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पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश व आंधी से स्कूल भवन का छत उड़ा, दिवार ढेह गई
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पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश व आंधी से स्कूल भवन का छत उड़ा, दिवार ढेह गई
- फोटो : RAJOURI
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राजोरी। पिछले दिनों हुई मूसलाधार और तेज बारिश के साथ-साथ आंधी ने जो तबाही मचाई उसकी तस्वीरें अब सामने आने लगी हैं। जिले की कोटरंका तहसील के खवास शिक्षा जोन के तहत पढ़ने वाले सरकारी मिडिल स्कूल बेला की छत तेज हवा के चलते उड़ गई। मूसलाधार बारिश से स्कूल दीवार भी ढह गई है।
इसके चलते स्कूल में तालीम हासिल कर रहे 65 बच्चों को खुले आसमान के नीचे बैठ कर पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि उक्त स्कूल में पहले से ही दो कमरे थे, जिसमें से एक में कार्यालय था, दूसरे में बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जाता था। अब वह कमरे की छत उड़ने और दीवार ढहने से सारे बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं छत उड़ जाने से स्कूल का सारा रिकॉर्ड यहां वहां शिफ्ट करना पड़ा है। बच्चों के अभिभावकों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके बच्चे खुले आसमान के नीचे कैसे पढ़ाई कर सकते हैं। कभी तेज धूप और कभी बारिश से बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित होती है।
परेशान अभिभावकों ने डीसी और शिक्षा विभाग से गुहार लगाते हुए कहा कि वे जल्द से जल्द भवन की मरम्मत करने के लिए फंड जारी करें और जब तक भवन की मरम्मत होती तब तक आसपास किसी और जगह पर स्कूल को शिफ्ट किया जाए, ताकि बच्चों का भविष्य अंधकार में न धकेला जाए और पढ़ाई प्रभावित न हो।
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इसके चलते स्कूल में तालीम हासिल कर रहे 65 बच्चों को खुले आसमान के नीचे बैठ कर पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि उक्त स्कूल में पहले से ही दो कमरे थे, जिसमें से एक में कार्यालय था, दूसरे में बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जाता था। अब वह कमरे की छत उड़ने और दीवार ढहने से सारे बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं छत उड़ जाने से स्कूल का सारा रिकॉर्ड यहां वहां शिफ्ट करना पड़ा है। बच्चों के अभिभावकों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके बच्चे खुले आसमान के नीचे कैसे पढ़ाई कर सकते हैं। कभी तेज धूप और कभी बारिश से बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित होती है।
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परेशान अभिभावकों ने डीसी और शिक्षा विभाग से गुहार लगाते हुए कहा कि वे जल्द से जल्द भवन की मरम्मत करने के लिए फंड जारी करें और जब तक भवन की मरम्मत होती तब तक आसपास किसी और जगह पर स्कूल को शिफ्ट किया जाए, ताकि बच्चों का भविष्य अंधकार में न धकेला जाए और पढ़ाई प्रभावित न हो।
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