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परमात्मा को मन में बसाने से मिलता है परम सुख : स्वामी जी
Mon, 30 Sep 2024 03:58 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, राजौरी
संवाद न्यूज एजेंसी, राजौरी
Updated Mon, 30 Sep 2024 03:58 AM IST
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कोटरंका में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में उमड़े श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
राजोरी। राजोरी के कोटरंका में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर दिवस पर रविवार को कथावाचक अटल पीठाधीश्वर राजगुरु आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती जी ने प्रवचनों से संगत को निहाल कर दिया। उन्होंने श्री कृष्ण जन्म लीला महोत्सव, राजा बलि का ताप, रामजी की लीलाएं, गृहस्थ आश्रम का धर्म, वामन अवतार, कश्यप अवतार, महाशय अवतार का वर्णन
किया। स्वामी जी ने कहा जिसने परमात्मा को मन में बसा लिया है, उसे परम सुख की प्राप्ति होती है। जिस व्यक्ति को तृप्ति नहीं है उसे संसार का सब कुछ प्रदान कर दो फिर भी वह संतुष्ट नहीं होगा। स्वामीजी ने वामन और राजा बलि के प्रसंग का वर्णन किया। इस संसार में कोई किसी का नहीं होता। परमात्मा से नाता जोड़कर ही इस भवसागर से पार पाया जा सकता है। हरि नाम का सुमिरन करने के लिए कल का इंतजार नहीं करना चाहिए। जीवन में सुख-दुख की लहर लिए बृजवासियों को गिरिराज की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए भगवान ने अपनी उंगली पर गिरिराज को धारण कर समस्त बृजवासियों को बचाया।
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किया। स्वामी जी ने कहा जिसने परमात्मा को मन में बसा लिया है, उसे परम सुख की प्राप्ति होती है। जिस व्यक्ति को तृप्ति नहीं है उसे संसार का सब कुछ प्रदान कर दो फिर भी वह संतुष्ट नहीं होगा। स्वामीजी ने वामन और राजा बलि के प्रसंग का वर्णन किया। इस संसार में कोई किसी का नहीं होता। परमात्मा से नाता जोड़कर ही इस भवसागर से पार पाया जा सकता है। हरि नाम का सुमिरन करने के लिए कल का इंतजार नहीं करना चाहिए। जीवन में सुख-दुख की लहर लिए बृजवासियों को गिरिराज की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए भगवान ने अपनी उंगली पर गिरिराज को धारण कर समस्त बृजवासियों को बचाया।
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