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2020 में इंचार्ज मास्टर द्वारा जारी एनओसी को सीईओ ने किया रद्द
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राजोरी। जिले में शिक्षा विभाग का एक विचित्र घटनाक्रम देखने में आया है। इसमें सुंदरबनी के अपर बरनारा गांव स्थित मिडिल स्कूल के इंचार्ज मास्टर द्वारा स्कूल के पास आटा चक्की स्थापित करने के लिए बिना उच्च अधिकारियों की अनुमति के जारी एनओसी को सीईओ ने रद्द कर इंचार्ज मास्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
जानकारी के अनुसार मिडिल स्कूल अपर बरनारा के इंचार्ज मास्टर ने वर्ष 2020 में स्कूल के पास ही एक आटा चक्की की स्थापना के लिए एक स्थानीय व्यक्ति के पक्ष में अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी किया। मामला मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) के संज्ञान में आया और एक जांच समिति का गठन किया गया। 15 मार्च को जेडईओ लोअर हथल ने अपने कार्यालय से सीईओ शैलेश कुमारी को रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार उक्त स्कूल के इंचार्ज मास्टर ने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों की जानकारी के बिना और अधिकारियों से पूर्व अनुमति के बिना ही एनओसी जारी कर दी थी। सीईओ के अनुसार नियम अनुसार एक मिडिल स्कूल के इंचार्ज मास्टर एनओसी जारी करने के लिए अधिकृत नहीं है। सीईओ ने जेडईओ की रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए इंचार्ज मास्टर द्वारा जारी एनओसी को रद्द कर दिया है। इसके अलावा जेडईओ लोअर हथल को इंचार्ज मास्टर से स्पष्टीकरण मांगने और मामले में आगे बढ़ने के लिए तीन दिन के भीतर कार्यालय में स्पष्टीकरण का उत्तर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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जानकारी के अनुसार मिडिल स्कूल अपर बरनारा के इंचार्ज मास्टर ने वर्ष 2020 में स्कूल के पास ही एक आटा चक्की की स्थापना के लिए एक स्थानीय व्यक्ति के पक्ष में अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी किया। मामला मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) के संज्ञान में आया और एक जांच समिति का गठन किया गया। 15 मार्च को जेडईओ लोअर हथल ने अपने कार्यालय से सीईओ शैलेश कुमारी को रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार उक्त स्कूल के इंचार्ज मास्टर ने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों की जानकारी के बिना और अधिकारियों से पूर्व अनुमति के बिना ही एनओसी जारी कर दी थी। सीईओ के अनुसार नियम अनुसार एक मिडिल स्कूल के इंचार्ज मास्टर एनओसी जारी करने के लिए अधिकृत नहीं है। सीईओ ने जेडईओ की रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए इंचार्ज मास्टर द्वारा जारी एनओसी को रद्द कर दिया है। इसके अलावा जेडईओ लोअर हथल को इंचार्ज मास्टर से स्पष्टीकरण मांगने और मामले में आगे बढ़ने के लिए तीन दिन के भीतर कार्यालय में स्पष्टीकरण का उत्तर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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