Apples in Kashmir: कश्मीर में सभी कोल्ड स्टोरेज इकाइयां फुल, हर साल 20 लाख मीट्रिक टन सेब होता है उत्पादित
कश्मीर में हर साल औसतन 20 लाख मीट्रिक टन से अधिक सेब का उत्पादन होता है। यह आंकड़ा कुछ वर्षों में 25 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच जाता है।
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कश्मीर घाटी में सभी कोल्ड स्टोरेज इकाइयां फुल हो गई हैं। बागवानों का कहना है कि बाजारों में सेब की अच्छी मांग है। इन्हें कोल्ड स्टोरेज इकाइयों में रखते हैं। इस साल पहले ही कोल्ड स्टोरेज इकाइयां बुक कर ली हैं, ताकि अगले साल मार्च के बाद अच्छे दाम मिल सकें। उन्होंने कहा कि हालांकि कुछ वर्षों की तुलना में इस बार उत्पादन कम है।
दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के बागवान ऐजाज डार ने कहा कि बसंत के महीने में सेब की मांग बढ़ जाती है। इसलिए बागवान अपने उत्पादन का कुछ हिस्सा कोल्ड स्टोरेज इकाइयों में रखना पसंद करते हैं। सिडको लस्सीपोरा में कोल्ड स्टोरेज इकाइयों में से एक के प्रबंधक महराज अहमद ने कहा कि उनका 99 प्रतिशत स्टोर पहले से ही भरा है। एक अन्य स्टोर के कर्मचारी अशफाक अहमद ने कहा कि उनकी इकाई की क्षमता 3 लाख सेब पेटियां रखने की है। इनमें से लगभग 90 प्रतिशत की बुकिंग मार्च में ही हो गई थी।
उन्होंने कहा कि कोल्ड स्टोरेज इकाइयों ने बागवानी क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला दी है। ये उत्पादकों को अपनी इच्छा के अनुसार अपना उत्पादन बेचने का विकल्प देते हैं। उनहोंने कहा, कोल्ड स्टोरेज इकाइयां सैकड़ों लोगों को रोजगार भी प्रदान करती हैं। मजदूरों को भी काम मिलता है, क्योंकि अब सेब की पैकिंग का काम साल भर चलता है। कश्मीर में लगभग 50 कोल्ड स्टोरेज इकाइयां हैं। इनमें से अधिकांश सिडको लस्सीपोरा में हैं।
एक अन्य मैनेजर बशीर असद ने कहा कि कोल्ड स्टोरेज इकाइयों ने सेब उत्पादकों को अपनी इच्छा के अनुसार उत्पादन बेचने की आजादी दी है। हमारे सेब की दुनिया भर में मांग है। हालांकि कोल्ड स्टोरेज इकाइयों की संख्या अभी बहुत कम है।
कश्मीर में हर साल औसतन 20 लाख मीट्रिक टन से अधिक सेब का उत्पादन होता है। यह आंकड़ा कुछ वर्षों में 25 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच जाता है। जम्मू-कश्मीर में 2017 के आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि कश्मीर की आधी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सेब उद्योग पर निर्भर है और 3.5 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र सेब की खेती के अंतर्गत है।