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आतंकी हमले में मारे गए भाजपा सरपंच के परिवार को खतरे का आकलन करे पुलिस
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने आतंकी हमले में मारे गए सरपंच के परिवार को खतरे का सप्ताह में आकलन करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने मंगलवार को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सुरक्षा को यह निर्देश दिए। खतरे का आकलन होने तक उनके परिवार को श्रीनगर के होटल से बेदखल नहीं करने को कहा गया है।
एडीजी की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि याचिकाकर्ता उस आवास को बनाए रखने की हकदार हैं या नहीं। कुलगाम के ओडुरा के भाजपा के सरपंच शब्बीर अहमद मीर मार्च में हुए आतंकी हमले में मारे गए थे।
कुलगाम के पंचायत हलका ओडुरा के सरपंच और कुलगाम के भाजपा ओबीसी मोर्चा जिला महासचिव शब्बीर अहमद मीर की 9 मार्च को आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद एसएसपी सुरक्षा ने सरपंच को आवंटित आवास को रद्द कर दिया था। इसके खिलाफ शब्बीर की पत्नी ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर बच्चों व खुद की सुरक्षा खतरा बताया था।
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न्यायमूर्ति संजीव कुमार की पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता के वकील को सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को देखने के बाद, मेरा विचार है कि याचिकाकर्ता को सुरक्षा का खतरा है अथवा नहीं, यह उच्च न्यायालय निर्धारित नहीं कर सकता। यह अधिकारी इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए देखेंगे कि उनके पति एक राजनीतिक कार्यकर्ता थे और सरपंच के रूप में आतंकियों ने 9 मार्च को उनकी हत्या कर दी थी।
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एडीजी की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि याचिकाकर्ता उस आवास को बनाए रखने की हकदार हैं या नहीं। कुलगाम के ओडुरा के भाजपा के सरपंच शब्बीर अहमद मीर मार्च में हुए आतंकी हमले में मारे गए थे।
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कुलगाम के पंचायत हलका ओडुरा के सरपंच और कुलगाम के भाजपा ओबीसी मोर्चा जिला महासचिव शब्बीर अहमद मीर की 9 मार्च को आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद एसएसपी सुरक्षा ने सरपंच को आवंटित आवास को रद्द कर दिया था। इसके खिलाफ शब्बीर की पत्नी ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर बच्चों व खुद की सुरक्षा खतरा बताया था।
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न्यायमूर्ति संजीव कुमार की पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता के वकील को सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को देखने के बाद, मेरा विचार है कि याचिकाकर्ता को सुरक्षा का खतरा है अथवा नहीं, यह उच्च न्यायालय निर्धारित नहीं कर सकता। यह अधिकारी इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए देखेंगे कि उनके पति एक राजनीतिक कार्यकर्ता थे और सरपंच के रूप में आतंकियों ने 9 मार्च को उनकी हत्या कर दी थी।