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नवरेह पर कश्मीरी पंडितों की वापसी और सांप्रदायिक सौहार्र्द मजबूत करने पर जोर

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Emphasis on Navreh to return Kashmiri Pandits and strengthen communal harmony
श्रीनगर। नवरेह पर मंगलवार को कश्मीरी पंडितों ने हरि पर्वत पर मां शारिका देवी के मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके साथ ही मुस्लिम तथा अन्य समुदायों के साथ मिलकर अलगाववादियों के गढ़ डाउनटाउन में स्थित शीतलनाथ मंदिर में नवरेह मिलन का आयोजन कर सांप्रदायिक सौहार्र्द का परिचय दिया। कश्मीर पंडित समुदाय की घाटी वापसी पर जोर देते हुए कहा गया कि उनके बिना कश्मीर अधूरा है। हम उन्हें अपने दिलों में बसाना चाहते हैं।
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कश्मीरी पंडित समुदाय में नवरेह को लेकर सुबह से ही उत्साह देखने को मिल रहा था। हरि पर्वत पर मां शारिका के दरबार में पहुंचकर उन्होंने पूजा अर्चना की। सुख-समृद्धि, शांति और सभी के सम्मान की कामना की। दोपहर बाद आयोजित नवरेह मिलन में कश्मीरी पंडितों के साथ ही मुस्लिम, सिख, ईसाई समुदाय के लोगों ने मिलकर इस बात पर जोर दिया कि कश्मीरी पंडित समुदाय की घाटी में वापसी होनी चाहिए। ससम्मान उन्हें लाया जाना चाहिए क्योंकि वे हम सभी के भाई हैं। उनके बिना कश्मीर और कश्मीरी संस्कृति की बात बेमानी है। जरूरत इस बात की है कि सभी लोग मिल जुलकर रहें ताकि सांप्रदायिक सौहार्र्द और आपसी भाईचारा मजबूत हो सके। इस अवसर पर मेयर जुनैद मट्टू, भाजपा महासचिव संगठन अशोक कौल, सीपीआईएम नेता मोहम्मद युसूफ तारिगामी, रिकन्सलिएशन, रिटर्न रिहेब्लिेशन ऑफ माइग्रेंट्स के चेयरमैन सतीश महालदार समेत अन्य लोग उपस्थित थे।
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पंडितों की वापसी लायक बना माहौल: अशोक कौल
भाजपा महासचिव अशोक कौल ने कहा कि श्रीनगर के मंदिरों में लंबे समय बाद कश्मीरी पंडितों को पूजा-अर्चना करते देखा गया है। इसके साथ ही आज के दिन से पंडितों की घाटी में वापसी शुरू हो गई है। स्थानीय पंडितों के साथ ही घाटी से बाहर चले गए पंडित भी काफी संख्या में हवन पूजन करते देखे गए। जहां तक सुरक्षा का सवाल है तो घाटी में रहने वाले पंडित अपने को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अब सुरक्षा संबंधी माहौल पंडितों की अपनी जड़ों में लौटने को अनुकूल हो गया है। अब सुरक्षा का कोई मसला नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि घाटी में मंदिरों से कब्जे हटाने की दिशा में सरकार की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही सभी मंदिरों से अतिक्रमण हटा दिए जाएंगे।
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