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Srinagar News: शंकराचार्य मंदिर में किया गया छड़ी-मुबारक का पूजन
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बुधवार को श्रीनगर के शंकराचार्य मंदिर में छड़ी पूजन के दौरान महंत। संवाद
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। अमरनाथ यात्रा के अंतिम चरण के तहत बुधवार को हरियाली अमावस्या (श्रावण अमावस्या) के पावन अवसर पर पवित्र छड़ी-मुबारक को श्रीनगर की गोपाद्री पहाड़ियों पर स्थित ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर ले जाया गया। दशनामी अखाड़े के नेतृत्व में स्वामी अमरनाथ की इस पवित्र रजत गदा (छड़ी मुबारक) की अगुवाई मुख्य पुजारी महंत दीपेंद्र गिरि ने की। इस दौरान मंदिर परिसर में आयोजित विशेष पूजा-अर्चना में बड़ी संख्या में साधु और श्रद्धालु शामिल हुए।
शंकराचार्य मंदिर में पूजा के दौरान शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। वैदिक भजनों के बीच पवित्र गदा का विशेष पूजन किया गया, जो लगभग डेढ़ घंटे तक चला। इस अवसर पर महंत दीपेंद्र गिरि जी और उनके साथ आए साधुओं के समूह ने जम्मू-कश्मीर सहित पूरे देश में शांति, सद्भाव और समृद्धि के लिए सामूहिक प्रार्थना की।
महंत दीपेंद्र गिरि ने बताया कि गोपाद्री पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह सुरम्य मंदिर वास्तुकला का एक बेजोड़ उदाहरण है। प्राचीन काल में इस पहाड़ी को जेठ लारक कहा जाता था, जिसका नाम बाद में बदलकर गोपाद्री पर्वत हो गया। इतिहासकारों के अनुसार, पहाड़ी की चोटी पर स्थित इस मूल मंदिर का निर्माण राजा संदिमान (2629-2564 ईसा पूर्व) ने कराया गया था। प्राचीन काल में इस मंदिर को ज्येष्ठेश्वर या ज्योतिष्वर मंदिर के नाम से जाना जाता था। गुरु शंकराचार्य के इस पावन स्थल पर आगमन और निवास के बाद से यह पूरे विश्व में शंकराचार्य मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
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आज शारिका भवानी मंदिर जाएगी छड़ी मुबारक
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, इस धार्मिक अनुष्ठान के अगले चरण में पवित्र छड़ी-मुबारक को 13 अगस्त को श्रीनगर के हरि पर्वत पर स्थित ऐतिहासिक शारिका-भवानी मंदिर ले जाया जाएगा। वहां आदि शक्ति देवी शारिका के चरणों में शीश नवाकर देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की जाएगी। यद्यपि प्रतिकूल मौसम और ट्रैक मरम्मत कार्य के कारण आम तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा को अस्थाई रूप से रोका गया है, लेकिन पारंपरिक छड़ी मुबारक की मुख्य यात्रा अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही आगे बढ़ेगी। आगामी 22 अगस्त से यह पारंपरिक पहलगाम मार्ग से होते हुए चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी के रास्ते आगे बढ़ेगी। यह पवित्र छड़ी मुबारक 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के पावन अवसर पर अमरनाथ की पवित्र गुफा पहुंचेगी। वहां बाबा बर्फानी के दरबार में अंतिम मुख्य पूजा का आयोजन किया जाएगा, जिसके साथ ही इस वर्ष की स्वामी अमरनाथ जी यात्रा का औपचारिक रूप से समापन हो जाएगा।
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श्रीनगर। अमरनाथ यात्रा के अंतिम चरण के तहत बुधवार को हरियाली अमावस्या (श्रावण अमावस्या) के पावन अवसर पर पवित्र छड़ी-मुबारक को श्रीनगर की गोपाद्री पहाड़ियों पर स्थित ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर ले जाया गया। दशनामी अखाड़े के नेतृत्व में स्वामी अमरनाथ की इस पवित्र रजत गदा (छड़ी मुबारक) की अगुवाई मुख्य पुजारी महंत दीपेंद्र गिरि ने की। इस दौरान मंदिर परिसर में आयोजित विशेष पूजा-अर्चना में बड़ी संख्या में साधु और श्रद्धालु शामिल हुए।
शंकराचार्य मंदिर में पूजा के दौरान शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। वैदिक भजनों के बीच पवित्र गदा का विशेष पूजन किया गया, जो लगभग डेढ़ घंटे तक चला। इस अवसर पर महंत दीपेंद्र गिरि जी और उनके साथ आए साधुओं के समूह ने जम्मू-कश्मीर सहित पूरे देश में शांति, सद्भाव और समृद्धि के लिए सामूहिक प्रार्थना की।
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महंत दीपेंद्र गिरि ने बताया कि गोपाद्री पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह सुरम्य मंदिर वास्तुकला का एक बेजोड़ उदाहरण है। प्राचीन काल में इस पहाड़ी को जेठ लारक कहा जाता था, जिसका नाम बाद में बदलकर गोपाद्री पर्वत हो गया। इतिहासकारों के अनुसार, पहाड़ी की चोटी पर स्थित इस मूल मंदिर का निर्माण राजा संदिमान (2629-2564 ईसा पूर्व) ने कराया गया था। प्राचीन काल में इस मंदिर को ज्येष्ठेश्वर या ज्योतिष्वर मंदिर के नाम से जाना जाता था। गुरु शंकराचार्य के इस पावन स्थल पर आगमन और निवास के बाद से यह पूरे विश्व में शंकराचार्य मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
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आज शारिका भवानी मंदिर जाएगी छड़ी मुबारक
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, इस धार्मिक अनुष्ठान के अगले चरण में पवित्र छड़ी-मुबारक को 13 अगस्त को श्रीनगर के हरि पर्वत पर स्थित ऐतिहासिक शारिका-भवानी मंदिर ले जाया जाएगा। वहां आदि शक्ति देवी शारिका के चरणों में शीश नवाकर देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की जाएगी। यद्यपि प्रतिकूल मौसम और ट्रैक मरम्मत कार्य के कारण आम तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा को अस्थाई रूप से रोका गया है, लेकिन पारंपरिक छड़ी मुबारक की मुख्य यात्रा अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही आगे बढ़ेगी। आगामी 22 अगस्त से यह पारंपरिक पहलगाम मार्ग से होते हुए चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी के रास्ते आगे बढ़ेगी। यह पवित्र छड़ी मुबारक 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के पावन अवसर पर अमरनाथ की पवित्र गुफा पहुंचेगी। वहां बाबा बर्फानी के दरबार में अंतिम मुख्य पूजा का आयोजन किया जाएगा, जिसके साथ ही इस वर्ष की स्वामी अमरनाथ जी यात्रा का औपचारिक रूप से समापन हो जाएगा।