारण हम ठीक से पढ़ाई नहीं कर पाते। वहीं एक अन्य छात्रा महविश ने बताया कि हमें एक ही कमरे में सब साथ बैठकर पढ़ना पड़ता है। एक शिक्षक कुछ विषय पढ़ाते हैं तो दूसरे शिक्षक उसी समय दूसरा विषय पढ़ा रहे होते हैं, जिससे कुछ भी पढ़ना या लिखना बेहद मुश्किल हो जाता है।
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स्थानीय सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता आशिक हुसैन ने बताया कि यह समस्या पिछले 50 सालों से जस की तस बनी हुई है और नेताओं व प्रशासनिक अधिकारियों ने लगातार इन मासूम छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज किया है।
कोट
सरकार जिले में शिक्षा और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में उपयुक्त जमीन न मिलना नए स्कूल भवन के निर्माण में सबसे बड़ी रुकावट बना हुआ है। सीईओ ने कहा कि यदि स्थानीय निवासी किसी उपयुक्त जमीन की पहचान कर लेते हैं तो हम इस समस्या के समाधान के लिए तत्काल आधार पर प्रस्ताव तैयार करेंगे।
-मोहम्मद रफीक, मुख्य शिक्षा अधिकारी, बांदीपोरा
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स्कूल में केवल दो शिक्षक तैनात हैं। जगह की भारी कमी के कारण अलग-अलग कक्षाओं के सभी छात्रों को एक ही कमरे में एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है। इससे पढ़ाई का माहौल पूरी तरह प्रभावित होता है। छात्रों का कहना है कि जगह न होने और लगातार होने वाले शोर-शराबे से उनका ध्यान भटकता है। इसके अलावा नीचे बनी गोशाला से आने वाली तेज बदबू के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
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चौथी कक्षा की छात्रा सबरीना ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि यह इमारत सुरक्षित नहीं है और नीचे की गोशाला से आने वाली बदबू हमें लगातार परेशान करती है। यहां के हालात और शोर-शराबे के कारण हम ठीक से पढ़ाई नहीं कर पाते। वहीं एक अन्य छात्रा महविश ने बताया कि हमें एक ही कमरे में सब साथ बैठकर पढ़ना पड़ता है। एक शिक्षक कुछ विषय पढ़ाते हैं तो दूसरे शिक्षक उसी समय दूसरा विषय पढ़ा रहे होते हैं, जिससे कुछ भी पढ़ना या लिखना बेहद मुश्किल हो जाता है।
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स्थानीय सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता आशिक हुसैन ने बताया कि यह समस्या पिछले 50 सालों से जस की तस बनी हुई है और नेताओं व प्रशासनिक अधिकारियों ने लगातार इन मासूम छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज किया है।
कोट
सरकार जिले में शिक्षा और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में उपयुक्त जमीन न मिलना नए स्कूल भवन के निर्माण में सबसे बड़ी रुकावट बना हुआ है। सीईओ ने कहा कि यदि स्थानीय निवासी किसी उपयुक्त जमीन की पहचान कर लेते हैं तो हम इस समस्या के समाधान के लिए तत्काल आधार पर प्रस्ताव तैयार करेंगे।
-मोहम्मद रफीक, मुख्य शिक्षा अधिकारी, बांदीपोरा