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गुरु नानक देव जी के मार्ग पर चलने के लिए बच्चों को किया प्रेरित
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पुंछ के गुरूद्घारा मंहत साहब में महंत मंजीत सिंह से आर्शिवाद पाते संगत और कीर्तन करते रागी जत्था
- फोटो : POONCH
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राजोरी। सिखों के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव सिंह के बताए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करने के मकसद से भल्ली भवन स्थित सरकारी स्कूल में सोमवार को विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्कूल के हेडमास्टर अनिल शर्मा ने बच्चो को संबोधित करते हुए गुरु नानक देव की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 1499 ईस्वी में जब गुरु जी 30 साल के हो गए, तब उनमें अध्यात्म परिपक्व हो चुका था।
आज जिसे हम पवित्र गुरुग्रंथ साहिब के नाम से जानते हैं। उसके शुरुआती 940 दोहे इन्हीं की देन हैं। आदिग्रंथ की शुरुआत मूल मंत्र से होती है, जिसमें हमारा ‘एक ओंकार’ से साक्षात्कार होता है। मान्यता है कि गुरु जी अपने समय के सारे धर्मग्रंथों से भली-भांति परिचित थे। उनकी सबसे बड़ी सीख थी- हर व्यक्ति में, हर दिशा में, हर जगह ईश्वर मौजूद है। जीवन के प्रति उनके नजरिए और सीख इन चार किस्सों के माध्यम से आसानी से समझी जा सकती है।
गुरु नानक जी की तीन बड़ी शिक्षा खुशहाली से जीने का मंत्र देती हैं। ये शिक्षा है- नाम जपो, किरत करो और वंड छको। यह सीखें कर्म से जुड़ी हुई हैं। कर्म में श्रेष्ठता लाने की ओर ले जाती हैं। यानी मन को मजबूत, कर्म को ईमानदार और कर्मफल के सही इस्तेमाल की सीख देती हैं। ये एकाग्रता-परोपकार की ओर भी ले जाती हैं। वह इस अवसर पर स्कूली बच्चों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम पेश कर सबको मंत्रमुग्ध किया और वाद विवाद प्रतियोगिता में भी भाग लिया।
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आज जिसे हम पवित्र गुरुग्रंथ साहिब के नाम से जानते हैं। उसके शुरुआती 940 दोहे इन्हीं की देन हैं। आदिग्रंथ की शुरुआत मूल मंत्र से होती है, जिसमें हमारा ‘एक ओंकार’ से साक्षात्कार होता है। मान्यता है कि गुरु जी अपने समय के सारे धर्मग्रंथों से भली-भांति परिचित थे। उनकी सबसे बड़ी सीख थी- हर व्यक्ति में, हर दिशा में, हर जगह ईश्वर मौजूद है। जीवन के प्रति उनके नजरिए और सीख इन चार किस्सों के माध्यम से आसानी से समझी जा सकती है।
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गुरु नानक जी की तीन बड़ी शिक्षा खुशहाली से जीने का मंत्र देती हैं। ये शिक्षा है- नाम जपो, किरत करो और वंड छको। यह सीखें कर्म से जुड़ी हुई हैं। कर्म में श्रेष्ठता लाने की ओर ले जाती हैं। यानी मन को मजबूत, कर्म को ईमानदार और कर्मफल के सही इस्तेमाल की सीख देती हैं। ये एकाग्रता-परोपकार की ओर भी ले जाती हैं। वह इस अवसर पर स्कूली बच्चों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम पेश कर सबको मंत्रमुग्ध किया और वाद विवाद प्रतियोगिता में भी भाग लिया।
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