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Srinagar News: घाटी में आतंकी मूवमेंट के आधार पर चलाए सर्च ऑपरेशन, 90 ओजीडब्ल्यू गिरफ्तार
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आतंकवादी विरोधी अभियानों में पांच जवान शहीद , अब भी 65 आतंकवादी सक्रिय
अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। कश्मीर घाटी में आतंकवादी विरोधी अभियानों को लेकर सुरक्षाबलों के लिहाज से वर्ष 2025 एक काफी सफल वर्ष रहा। साल भर आतंकवादियों के खिलाफ बड़े अभियान चलाए गए। पुलिस ने अन्य सुरक्षाबलों के साथ मिलकर आतंकवादियों के खिलाफ करीब 1,30,000 कोर्डन एंड सर्च ऑपरेशन (कासो) चलाए गए।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनका ग्राउंड इंटेलिजेंस नेटवर्क जो है काफी मजबूत है जिसने इस वर्ष कई अहम इनपुट साझा किये जिनके आधार पर कई बड़े ऑपरेशन अंजाम दिए गए और आतंकवादियों के अच्छे कैडर को मार गिराया गया। उन्होंने बताया कि मुख्य ऑपरेशनों में एक ''''ऑप महादेव'''' रहा जिसमें सुरक्षाबलों ने श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र में 28 जुलाई 2025 को एक मुठभेड़ में पहलगाम हमले के दोषियों - सुलेमान शाह उर्फ हाशिम मूसा, हमजा अफगानी और जिब्रान को मार गिराया। बता दें कि पहलगाम हमले में आतंकवादियों ने 26 निहथों की जान ली जिनमें अधिकतर पर्यटक थे।
उन्होंने बताया कि पुलिस की मुस्तैदी और आतंकवादी विरोधी सक्रिय अभियानों का नतीजा है कि घाटी में आतंकवादियों की संख्या का ग्राफ 100 के आंकड़े से काफी नीचे पहुंच चुका है। वर्तमान में 65 आतंकवादी कश्मीर में सक्रिय हैं जिनमें से अधिकार विदेशी आतंकी हैं। आतंकवादियों को स्थानीय समर्थन कम मिल पा रहा है क्योंकि सुरक्षाबलों की नीतियों के चलते अब युवा समझ चुके हैं कि बंदूक के बदले अब कलम ही उनका मुस्तकबिल सवार सकती है।
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सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार कश्मीर घाटी में आतंकियों के खिलाफ पिछले कुछ वर्षों से सख्ती से जारी ऑपरेशनों के नतीजे यह रहे कि आतंकवादी संगठनों की लीडरशिप मारी गई है और उनका पूरी तरह से सफाया हो चुका है। स्थानीय भर्ती न के बराबर होने के चलते पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी आकाओं की पूरी कोशिश रहती है कि वह सीमा के उस पार से आतंकवादियों की एलओसी पर ज्यादा से ज्यादा घुसपैठ कराएं लेकिन एलओसी पर सेना और बीएसएफ की तैनाती और उनका मज़बूत एंटी-इंफिल्ट्रेशन ग्रिड आतंकवादियों की इस कोशिश को नाकाम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। पुलिस अधिकारी के अनुसार इस वर्ष घुसपैठ की पांच सफल कोशिशें हुई हैं लेकिन आतंकवादियों को या तो एलओसी पर या आंतरिक क्षेत्रों में सुरक्षाबलों द्वारा मार गिराया गया। जबकि 12 ऐसी कोशिशों को एलओसी पर ही विफल बनाया गया।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष आतंकवादी विरोधी अभियानों के दौरान कश्मीर घाटी में पांच जवान बलिदान हुए। पुलिस का मुख्य ध्यान आतंकवादी ओवर-ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) ईको-सिस्टम को ध्वस्त करना था क्योंकि सक्रिय आतंकवादियों की कमी के चलते यही नेटवर्क है जो घाटी में आतंकवादी को सक्रिय रखने में सहायता प्रदान करता है। अधिकारी के अनुसार ओजीडब्ल्यू नेटवर्क पर वार जारी रखते हुए इस वर्ष 90 ओजीडब्ल्यू को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा इस वर्ष आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच 15 मुठभेड़ें देखने को मिली जिसमें सुरक्षाबलों को 25 आतंकवादियों को मार गिराने में सफलता हाथ लगी। इनमें अधिकतर ऑपरेशन जम्मू कश्मीर पुलिस द्वारा पाए गए विशिष्ट इनपुट के आधार पर अंजाम दिए गए। अधिकारी ने बताया कि उन्हें उम्मीद है कि वर्ष 2026 भी काफी सफल रहेगा।
