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गोली लगी तो जान बचाने नहीं आएगा डॉक्टर
ब्यूरो/रवि वर्मा/राजोरी
Updated Tue, 16 May 2017 01:19 AM IST
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Doctor shimla
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जिले के नौशेरा सेक्टर के नियंत्रण रेखा से सटे गांवों के लोगों को जहां एक तरफ पाक गोलाबारी की मार झेलनी पड़ती है, वहीं दूसरी तरफ सरकार की उपेक्षा के चलते लोगों की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। नौशेरा सेक्टर के नियंत्रण रेखा से सटे सात ऐसे स्वास्थ्य केंद्र हैं, जहां न तो एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध है और न ही इन केंद्रों में एमबीबीएस डॉक्टर नियुक्त किए गए हैं।
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जानकारी के अनुसार नियंत्रण रेखा से सटे सभी स्वास्थ्य केंद्रों में एमबीबीएस डॉक्टरों के पद रिक्त पड़े हैं। कुछ केंद्रों में आईएसएम और आयुर्वेदिक डॉक्टर नियुक्त किए गए हैं, जो कि किसी भी इमरजेंसी हालात से निपटने में पूरी तरह से सक्षम नहीं होते हैं। ऐसे में किसी भी इमरजेंसी के हालात में नियंत्रण के लोग राम भरोसे छोड़ दिए जाते हैं।
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इन केंद्रों में एंबुलेंस सुविधा नहीं है और न ही डॉक्टर हैं इस बात का खुलासा उस समय हुए जब पाक गोलाबारी में मौत के घाट उतारे गए लोगों के परिजनों व अपने घरों को छोड़ राहत शिविरों में रह रहे लोगों का हाल-चाल जानने डिप्टी सीएम व अन्य मंत्री वहां पहुंचे थे। इस दौरान लोगों ने एंबुलेंस प्रदान रकने के साथ ही पीएचसी में एमबीबीएस डॉक्टर नियुक्त करने की मांग की थी।
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डिप्टी सीएम के पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि एमबीबीएस डॉक्टरों के पद रिक्त पड़े हैं व एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हैं। मौके पर उपस्थित डिवकॉम ने डायरेक्टर को निर्देश देते हुए कहा कि वह सभी स्वास्थ्य केंद्रों में एमबीबीएस डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजें व सभी सात स्वास्थ्य केंद्रों में एंबुलेंस उपलब्ध करवाएं।
राहत शिविरों में रह रहे गुस्साए लोगों ने सरकार की ओर रोष प्रकट करते हुए कहा कि सरकार को उनकी याद केवल तब आती है जब एलओसी पर गोलाबारी शुरू होती है। गोलाबारी के समय सरकार उन्हें अपने घरों से खदेड़ कर शिविरों में भेज देती है, लेकिन स्थायी तौर पर हमारी समस्याओं का कोई समाधान नहीं होता।