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हिमालयी क्षेत्र में 4-लेन सड़कों पर लगे पूर्ण प्रतिबंध: डॉ. करण सिंह
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श्रीनगर। वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. करण सिंह ने नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने भारत सरकार से हिमालय को तबाही से बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है और उत्तराखंड के चार धाम जैसे संवेदनशील इलाकों में 4-लेन सड़कों के निर्माण पर पूरी तरह से रोक लगाने की वकालत की है।
एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए डॉ. करण सिंह ने नेपाल में हुए जान-माल के भारी नुकसान पर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी दिवंगत पत्नी नेपाल से थीं, जिसके कारण उस खूबसूरत देश और वहां के लोगों के प्रति उनका एक खास लगाव है। उन्होंने रेखांकित किया कि आपदा को ट्रिगर करने वाली घटना तिब्बत में घटी, जिसने एक बार फिर इस तथ्य को सामने ला दिया है कि पूरा हिमालयी क्षेत्र बेहद नाजुक और संवेदनशील है।
डॉ. करण सिंह ने उत्तराखंड के चार धाम जैसे क्षेत्रों में चल रही 4-लेन सड़क परियोजनाओं की तीखी आलोचना करते हुए इसे निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की परियोजनाओं के लिए भारी विस्फोट (ब्लास्टिंग) और सड़कों को चौड़ा किया जाता है, जिससे पहाड़ों को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है। उनके अनुसार पूरे हिमालय क्षेत्र में 4-लेन सड़कों पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए, क्योंकि पर्यटक और तीर्थयात्री 2-लेन सड़कों के जरिए भी सुगमता से यात्रा कर सकते हैं।
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पर्यावरण संतुलन और सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक समाधान सुझाते हुए उन्होंने एक साझा ''''हिमालयन अथॉरिटी'''' गठित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इसमें पाकिस्तान, तिब्बत, भारत, बांग्लादेश और भूटान जैसे सभी हिमालयी देशों को शामिल किया जाना चाहिए ताकि पूरे क्षेत्र के लिए एक समान नीति बनाई जा सके। डॉ. सिंह ने यह भी सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नेपाल के प्रधानमंत्री के साथ मिलकर इस दिशा में पहल करनी चाहिए।
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एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए डॉ. करण सिंह ने नेपाल में हुए जान-माल के भारी नुकसान पर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी दिवंगत पत्नी नेपाल से थीं, जिसके कारण उस खूबसूरत देश और वहां के लोगों के प्रति उनका एक खास लगाव है। उन्होंने रेखांकित किया कि आपदा को ट्रिगर करने वाली घटना तिब्बत में घटी, जिसने एक बार फिर इस तथ्य को सामने ला दिया है कि पूरा हिमालयी क्षेत्र बेहद नाजुक और संवेदनशील है।
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डॉ. करण सिंह ने उत्तराखंड के चार धाम जैसे क्षेत्रों में चल रही 4-लेन सड़क परियोजनाओं की तीखी आलोचना करते हुए इसे निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की परियोजनाओं के लिए भारी विस्फोट (ब्लास्टिंग) और सड़कों को चौड़ा किया जाता है, जिससे पहाड़ों को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है। उनके अनुसार पूरे हिमालय क्षेत्र में 4-लेन सड़कों पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए, क्योंकि पर्यटक और तीर्थयात्री 2-लेन सड़कों के जरिए भी सुगमता से यात्रा कर सकते हैं।
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पर्यावरण संतुलन और सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक समाधान सुझाते हुए उन्होंने एक साझा ''''हिमालयन अथॉरिटी'''' गठित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इसमें पाकिस्तान, तिब्बत, भारत, बांग्लादेश और भूटान जैसे सभी हिमालयी देशों को शामिल किया जाना चाहिए ताकि पूरे क्षेत्र के लिए एक समान नीति बनाई जा सके। डॉ. सिंह ने यह भी सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नेपाल के प्रधानमंत्री के साथ मिलकर इस दिशा में पहल करनी चाहिए।