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मेहंदी रात का मातमी जुलूस निकला
ब्यूरो/अमर उजाला,राजोरी
Updated Sat, 01 Nov 2014 01:17 AM IST
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शुक्रवार को नगर में शिया समुदाय ने करबला के शहीदों की याद में मेहंदीरात का मातमी जुलूस निकाल कर इमाम हुसैन के नाती शहजादा कासिम और उसके बलिदान को याद करते हुए मातम मनाया। इस जुलूस में सैकड़ों की संख्या में समुदाय के लोगों ने
भाग लिया।
सातवें मोहरम को पुंछ के शिया समुदाय के सैकड़ों बुजुर्ग, युवा और बच्चे नगर के तकिया पहलवान शाह में एकत्र हुए, जहां से उन्होंने अपने धार्मिक संगठन अंजुमन ए जाफरिया के तत्वावधान में मेहंदीरात का जुलूस निकाला।
यह जूलूस नगर के विभिन्न बाजारों से होता हुआ देर रात नगर के वार्ड नंबर 4 मोहल्ला शिया स्थित इमामबारगाह में पहुंचा जहां पर रात को मजलिस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अंजुमन ए जाफरिया के प्रधान जक्की हैदर, किफायत हुसैन सोफी, शफीक हुसैन बाबा और अली मोहम्मद रज़ा ने बताया कि करबला के मैदान में इमाम हुसैन ने अपने जिन परिजनों और अनुयाइयों के साथ मानवता की रक्षा के लिए जो बलिदान दिया था उसमें उनका नाती शहजादा कासिम (13) भी था। आज की रात उसी की याद में मनाई जाती है, जिसे मेहंदीरात कहा जाता है।
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भाग लिया।
सातवें मोहरम को पुंछ के शिया समुदाय के सैकड़ों बुजुर्ग, युवा और बच्चे नगर के तकिया पहलवान शाह में एकत्र हुए, जहां से उन्होंने अपने धार्मिक संगठन अंजुमन ए जाफरिया के तत्वावधान में मेहंदीरात का जुलूस निकाला।
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यह जूलूस नगर के विभिन्न बाजारों से होता हुआ देर रात नगर के वार्ड नंबर 4 मोहल्ला शिया स्थित इमामबारगाह में पहुंचा जहां पर रात को मजलिस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अंजुमन ए जाफरिया के प्रधान जक्की हैदर, किफायत हुसैन सोफी, शफीक हुसैन बाबा और अली मोहम्मद रज़ा ने बताया कि करबला के मैदान में इमाम हुसैन ने अपने जिन परिजनों और अनुयाइयों के साथ मानवता की रक्षा के लिए जो बलिदान दिया था उसमें उनका नाती शहजादा कासिम (13) भी था। आज की रात उसी की याद में मनाई जाती है, जिसे मेहंदीरात कहा जाता है।
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