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शिक्षा मंत्री इस्तीफे की पेशकश करते तो टल सकती थी यह स्थिति : डॉ. कर्ण सिंह
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प्रधानमंत्री से देरी किए बिना सीधा और प्रभावी हस्तक्षेप करने की अपील, नए उच्चस्तरीय शिक्षा आयोग के गठन का दिया सुझाव
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। देशभर में नीट परीक्षा प्रकरण और उसके बाद उपजे व्यापक छात्र असंतोष पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और शिक्षाविद् डॉ. कर्ण सिंह ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बड़ा बयान दिया है। स्वयं अनुसंधानकर्ता और चार प्रमुख विश्वविद्यालयों के पूर्व कुलाधिपति रहे डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों का कल्याण हमेशा से उनकी प्राथमिकता रहा है। उन्होंने देश के वर्तमान हालात पर दुख जताते हुए कहा कि यह पूरी अप्रिय स्थिति बेहद आसानी से टाली जा सकती थी, यदि संबंधित शिक्षा मंत्री नीट विवाद सामने आने के तुरंत बाद नैतिकता के आधार पर स्वयं अपने इस्तीफे की पेशकश कर देते।
डॉ. करण सिंह ने अफसोस जताते हुए कहा कि समय रहते उचित कदम न उठाए जाने के कारण ही आज पूरे देश में छात्रों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दे रहा है। बिगड़ते हालात को देखते हुए उन्होंने देश के प्रधानमंत्री से अपील की है कि वे अब इस मामले में देरी किए बिना सीधा और प्रभावी हस्तक्षेप करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप से ही देश के युवाओं को यह भरोसा मिलेगा कि उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों को देश के सर्वोच्च स्तर पर गंभीरता से सुना और समझा जा रहा है।
छात्र प्रदर्शनों के दौरान हो रही पुलिस कार्रवाई पर अपने विचार व्यक्त करते हुए पूर्व कुलाधिपति ने कहा कि पुलिस का बल प्रयोग या कठोर रवैया इस राष्ट्रीय समस्या का स्थाई समाधान कदापि नहीं हो सकता। उन्होंने रेखांकित किया कि देश में शिक्षा व्यवस्था के सामने खड़ी इस व्यापक चुनौती से निपटने के लिए हमारी संपूर्ण शिक्षा नीति के पुनर्गठन की तत्काल आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने एक नए उच्चस्तरीय शिक्षा आयोग के गठन का सुझाव दिया, जो अन्य मांगों पर विचार करने के साथ-साथ शिक्षा प्रणाली में जरूरी सुधार कर सके।
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गौरतलब है कि अपने बयान के अंत में डॉ. करण सिंह ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा अपना आमरण अनशन समाप्त किए जाने पर राहत व्यक्त की। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली में हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान चोटिल और घायल हुए सभी विद्यार्थियों तथा पुलिसकर्मियों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट की और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। देशभर में नीट परीक्षा प्रकरण और उसके बाद उपजे व्यापक छात्र असंतोष पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और शिक्षाविद् डॉ. कर्ण सिंह ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बड़ा बयान दिया है। स्वयं अनुसंधानकर्ता और चार प्रमुख विश्वविद्यालयों के पूर्व कुलाधिपति रहे डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों का कल्याण हमेशा से उनकी प्राथमिकता रहा है। उन्होंने देश के वर्तमान हालात पर दुख जताते हुए कहा कि यह पूरी अप्रिय स्थिति बेहद आसानी से टाली जा सकती थी, यदि संबंधित शिक्षा मंत्री नीट विवाद सामने आने के तुरंत बाद नैतिकता के आधार पर स्वयं अपने इस्तीफे की पेशकश कर देते।
डॉ. करण सिंह ने अफसोस जताते हुए कहा कि समय रहते उचित कदम न उठाए जाने के कारण ही आज पूरे देश में छात्रों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दे रहा है। बिगड़ते हालात को देखते हुए उन्होंने देश के प्रधानमंत्री से अपील की है कि वे अब इस मामले में देरी किए बिना सीधा और प्रभावी हस्तक्षेप करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप से ही देश के युवाओं को यह भरोसा मिलेगा कि उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों को देश के सर्वोच्च स्तर पर गंभीरता से सुना और समझा जा रहा है।
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छात्र प्रदर्शनों के दौरान हो रही पुलिस कार्रवाई पर अपने विचार व्यक्त करते हुए पूर्व कुलाधिपति ने कहा कि पुलिस का बल प्रयोग या कठोर रवैया इस राष्ट्रीय समस्या का स्थाई समाधान कदापि नहीं हो सकता। उन्होंने रेखांकित किया कि देश में शिक्षा व्यवस्था के सामने खड़ी इस व्यापक चुनौती से निपटने के लिए हमारी संपूर्ण शिक्षा नीति के पुनर्गठन की तत्काल आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने एक नए उच्चस्तरीय शिक्षा आयोग के गठन का सुझाव दिया, जो अन्य मांगों पर विचार करने के साथ-साथ शिक्षा प्रणाली में जरूरी सुधार कर सके।
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गौरतलब है कि अपने बयान के अंत में डॉ. करण सिंह ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा अपना आमरण अनशन समाप्त किए जाने पर राहत व्यक्त की। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली में हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान चोटिल और घायल हुए सभी विद्यार्थियों तथा पुलिसकर्मियों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट की और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।