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लद्दाख की बर्फ ने धर्मशाला से दुनिया को दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
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लेह/जम्मू। लद्दाख के ग्लेशियर से चली बर्फ चार दिन का सफर तय कर बिना पिघले हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला तक पहुंच गई। इस बर्फ ने बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा के लिए उपहार बनकर दुनिया को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
लद्दाख में खरदुंगला दर्रे के ग्लेशियर से लाई गई यह बर्फ कृत्रिम ग्लेशियर बनाने वाले सोनम वांगचुक और उनकी 23 सदस्यीय टीम ने धर्मशाला में धर्मगुरु दलाईलामा को पृथ्वी दिवस पर आयोजित सम्मेलन में भेंट की। बर्फ की भेंट के विचार के पीछे पर्यावरण संरक्षण के प्रति दुनिया का ध्यान आकर्षित करना था। थ्री ईडियट फिल्म के असली रेंचो और वैश्विक स्तर पर कई पुरस्कार जीत चुके सोनम वांगचुक ने बताया कि आइस स्तूप परियोजना (कृत्रिम ग्लेशियर) टीम के 23 स्वयंसेवकों ने साइकिल से खरदुंगला ग्लेशियर तक सफर किया। वहां से बर्फ का नीला हिस्सा खोजकर उसे काटा और फिर स्थानीय पश्मीना पालकों के सहयोग से लिए गए पश्मीना फाइबर में बर्फ पैक की गई। टीम ने साइकिल, इलेक्ट्रिक बाइक, सार्वजनिक परिवहन और स्थानीय पश्मीना का प्रयोग कर धर्मशाला तक का सफर चार दिन में तय किया। यह बर्फ इको फ्रेंडली उपायों के साथ लद्दाख से हिमाचल प्रदेश तक पहुंचाई गई।
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पश्मीना ने चार दिन सहेजे रखी खुरदुंगला की बर्फ
विश्वविख्यात पश्मीना ऊन की विशेषता का इस्तेमाल करते हुए कृत्रिम ग्लेशियर टीम ने बर्फ को लद्दाख से हिमाचल तक पहुंचाने में सफलता हासिल की। इंसुलेशन के लिए बर्फ को जिस कंटेनर में पैक किया जाना था, उसके भीतर चारों तरफ पश्मीना फाइबर लगाया गया। इको फ्रेंडली उपाय के तहत बर्फ की सख्त सिल्ली को कंटेनर में पैक किया गया।
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लद्दाख में खरदुंगला दर्रे के ग्लेशियर से लाई गई यह बर्फ कृत्रिम ग्लेशियर बनाने वाले सोनम वांगचुक और उनकी 23 सदस्यीय टीम ने धर्मशाला में धर्मगुरु दलाईलामा को पृथ्वी दिवस पर आयोजित सम्मेलन में भेंट की। बर्फ की भेंट के विचार के पीछे पर्यावरण संरक्षण के प्रति दुनिया का ध्यान आकर्षित करना था। थ्री ईडियट फिल्म के असली रेंचो और वैश्विक स्तर पर कई पुरस्कार जीत चुके सोनम वांगचुक ने बताया कि आइस स्तूप परियोजना (कृत्रिम ग्लेशियर) टीम के 23 स्वयंसेवकों ने साइकिल से खरदुंगला ग्लेशियर तक सफर किया। वहां से बर्फ का नीला हिस्सा खोजकर उसे काटा और फिर स्थानीय पश्मीना पालकों के सहयोग से लिए गए पश्मीना फाइबर में बर्फ पैक की गई। टीम ने साइकिल, इलेक्ट्रिक बाइक, सार्वजनिक परिवहन और स्थानीय पश्मीना का प्रयोग कर धर्मशाला तक का सफर चार दिन में तय किया। यह बर्फ इको फ्रेंडली उपायों के साथ लद्दाख से हिमाचल प्रदेश तक पहुंचाई गई।
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पश्मीना ने चार दिन सहेजे रखी खुरदुंगला की बर्फ
विश्वविख्यात पश्मीना ऊन की विशेषता का इस्तेमाल करते हुए कृत्रिम ग्लेशियर टीम ने बर्फ को लद्दाख से हिमाचल तक पहुंचाने में सफलता हासिल की। इंसुलेशन के लिए बर्फ को जिस कंटेनर में पैक किया जाना था, उसके भीतर चारों तरफ पश्मीना फाइबर लगाया गया। इको फ्रेंडली उपाय के तहत बर्फ की सख्त सिल्ली को कंटेनर में पैक किया गया।
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