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डीडीसी राजोरी ने बर्ड फ्लू रोकथाम उपायों को लेकर बैठक आयोजित की
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राजोरी। उपायुक्त राजेश के. शवन ने रविवार को जिले में बर्ड फ्लू की रोकथाम के उपायों की समीक्षा की। इस दौरान पशु, भेड़ और पोल्ट्री विभाग के अधिकारियों के साथ विचार विमर्श किया।
बैठक में बताया गया कि बर्ड फ़्लू का पहला संदिग्ध मामला इस साल सात जनवरी को पंजपीर इलाके में सामने आया। जहाँ दर्जनों कौवे मृत पाए गए। नमूनों को लिया गया और भविष्य की कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को भेज दिया गया। बैठक में बताया गया कि निगरानी और अवलोकन के साथ-साथ सरकार की तरफ से प्रचारित दिशा निर्देशों और एसओपी के कार्यान्वयन के लिए विशेष टीमों की प्रतिनियुक्ति की गई है।
डीडीसी ने संबंधित अधिकारियों को जिले में बीमारी का मुकाबला करने के लिए समन्वित प्रयास करने और इस संबंध में सभी संभव कदम उठाने को कहा। बैठक में निर्णय लिया गया कि पशु, भेड़ पालन, मुर्गी पालन विभाग, वन और पुलिस के साथ संयुक्त रूप से सुंदरबनी और भांबला सहित जिले के प्रवेश बिंदुओं पर चेक प्वाइंट स्थापित करेंगे।
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इसके अलावा विशेषज्ञ डॉक्टर पोल्ट्री पक्षियों की एक उचित जांच करेंगे। वे यह भी सुनिश्चित करेंगे कि संक्रमण में किसी भी जोखिम से बचने के लिए वाहन में पाए जाने वाले मृत पोल्ट्री पक्षियों को तुरंत दफनाया जाए। डीडीसी ने क्षेत्र के पदाधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया ताकि उन्हें इस बीमारी और उन तरीकों के बारे में जागरूक किया जा सके । उन्होंने संबंधित अधिकारियों से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से बीमारी के बारे में आम जनता में व्यापक जागरूकता उत्पन्न करने के लिए कहा।
बैठक में मुख्य पशुपालन अधिकारी डॉ. जोगिंदर गुप्ता, जिला भेड़पालन अधिकारी डॉ. सरफराज नसीम चौधरी और पोल्ट्री विकास अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने भाग लिया ।
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बैठक में बताया गया कि बर्ड फ़्लू का पहला संदिग्ध मामला इस साल सात जनवरी को पंजपीर इलाके में सामने आया। जहाँ दर्जनों कौवे मृत पाए गए। नमूनों को लिया गया और भविष्य की कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को भेज दिया गया। बैठक में बताया गया कि निगरानी और अवलोकन के साथ-साथ सरकार की तरफ से प्रचारित दिशा निर्देशों और एसओपी के कार्यान्वयन के लिए विशेष टीमों की प्रतिनियुक्ति की गई है।
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डीडीसी ने संबंधित अधिकारियों को जिले में बीमारी का मुकाबला करने के लिए समन्वित प्रयास करने और इस संबंध में सभी संभव कदम उठाने को कहा। बैठक में निर्णय लिया गया कि पशु, भेड़ पालन, मुर्गी पालन विभाग, वन और पुलिस के साथ संयुक्त रूप से सुंदरबनी और भांबला सहित जिले के प्रवेश बिंदुओं पर चेक प्वाइंट स्थापित करेंगे।
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इसके अलावा विशेषज्ञ डॉक्टर पोल्ट्री पक्षियों की एक उचित जांच करेंगे। वे यह भी सुनिश्चित करेंगे कि संक्रमण में किसी भी जोखिम से बचने के लिए वाहन में पाए जाने वाले मृत पोल्ट्री पक्षियों को तुरंत दफनाया जाए। डीडीसी ने क्षेत्र के पदाधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया ताकि उन्हें इस बीमारी और उन तरीकों के बारे में जागरूक किया जा सके । उन्होंने संबंधित अधिकारियों से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से बीमारी के बारे में आम जनता में व्यापक जागरूकता उत्पन्न करने के लिए कहा।
बैठक में मुख्य पशुपालन अधिकारी डॉ. जोगिंदर गुप्ता, जिला भेड़पालन अधिकारी डॉ. सरफराज नसीम चौधरी और पोल्ट्री विकास अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने भाग लिया ।