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Jammu: जम्मू-कश्मीर की 45% झीलें खत्म, 29% सिकुड़ीं, संरक्षण तंत्र की विफलता उजागर, सीएजी रिपोर्ट में खुलासा

Tue, 07 Apr 2026 07:00 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 07 Apr 2026 07:00 AM IST
सार

2017-18 से 2021-22 के बीच की गई इस ऑडिट में सामने आया है कि कुल 518 झीलों के क्षेत्रफल में 2,851.26 हेक्टेयर की भारी कमी दर्ज की गई, जो पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता और जल संसाधनों के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।

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45% of Jammu & Kashmir Lakes Vanished 29% Shrunk Failure of Conservation Mechanism Exposed in CAG Report in Ja
डल झील श्रीनगर, कश्मीर - फोटो : Adobe

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में झीलों के तेजी से खत्म होते अस्तित्व को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ऑडिट रिपोर्ट ने गंभीर तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक 1967 में मौजूद 697 झीलों में से 45% यानी 315 झीलें पूरी तरह गायब हो चुकी हैं, जबकि 29% यानी 203 झीलों का जल क्षेत्र सिकुड़ गया है। 

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2017-18 से 2021-22 के बीच की गई इस ऑडिट में सामने आया है कि कुल 518 झीलों के क्षेत्रफल में 2,851.26 हेक्टेयर की भारी कमी दर्ज की गई, जो पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता और जल संसाधनों के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।   1,537.07 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली 315 झीलें पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। इसके अलावा 203 झीलों के क्षेत्रफल में 1,314.19 हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। हालांकि 150 झीलों के क्षेत्रफल में 538.22 हेक्टेयर की वृद्धि और 29 झीलों में कोई बदलाव नहीं पाया गया, लेकिन झीलों के घटते दायरे ने पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। जिन 203 झीलों का जल क्षेत्र घटा है, उनमें से 63 झीलों का क्षेत्रफल 50 प्रतिशत या उससे अधिक कम हो चुका है, जिससे उनके पूरी तरह विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है। 
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केवल छह झीलों पर केंद्रित रहा संरक्षण
रिपोर्ट में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने केवल छह प्रमुख झीलों डल, वुलर, होकरसर, मानसबल, सुरिनसर और मानसर के लिए ही संरक्षण और प्रबंधन कार्यक्रम बनाए। शेष 691 झीलों के लिए न तो पात्रता निर्धारण किया गया और न ही पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) की योजनाओं के तहत सहायता लेने की कोई पहल की गई। 2017 से 2022 के दौरान कैपेक्स बजट का लगभग एक प्रतिशत, यानी 560.65 करोड़ रुपये, केवल इन छह झीलों पर खर्च किया गया।

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