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बाल कलाकारों ने कसे व्यवस्थाओं पर तंज
ब्यूरो/ अमर उजाला, श्रीनगर
Updated Tue, 28 Mar 2017 08:46 PM IST
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गढवाल विवि के चौरास परिसर आडिटोरियम मे छुटकी की क्या गलती नाटक का मंचन करते कलाकार
- फोटो : amar ujala
‘शान-ए-बचपन’ नाट्य महोत्सव में बाल कलाकारों ने नाटकों के माध्यम से सामाजिक ताने-बाने व व्यवस्थाओं पर जम कर तंज कसे। बाल कलाकारों के मंजे हुए अभिनय से दर्शकों को पूरे नाट्य महोत्सव के दौरान बांधे रखा।
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चौरास परिसर स्थित आडिटोरियम में गढ़वाल विवि के लोक कला संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित हो रहे तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव के अंतिम दिन मंगलवार को लोक कला निष्पादन केंद्र के डा. संजय पांडे व अजीत पांडे ने महोत्सव का शुभारंभ किया। डा. संजय पांडे व डा. अजीत पंवार ने कहा कि महोत्सव का आयोजन अपने उद्देश्य में सफल रहा। आयोजन समिति के डा. अजीत पंवार ने सभी प्रतिभागियों व दर्शकों को धन्यवाद ज्ञापित किया। महोत्सव के अंतिम दिन भगवती मेमोरियल पब्लिक स्कूल के बाल कलाकारों ने ‘छुटकी की क्या गलती’ नाटक का मंचन किया।
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नाटक का कथानक
श्रीनगर। नाटक के कथानक के अनुसार नाटक की मुख्य पात्र छुटकी सबकी भलाई करने का प्रण लेती है। वह किताब में पढ़ती है कि ज्यादा देर तक सोना अच्छी बात नहीं है। उसके सामने ही उसकी दीदी सो रही होती है। वह दीदी को उठाने का प्रयास करती है, लेकिन जब दीदी नहीं उठती है तो वह उसके ऊपर पानी डाल देती है। इससे उसकी दीदी नाराज होकर उसे थप्पड़ मारती है। एक दिन वह टीवी पर देखते ही कि सिगरेट पीने से टीबी व कैंसर होता है। तो वह अपने पापा की सिगरेट का डब्बी नाली में फेंक देती है। पापा को जब पता चलता है तो वह छुटकी की पिटाई करते हैं। छुटकी जब भी भलाई करने की सोचती है तो उसे मार पड़ती है।
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मंच के पीछे-
नाटक का निर्देशन - संदीप कुमार
लाइट- राधा भाटी
मंच पर - रितुम्बरा थपलियाल, श्रेया, शिवानी, साक्षी, गरिमा, दिशा, खुशी।