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कश्मीर में मिट्टी के बर्तनों की परंपरा पुनर्जीवित होने की उम्मीदें बढ़ी
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कश्मीर की क्राल कूर (कुम्हार की बेटी) 32 साल की सिविल इजीनयिर साइमा सफी। (फाइल फोटो)
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श्रीनगर। कश्मीर घाटी की 32 वर्षीय सिविल इंजीनियर साइमा सफी की पहल के बाद जम्मू-कश्मीर की वर्षों पुरानी मृत प्राय हो चुकी मिट्टी के बर्तनों की परंपरा के पुनर्जीवित होने की संभावना बढ़ गई है। इस पहल ने सरकार का ध्यान इस ओर खींचा है।
क्राल कूर (कश्मीरी में कुम्हार लड़की) के नाम से मशहूर 32 साल की साइमा शफी को हाल ही में जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प विभाग द्वारा मध्य कश्मीर के बीरवाह के कारीगरों के साथ अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया था। इस बातचीत के दौरान कश्मीर में मिट्टी के बर्तनों के पुनरुद्धार के लिए भारी सकारात्मकर प्रतिक्रियाएं सामने आईं। हस्तशिल्प विभाग के अधिकारी ने बताया कि दिलचस्पी दिखाने वाले कारीगरों पर डाटा एकत्र किया जाएगा ताकि उनके लिए योजनाएं बनाई जा सकें।
यहां लोक निर्माण विभाग के साथ एक कनिष्ठ अभियंता के रूप में काम करने वाली सफी ने कारीगरों को साथ बातचीत में कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि आने वाली पीढ़ियों को वह मिट्टी के बर्तनों की कला सिखाएंगे। सफी कहती हैं कि दही अभी भी एक मिट्टी के बर्तन में सबसे बेहतर ढंग से जमता है। गर्मियों के दौरान मिट्टी के बर्तन पानी को ठंडा बनाने पर अपना प्रभाव डालते हैं। शफी ने कहा कि अब समय आ गया है जहां हमें मिट्टी के बर्तनों की सदियों पुरानी परंपरा को आधुनिक कश्मीरी रसोई में वापस लाने की आवश्यकता है। शफी ने उन्हें श्रीनगर के मशहूर बुर्ज होम पुरातात्विक स्थल के बारे में भी बताया। बुर्ज होम नामक स्थान पर खुदाई के दौरान वहां से पुरातन मिट्टी के बर्तन पाए गए थे।
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क्राल कूर (कश्मीरी में कुम्हार लड़की) के नाम से मशहूर 32 साल की साइमा शफी को हाल ही में जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प विभाग द्वारा मध्य कश्मीर के बीरवाह के कारीगरों के साथ अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया था। इस बातचीत के दौरान कश्मीर में मिट्टी के बर्तनों के पुनरुद्धार के लिए भारी सकारात्मकर प्रतिक्रियाएं सामने आईं। हस्तशिल्प विभाग के अधिकारी ने बताया कि दिलचस्पी दिखाने वाले कारीगरों पर डाटा एकत्र किया जाएगा ताकि उनके लिए योजनाएं बनाई जा सकें।
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यहां लोक निर्माण विभाग के साथ एक कनिष्ठ अभियंता के रूप में काम करने वाली सफी ने कारीगरों को साथ बातचीत में कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि आने वाली पीढ़ियों को वह मिट्टी के बर्तनों की कला सिखाएंगे। सफी कहती हैं कि दही अभी भी एक मिट्टी के बर्तन में सबसे बेहतर ढंग से जमता है। गर्मियों के दौरान मिट्टी के बर्तन पानी को ठंडा बनाने पर अपना प्रभाव डालते हैं। शफी ने कहा कि अब समय आ गया है जहां हमें मिट्टी के बर्तनों की सदियों पुरानी परंपरा को आधुनिक कश्मीरी रसोई में वापस लाने की आवश्यकता है। शफी ने उन्हें श्रीनगर के मशहूर बुर्ज होम पुरातात्विक स्थल के बारे में भी बताया। बुर्ज होम नामक स्थान पर खुदाई के दौरान वहां से पुरातन मिट्टी के बर्तन पाए गए थे।
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