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जीडीसी डूंगी का नाम बदलकर डीएसपी घनी श्याम खजूरिया के नाम पर रखा गया है
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कार्यक्रम को संबोधित करते उपायुक्त राजेश शवन।
- फोटो : RAJOURI
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राजोेरी। देश की सुरक्षा के लिए शहीदों के योगदान कोे सम्मान देते हुए जिला प्रशासन ने आजादी का अमृत महोत्सव के तत्वावधान में मंगलवार को डिग्री कॉलेज डूंगी का नाम शहीद डीएसपी घनी श्याम खजूरिया के नाम पर रखा है।
उपायुक्त ने कहा कि शहीदों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों के नाम पर उनके सम्मान के रूप में सरकारी संस्थानों के नाम रखने के लिए यूटी सरकार द्वारा यह उत्साहजनक पहल है। देश हमेशा राष्ट्र के इन वास्तविक नायकों का ऋणी रहेगा जिन्होंने अपने जीवन की परवाह नहीं की और मानव जाति के कल्याण के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर दिया। बहादुर दिलों के योगदान और बलिदान के कारण ही हम समाज में सुरक्षित महसूस करते हैं। इस कदम से नागरिकों में राष्ट्रवाद की भावना पैदा होगी, और छात्र शहीदों के सर्वोच्च बलिदान और प्रतिष्ठित व्यक्तियों के कार्यों और जीवन के बारे में जानेंगे। डीसी ने बताया कि संबंधित अधिकारियों से प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद जीडीसी भवन का काम जल्द ही शुरू हो जाएगा।
उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने देश के लिए शहीद हुए सेना, सीआरपीएफ और पुलिस जवानों के नाम पर चिह्नित सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, सड़कों और इमारतों सहित सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का नाम बदलने का फैसला किया है। शहीद डीएसपी घनी श्याम खजूरिया जिन्होंने कश्मीर में उग्रवाद से लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। घनी श्याम खजूरिया का जन्म 26 नवंबर 1960 को डूंगी के गांव सवानी में हुआ। वह 1990 में पुलिस में सब-इंस्पेक्टर नियुक्त हुए। 1996 में इंस्पेक्टर और वर्ष 1997 में डीएसपी के रूप में पदोन्नत हुए। 27 दिसंबर 1999 को आतंकवादियों से लड़ाई के दौरान श्रीनगर के कारगोे परिसर में वो वीरगति को प्राप्त हुए। उन्हें उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए दो पुरस्कार मिले, जिनमें वीरता के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक और महानिदेशक प्रशस्ति पदक शामिल हैं।
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नामकरण समारोह जीडीसी डूंगी में हुआ, जहां उपायुक्त राजेश के. शवन मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने देश की रक्षा के लिए शहीद को पुष्पांजलि भी अर्पित की। नामकरण समारोह के दौरान घनी श्याम खजूरिया के परिवार के सदस्य भी मौजूद थे। समारोह में हर क्षेत्र के बड़े लोग शामिल हुए। पत्नी, पुत्र और भाई सहित शहीद के परिवार ने भी भाग लिया और उन्हें सम्मान के प्रतीक के रूप में फूल, शॉल भेंट की गई।
कॉलेज की छात्राओं ने राष्ट्रगान और सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।
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उपायुक्त ने कहा कि शहीदों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों के नाम पर उनके सम्मान के रूप में सरकारी संस्थानों के नाम रखने के लिए यूटी सरकार द्वारा यह उत्साहजनक पहल है। देश हमेशा राष्ट्र के इन वास्तविक नायकों का ऋणी रहेगा जिन्होंने अपने जीवन की परवाह नहीं की और मानव जाति के कल्याण के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर दिया। बहादुर दिलों के योगदान और बलिदान के कारण ही हम समाज में सुरक्षित महसूस करते हैं। इस कदम से नागरिकों में राष्ट्रवाद की भावना पैदा होगी, और छात्र शहीदों के सर्वोच्च बलिदान और प्रतिष्ठित व्यक्तियों के कार्यों और जीवन के बारे में जानेंगे। डीसी ने बताया कि संबंधित अधिकारियों से प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद जीडीसी भवन का काम जल्द ही शुरू हो जाएगा।
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उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने देश के लिए शहीद हुए सेना, सीआरपीएफ और पुलिस जवानों के नाम पर चिह्नित सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, सड़कों और इमारतों सहित सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का नाम बदलने का फैसला किया है। शहीद डीएसपी घनी श्याम खजूरिया जिन्होंने कश्मीर में उग्रवाद से लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। घनी श्याम खजूरिया का जन्म 26 नवंबर 1960 को डूंगी के गांव सवानी में हुआ। वह 1990 में पुलिस में सब-इंस्पेक्टर नियुक्त हुए। 1996 में इंस्पेक्टर और वर्ष 1997 में डीएसपी के रूप में पदोन्नत हुए। 27 दिसंबर 1999 को आतंकवादियों से लड़ाई के दौरान श्रीनगर के कारगोे परिसर में वो वीरगति को प्राप्त हुए। उन्हें उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए दो पुरस्कार मिले, जिनमें वीरता के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक और महानिदेशक प्रशस्ति पदक शामिल हैं।
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नामकरण समारोह जीडीसी डूंगी में हुआ, जहां उपायुक्त राजेश के. शवन मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने देश की रक्षा के लिए शहीद को पुष्पांजलि भी अर्पित की। नामकरण समारोह के दौरान घनी श्याम खजूरिया के परिवार के सदस्य भी मौजूद थे। समारोह में हर क्षेत्र के बड़े लोग शामिल हुए। पत्नी, पुत्र और भाई सहित शहीद के परिवार ने भी भाग लिया और उन्हें सम्मान के प्रतीक के रूप में फूल, शॉल भेंट की गई।
कॉलेज की छात्राओं ने राष्ट्रगान और सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।