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अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। कश्मीर घाटी में आतंकवादी विरोधी अभियानों को लेकर सुरक्षाबलों के लिहाज से वर्ष 2025 एक काफी सफल वर्ष रहा। साल भर आतंकवादियों के खिलाफ बड़े अभियान चलाए गए। पुलिस ने अन्य सुरक्षाबलों के साथ मिलकर आतंकवादियों के खिलाफ करीब 1,30,000 कोर्डन एंड सर्च ऑपरेशन (कासो) चलाए गए।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनका ग्राउंड इंटेलिजेंस नेटवर्क जो है काफी मजबूत है जिसने इस वर्ष कई अहम इनपुट साझा किये जिनके आधार पर कई बड़े ऑपरेशन अंजाम दिए गए और आतंकवादियों के अच्छे कैडर को मार गिराया गया। उन्होंने बताया कि मुख्य ऑपरेशनों में एक ''''ऑप महादेव'''' रहा जिसमें सुरक्षाबलों ने श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र में 28 जुलाई 2025 को एक मुठभेड़ में पहलगाम हमले के दोषियों - सुलेमान शाह उर्फ हाशिम मूसा, हमजा अफगानी और जिब्रान को मार गिराया। बता दें कि पहलगाम हमले में आतंकवादियों ने 26 निहथों की जान ली जिनमें अधिकतर पर्यटक थे।
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उन्होंने बताया कि पुलिस की मुस्तैदी और आतंकवादी विरोधी सक्रिय अभियानों का नतीजा है कि घाटी में आतंकवादियों की संख्या का ग्राफ 100 के आंकड़े से काफी नीचे पहुंच चुका है। वर्तमान में 65 आतंकवादी कश्मीर में सक्रिय हैं जिनमें से अधिकार विदेशी आतंकी हैं। आतंकवादियों को स्थानीय समर्थन कम मिल पा रहा है क्योंकि सुरक्षाबलों की नीतियों के चलते अब युवा समझ चुके हैं कि बंदूक के बदले अब कलम ही उनका मुस्तकबिल सवार सकती है।
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सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार कश्मीर घाटी में आतंकियों के खिलाफ पिछले कुछ वर्षों से सख्ती से जारी ऑपरेशनों के नतीजे यह रहे कि आतंकवादी संगठनों की लीडरशिप मारी गई है और उनका पूरी तरह से सफाया हो चुका है। स्थानीय भर्ती न के बराबर होने के चलते पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी आकाओं की पूरी कोशिश रहती है कि वह सीमा के उस पार से आतंकवादियों की एलओसी पर ज्यादा से ज्यादा घुसपैठ कराएं लेकिन एलओसी पर सेना और बीएसएफ की तैनाती और उनका मज़बूत एंटी-इंफिल्ट्रेशन ग्रिड आतंकवादियों की इस कोशिश को नाकाम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। पुलिस अधिकारी के अनुसार इस वर्ष घुसपैठ की पांच सफल कोशिशें हुई हैं लेकिन आतंकवादियों को या तो एलओसी पर या आंतरिक क्षेत्रों में सुरक्षाबलों द्वारा मार गिराया गया। जबकि 12 ऐसी कोशिशों को एलओसी पर ही विफल बनाया गया।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष आतंकवादी विरोधी अभियानों के दौरान कश्मीर घाटी में पांच जवान बलिदान हुए। पुलिस का मुख्य ध्यान आतंकवादी ओवर-ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) ईको-सिस्टम को ध्वस्त करना था क्योंकि सक्रिय आतंकवादियों की कमी के चलते यही नेटवर्क है जो घाटी में आतंकवादी को सक्रिय रखने में सहायता प्रदान करता है। अधिकारी के अनुसार ओजीडब्ल्यू नेटवर्क पर वार जारी रखते हुए इस वर्ष 90 ओजीडब्ल्यू को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा इस वर्ष आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच 15 मुठभेड़ें देखने को मिली जिसमें सुरक्षाबलों को 25 आतंकवादियों को मार गिराने में सफलता हाथ लगी। इनमें अधिकतर ऑपरेशन जम्मू कश्मीर पुलिस द्वारा पाए गए विशिष्ट इनपुट के आधार पर अंजाम दिए गए। अधिकारी ने बताया कि उन्हें उम्मीद है कि वर्ष 2026 भी काफी सफल रहेगा।