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दुष्कर्म की दरिंदगी पर कोर्ट का डंडा: श्रीनगर में नाबालिग से दुष्कर्म, अदालत ने दोषी को सुनाई 20 साल की सजा
Sat, 12 Oct 2024 12:41 PM IST
निकिता गुप्ता
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: निकिता गुप्ता
Updated Sat, 12 Oct 2024 12:41 PM IST
सार
श्रीनगर की फास्ट ट्रैक अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म करने के दोषी युवक को 20 साल की सजा और 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया, जो पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
श्रीनगर की फास्ट ट्रैक अदालत ने एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म करने वाले युवक को दोषी करार देते हुए 20 साल की सजा सुनाई है। दोषी, डेनिश मेहराज, पर अदालत ने 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जो कि पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा। यदि वह जुर्माना अदा नहीं करता, तो उसे छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
अदालत में प्रस्तुत किए गए सबूतों के अनुसार, पीड़िता ने बताया कि दोषी ने फेसबुक के माध्यम से उससे संपर्क किया और उसे श्रीनगर में ट्यूशन के लिए बुलाया। आरोपी ने बाद में पीड़िता को अपने घर बुलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधीश आरती मोहन ने कहा कि युवक को पॉक्सो अधिनियम की धारा छह और आईपीसी की धारा 376 के तहत दोषी ठहराया गया है।
इस मामले में अदालत ने पीड़िता को तीन लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। यह निर्णय न केवल पीड़िता के लिए न्याय की एक उम्मीद है, बल्कि समाज में ऐसे अपराधों के प्रति सख्त संदेश भी है। जिला न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह के अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं और ऐसे मामलों में कठोर सजा जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए और समाज में दुष्कर्म के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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अदालत में प्रस्तुत किए गए सबूतों के अनुसार, पीड़िता ने बताया कि दोषी ने फेसबुक के माध्यम से उससे संपर्क किया और उसे श्रीनगर में ट्यूशन के लिए बुलाया। आरोपी ने बाद में पीड़िता को अपने घर बुलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधीश आरती मोहन ने कहा कि युवक को पॉक्सो अधिनियम की धारा छह और आईपीसी की धारा 376 के तहत दोषी ठहराया गया है।
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इस मामले में अदालत ने पीड़िता को तीन लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। यह निर्णय न केवल पीड़िता के लिए न्याय की एक उम्मीद है, बल्कि समाज में ऐसे अपराधों के प्रति सख्त संदेश भी है। जिला न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह के अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं और ऐसे मामलों में कठोर सजा जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए और समाज में दुष्कर्म के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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