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जेके बैंक के पूर्व चेयरमैन नेंगरू को अंतरिम जमानत
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श्रीनगर। विशेष भ्रष्टाचार निरोधक अदालत ने जम्मू-कश्मीर बैंक के पूर्व अध्यक्ष परवेज अहमद नेंगरू को दो मामलों में 31 मई तक अंतरिम जमानत दे दी है। इसमें हाउसकीपिंग के लिए निविदाओं के अवैध आवंटन का मामला भी शामिल है। इसके कारण बैंक को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
एंटी करप्शन ब्यूरो की विशेष अदालत के न्यायाधीश सीएल बावोरिया ने शनिवार को नेंगरू को राहत देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता (आरोपी) की हिरासत की अवधि और कोरोना महामारी के मद्देनजर उच्च न्यायालय के निर्देशों, तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद नेंगरू को दोनों मामलों में 31 मई 2021 तक सशर्त अंतरिम जमानत दी जाती है। याचिकाकर्ता को प्रत्येक प्राथमिकी में एक लाख रुपये के जमानत बांड और एक जमानतदार के साथ इतनी ही राशि के व्यक्तिगत बांड प्रस्तुत करना होगा।
कोर्ट ने कहा कि इस अवधि में जब भी नेंगरू को बुलाया जाएगा उन्हें जांच अधिकारी के समक्ष पेश होना होगा। अदालत द्वारा निर्धारित शर्तों के उल्लंघन कर आरोपी की जमानत रद्द करने के लिए अभियोजन पक्ष अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्रता होगा।
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मालूम हो कि नेंगरू को एसीबी ने इस साल अप्रैल में हाउसकीपिंग के लिए अवैध रूप से निविदाएं आवंटित करने के मामले में गिरफ्तार किया था। इससे कथित तौर पर बैंक को 6.92 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। एसीबी ने पिेछले साल अक्टूबर में एक निजी फर्म और नेंगरू सहित तीन पूर्व बैंक अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। नेंगरू को कार्यकाल की समाप्ति से पांच महीने पहले जून 2019 में पद से हटा दिया गया था। दिसंबर 2019 में एसीबी ने बैंक में अवैध नियुक्तियों से संबंधित एक अन्य मामले में नेंगरू और 22 अन्य के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। आरोपियों में बैंक के एक अन्य पूर्व चेयरमैन शेख मुश्ताक भी शामिल हैं।
नेंगरू के स्थान पर छिब्बर को बनाया था अंतरिम अध्यक्ष
सरकार ने नेंगरू को बर्खास्त करने का आदेश दिया था और उनकी जगह अंतरिम अध्यक्ष के रूप में आरके छिब्बर को नियुक्त किया गया था। छिब्बर को 31 मार्च को छह महीने के लिए सातवां विस्तार मिला है, जिससे कारण वह सबसे लंबे समय तक इस पद पर सेवा देने वाले मुख्य कार्यकारी अधिकारी बन गए। (एजेंसी)
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एंटी करप्शन ब्यूरो की विशेष अदालत के न्यायाधीश सीएल बावोरिया ने शनिवार को नेंगरू को राहत देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता (आरोपी) की हिरासत की अवधि और कोरोना महामारी के मद्देनजर उच्च न्यायालय के निर्देशों, तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद नेंगरू को दोनों मामलों में 31 मई 2021 तक सशर्त अंतरिम जमानत दी जाती है। याचिकाकर्ता को प्रत्येक प्राथमिकी में एक लाख रुपये के जमानत बांड और एक जमानतदार के साथ इतनी ही राशि के व्यक्तिगत बांड प्रस्तुत करना होगा।
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कोर्ट ने कहा कि इस अवधि में जब भी नेंगरू को बुलाया जाएगा उन्हें जांच अधिकारी के समक्ष पेश होना होगा। अदालत द्वारा निर्धारित शर्तों के उल्लंघन कर आरोपी की जमानत रद्द करने के लिए अभियोजन पक्ष अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्रता होगा।
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मालूम हो कि नेंगरू को एसीबी ने इस साल अप्रैल में हाउसकीपिंग के लिए अवैध रूप से निविदाएं आवंटित करने के मामले में गिरफ्तार किया था। इससे कथित तौर पर बैंक को 6.92 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। एसीबी ने पिेछले साल अक्टूबर में एक निजी फर्म और नेंगरू सहित तीन पूर्व बैंक अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। नेंगरू को कार्यकाल की समाप्ति से पांच महीने पहले जून 2019 में पद से हटा दिया गया था। दिसंबर 2019 में एसीबी ने बैंक में अवैध नियुक्तियों से संबंधित एक अन्य मामले में नेंगरू और 22 अन्य के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। आरोपियों में बैंक के एक अन्य पूर्व चेयरमैन शेख मुश्ताक भी शामिल हैं।
नेंगरू के स्थान पर छिब्बर को बनाया था अंतरिम अध्यक्ष
सरकार ने नेंगरू को बर्खास्त करने का आदेश दिया था और उनकी जगह अंतरिम अध्यक्ष के रूप में आरके छिब्बर को नियुक्त किया गया था। छिब्बर को 31 मार्च को छह महीने के लिए सातवां विस्तार मिला है, जिससे कारण वह सबसे लंबे समय तक इस पद पर सेवा देने वाले मुख्य कार्यकारी अधिकारी बन गए। (एजेंसी)