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तम्देंह पर जगह5जगह मीठे पानी की छव्बीलें लगाकर लोगों को पानी पिलाया गया

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सुंदरबनी। उपजिले में लोगों ने तमदेह के शुभ अवसर पर जगह-जगह मीठे पानी की छबीलें लगाकर पानी पिलाया और कई लोगों ने मंदिरों में जाकर दान पुण्य किया। तमदेह त्योहार पर लोग मीठे पानी की छबीलों और पूड़ी हलवे के स्टाल लगाकर प्रसाद करते हैं। हालांकि, इस बार कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के कारण जारी बंदिशों का पालन करते हुए लोगों ने जगह-जगह छोटी छबीलों का आयोजन कर राहगीरों की प्यास बुझाई। साथ ही, कुछ लोगों ने मंदिर जाकर बर्तन बांटे, तो कुछ ने अपने घरों में ही बर्तन दान करके तमदेह पर्व की वर्षों पुरानी परंपरा को निभाया। संवाद
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यात्री वाहनों के नहीं निकल रहे ईंधन तक के पैसे
चालकों ने काम बंद कर अपना वाहनो को किया घर पर खड़ा, यात्रियों को हो रही परेशानी
सुंदरबनी। विभिन्न सड़क मार्गों पर यात्री वाहनों की कमी के कारण लोगों को आवाजाही में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उपजिले में लोगों ने अपनी जरूरत के हिसाब से बाहर निकलकर अपने कार्यों को करना शुरू कर दिया है, लेकिन उनके सामने यातायात एक चुनौती है। सार्वजनिक सवारी वाहनों पर आश्रित रहने वाले ज्यादातर लोग अपने कामों के लिए दूर का सफर भी पैदल ही तय कर रहे हैं। इसका कारण है पर्याप्त मात्रा में सवारी वाहनों का सड़क पर न उतरना।
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काम करने की अनुमति मिल जाने के बावजूद ज्यादातर सवारी गाड़ियां बाहर ही नहीं निकाली गईं। इससे यात्रियों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। दरअसल, कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए यात्री वाहनों में 50 प्रतिशत सवारियों को बैठाकर चलाने के निर्देश हुए हैं। यह फैसला लोगों की भलाई के लिए जरूर लिया गया है, लेकिन इससे वाहन मालिक खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर वह अपने वाहन में 50 प्रतिशत लोगों को ही बैठाएंगे तो इससे उन्हें मुनाफा नहीं, बल्कि नुकसान होगा।
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इस संबंध में उपजिले के वाहन चालकों राकेश कुमार, यश पाल, रतन लाल, कुलदीप कुमार, दर्शन लाल, प्रवीण कुमार, आदि का कहना है सरकार की ओर से 50 प्रतिशत सवारियों को बैठाकर चलाने से उनके ईंधन के पैसे तक पूरे नहीं होंगे। इससे अच्छा तो वाहन चलाना ही बंद रखें। उन्होंने कहा कि जब तक पूरी सवारियों को बैठाकर वाहनों को चलाने की अनुमति नहीं मिलती, तब तक काम करना संभव नहीं है। इस संबंध में लोगों का कहना है कि यात्री वाहनों के नहीं चलने के कारण उन्हें कई किलोमीटर तक का सफर पैदल तय करके सुंदरबनी या अन्य स्थानों पर जाना पड़ रहा है।
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