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श्रीराम को जाने बिना जीवन अधूरा : साध्वी गरिमा भारती
Thu, 13 Feb 2025 01:27 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, राजौरी
संवाद न्यूज एजेंसी, राजौरी
Updated Thu, 13 Feb 2025 01:27 AM IST
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कालाकोट में श्रीराम कथा सुनने उमड़े श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : rajauri
राजोरी में श्रीराम कथा का भव्य आयोजन, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
राजोरी/नाैशेरा। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से स्पोर्ट्स ग्राउंड कालाकोट में श्रीराम कथामृत का आयोजन किया गया। कथा में दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज की शिष्या मानस मर्मज्ञ साध्वी गरिमा भारती ने प्रभु श्रीराम की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया।
साध्वी गरिमा भारती जी ने कहा कि प्रभु श्रीराम की कथा एक दिव्य सरिता की तरह है, जिसमें डुबकी लगाने से व्यक्ति अपने कर्मों की कालिमा से मुक्त होकर पवित्र हो जाता है। उन्होंने कहा, गोस्वामी तुलसीदास ने भी कहा है कि संतों की संगति और प्रभु की कथा स्वयं तीर्थराज प्रयाग के समान है।
कथा के अंत में साध्वी सतिंदर भारती, ज्योति भारती, सुखदीप भारती, करालिका भारती, रजनी भारती, साध्वी भगवती भारती और महात्मा सुखविंदर ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी। कथा का समापन प्रभु की मंगल आरती के साथ हुआ, जिसमें श्रद्धालु ध्यान और भक्ति में लीन नजर आए। इस अवसर पर स्वामी सुचेतानंद, स्वामी महेश्वरानंद, स्वामी हरिदास आनंद, हरदेव कुमार वेद, ओम प्रकाश शर्मा (सेवानिवृत्त शिक्षक), बाबू राम खड़खला उपस्थित रहे। संवाद
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राजोरी/नाैशेरा। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से स्पोर्ट्स ग्राउंड कालाकोट में श्रीराम कथामृत का आयोजन किया गया। कथा में दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज की शिष्या मानस मर्मज्ञ साध्वी गरिमा भारती ने प्रभु श्रीराम की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया।
साध्वी गरिमा भारती जी ने कहा कि प्रभु श्रीराम की कथा एक दिव्य सरिता की तरह है, जिसमें डुबकी लगाने से व्यक्ति अपने कर्मों की कालिमा से मुक्त होकर पवित्र हो जाता है। उन्होंने कहा, गोस्वामी तुलसीदास ने भी कहा है कि संतों की संगति और प्रभु की कथा स्वयं तीर्थराज प्रयाग के समान है।
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कथा के अंत में साध्वी सतिंदर भारती, ज्योति भारती, सुखदीप भारती, करालिका भारती, रजनी भारती, साध्वी भगवती भारती और महात्मा सुखविंदर ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी। कथा का समापन प्रभु की मंगल आरती के साथ हुआ, जिसमें श्रद्धालु ध्यान और भक्ति में लीन नजर आए। इस अवसर पर स्वामी सुचेतानंद, स्वामी महेश्वरानंद, स्वामी हरिदास आनंद, हरदेव कुमार वेद, ओम प्रकाश शर्मा (सेवानिवृत्त शिक्षक), बाबू राम खड़खला उपस्थित रहे। संवाद
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