फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   BSF fulfills a father's duty at the wedding of a martyred soldier's daughter.

जम्मू-कश्मीर: बलिदानी की बेटी के निकाह में बीएसएफ ने निभाया पिता का फर्ज, मेहंदी वाले हाथ पर रखा अपना हाथ

Wed, 07 Oct 2026 02:08 PM IST
Nikita Gupta अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: Nikita Gupta Updated Wed, 07 Oct 2026 02:08 PM IST
सार

कुपवाड़ा के सीमावर्ती गबरा गांव में बलिदानी बीएसएफ जवान मोहम्मद रफीक रैना की बेटी के निकाह में 31वीं बटालियन के जवानों ने परिवार का साथ निभाते हुए पिता की भूमिका निभाई। बीएसएफ ने शादी के इंतजामों में मदद की, दुल्हन को उपहार दिया और मेहंदी रचे हाथ पर हाथ रखकर आशीर्वाद देते हुए पिता की कमी को पूरा करने का भावुक प्रयास किया।

विज्ञापन
BSF fulfills a father's duty at the wedding of a martyred soldier's daughter.
बलिदानी जवान रफीक की बेटी की शादी में पहुंचे बीएसएफ के अधिकारी। - फोटो : संवाद

विस्तार

हाथों में मेहंदी रची...। घर में शादी के गीत...। मेहमानों की आवाजाही और आंगन में निकाह की तैयारियां। खुशियों के इस माहौल में बस एक कमी थी पिता की, जो बेटी की जिंदगी के इस सबसे खास दिन उसका हाथ थामने के लिए मौजूद नहीं थे। तभी गबरा गांव स्थित इस घर के आंगन में बीएसएफ के जवानों और अधिकारियों ने कदम रखा। किसी औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि उस बलिदानी पिता की कमी को अपनेपन से भरने के लिए।

विज्ञापन
Trending Videos

कुपवाड़ा के करनाह-तंगधार सेक्टर के सीमावर्ती गबरा (नवांगबरा) गांव में मंगलवार की यह तस्वीर एक बलिदानी की बेटी के निकाह की है। बीएसएफ के जवान मोहम्मद रफीक रैना ने 2007 में शिलॉन्ग में देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनके जाने के बाद परिवार ने जिंदगी आगे बढ़ाई, लेकिन बेटी के जीवन के उस पड़ाव पर पिता की कमी फिर सामने आ खड़ी हुई, जहां हर बेटी अपने पिता का हाथ और आशीर्वाद चाहती है। इसी कमी के बीच मंगलवार को बीएसएफ की 31वीं बटालियन के अधिकारी और जवान परिवार के साथ खड़े नजर आए।

डिप्टी कमांडेंट मनवेंद्र सिंह और सेकंड-इन-कमांड अमरजीत सिंह की अगुवाई में बीएसएफ की टीम घर पहुंची। महिला कांस्टेबल भी टीम का हिस्सा थीं। जवानों ने शादी के इंतजामों में परिवार का हाथ बंटाया और पूरे आयोजन में अभिभावक की भूमिका निभाई। पंडाल से लेकर रोशनी और दूसरे जरूरी इंतजामों तक बीएसएफ ने सहयोग किया। दुल्हन के लिए सम्मान स्वरूप उपहार भी दिए। सबसे भावुक पल तब आया, जब बीएसएफ अधिकारियों ने मेहंदी रचे दुल्हन के हाथ पर अपना हाथ रखकर उसे आशीर्वाद दिया। उस पल पिता की अनुपस्थिति जैसे कुछ देर के लिए पीछे छूट गई। बीएसएफ अधिकारियों ने दुल्हन से कहा कि पिता भले ही आज मौजूद नहीं हैं, लेकिन बीएसएफ का यह परिवार साथ खड़ा है। बेटी के लिए यह सिर्फ एक औपचारिक संदेश नहीं था। जिस घर में 2007 में वर्दी में लिपटा एक पिता हमेशा के लिए विदा हुआ था, उसी घर में वर्षों बाद उसी वर्दी ने बेटी की खुशियों में साथ निभाया।

विज्ञापन
विज्ञापन

उस दिन लगा था दुनिया खत्म हो गई
मोहम्मद रफीक रैना की पत्नी ने नम आंखों से बीएसएफ के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि 2007 में पति के जाने के बाद लगा था कि उनकी दुनिया खत्म हो गई। लेकिन बीएसएफ ने इतने वर्षों में परिवार को कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया। बेटी की शादी के दिन जवानों और अधिकारियों ने जिस तरह साथ दिया, वह उनके लिए बेहद भावुक पल था।
 
गांव के नंबरदार मोहम्मद साजिद खान ने कहा कि बलिदानी की बेटी के सिर पर बीएसएफ ने जिस तरह हाथ रखा, वह सीमावर्ती इलाकों के लोगों और सुरक्षा बलों के बीच रिश्ते की तस्वीर पेश करता है। गांव के पूर्व सरपंच यासीन राथर ने भी बीएसएफ की भूमिका को सराहा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed