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जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा: 'नाबालिग से निकाह, बच्चे का जन्म भी पॉक्सो केस रद्द करने का आधार नहीं'

Wed, 28 Oct 2026 10:55 PM IST
Akash Dubey अमर उजाला ब्यूरो, श्रीनगर
अमर उजाला ब्यूरो, श्रीनगर Published by: Akash Dubey Updated Wed, 28 Oct 2026 10:55 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि नाबालिग से प्रेम संबंध, निकाह और बच्चे का जन्म पॉक्सो अपराध समाप्त नहीं कर सकता। नाबालिग की सहमति मान्य नहीं, सुनवाई जारी रहेगी।

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High Court stated that marriage to a minor is not a ground for quashing a case
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट

विस्तार

नाबालिग के साथ प्रेम संबंध, निकाह और बच्चे का जन्म भी पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज अपराध को खत्म करने का आधार नहीं बन सकता। जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट ने बुधवार को नाबालिग पीड़िता की ओर से दायर याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। पीड़िता ने आरोपी के खिलाफ दायर आरोपपत्र रद्द करने की मांग की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यौन संबंध के समय लड़की नाबालिग थी, इसलिए उसकी सहमति अपराध को समाप्त नहीं कर सकती। मामले में आरोपी के खिलाफ निचली अदालत में सुनवाई जारी रहेगी। न्यायमूर्ति यश पॉल बोरने की पीठ ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 528 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई की। मामला कश्मीर संभाग का है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64 और पॉक्सो अधिनियम की धाराओं 3/4 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

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अस्पताल में बच्ची के जन्म के बाद सामने आया मामला
मामला पांच अक्तूबर 2025 को सामने आया। डॉक्टर ने पुलिस को बताया कि अस्पताल में एक नाबालिग ने बच्चे को जन्म दिया है। इसके बाद पट्टन थाने से जीरो एफआईआर शालतेंग थाने भेजी गई। बच्ची के साथ अस्पताल पहुंचे युवक को आरोपी बनाया गया। जांच के दौरान पीड़िता, उसके माता-पिता और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए। आरोपी को सात अक्तूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया। पीड़िता, नवजात और आरोपी के डीएनए नमूने जांच के लिए भेजे गए, जिसमें आरोपी नवजात का जैविक पिता पाया गया।
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 जांच में सामने आया कि बच्चे के जन्म के समय पीड़िता की उम्र 16 वर्ष, तीन महीने और 11 दिन थी। आरोपी उसका दूर का रिश्तेदार बताया गया है। आरोप था कि वह उसके घर आता था और कभी-कभी रात में भी रुकता था। इसी दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने, जिससे पीड़िता गर्भवती हुई। मामले में तीन दिसंबर 2025 को आरोपपत्र दाखिल किया गया और 28 सितंबर 2026 को आरोप तय किए गए। हालांकि, पीड़िता की गवाही अभी दर्ज नहीं हुई थी।
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पीड़िता ने कहा, अपनी मर्जी से किया निकाह
हाईकोर्ट में पीड़िता की ओर से दलील दी गई कि वह और आरोपी एक-दूसरे से प्रेम करते थे और दोनों ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार निकाह किया था। उसके अनुसार, माता-पिता को भी उनके संबंध की जानकारी थी। पीड़िता ने कहा कि वह अब आरोपी के साथ पत्नी के रूप में रह रही है और उसके साथ वैवाहिक जीवन जारी रखना चाहती है। उसने जबरन यौन संबंध बनाए जाने से भी इन्कार किया।


रोमियो-जूलियट क्लॉज पर भी हुई चर्चा
हाईकोर्ट ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम लागू होने के बाद ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें प्रेम संबंधों में शामिल युवती की उम्र बाद में नाबालिग पाई जाती है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का उल्लेख किया, जिसमें कोर्ट ने किशोरों के वास्तविक प्रेम संबंधों को पॉक्सो कानून के कठोर प्रावधानों से बचाने के लिए केंद्र सरकार से 'रोमियो-जूलियट क्लॉज' पर विचार करने को कहा था। हाईकोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के रोशन लकरा मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें किशोरों के संबंध से जुड़े आपराधिक मुकदमे के परिवार पर पड़ने वाले प्रभावों पर विचार किया गया था।

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