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J&K: पाक की गोलाबारी के कारण घंटों फंसी रही दुल्हन, जानें क्या है पूरा मामला
Updated Mon, 19 Feb 2018 08:05 PM IST
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पुंछ। रविवार की पाकिस्तान की फ्रंटियर फोर्स की तरफ से खड़ी करमाड़ा सेक्टर में शाम को 5.20 बजे से करीब एक घंटे तक की गई गोलाबारी के बीच एक बारात फंस गई। खतरे को देखते हुए बारात में शामिल वाहनों को पुलिस ने गोलाबारी रुकने के बाद ही आगे जाने दिया।
रविवार को गांव करमाड़ा के मोहम्मद बशीर के बेटे की शादी थी। सुबह करमाड़ा से पड़ोस के गांव गुलपुर के लिए बड़े धूमधाम से बारात निकाली गई थी। इसमें करीब 200 लोग शामिल हुए थे। देर शाम करीब साढ़े पांच बजे जैसे ही बारात गांव गुलपुर से दुल्हन को लेकर करमाड़ा के सरकारी हाई स्कूल के पास पहुंची, तो आगे गांव में पाकिस्तानी सेना की भारी गोलाबारी जारी थी।
इसके चलते बारात के सभी वाहनों को वहां तैनात पुलिस ने स्कूल के पास ही रोक दिया। एक घंटे बाद गोलाबारी बंद हो गई, लेकिन बारात में शामिल लोग अपने वाहनों को अंधेरा होने तक वहीं रोके रहे कि कहीं वह बारात के साथ गांव की तरफ बढ़ें और उस पार से फिर गोलाबारी शुरू न शुरू हो जाए।
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जैसे ही अंधेरा हुआ, बारात के वाहन गांव की तरफ बढ़े, लेकिन उस वक्त न तो बारात में बाजे बजाए गए और न किसी प्रकार की कोई खुशी नजर का आ रही थी। बारात में शामिल हर किसी को इस बात का डर सता रहा था कि कहीं गोलाबारी में उनके घर में किसी को कोई नुकसान न पहुंचा हो।
बारात के साथ लौट रहे मोहम्मद गुलजार का कहना था कि जब भी हम गांव से कहीं बाहर जाते हैं तो घर लौटते समय हम लोगों को हमेशा इस बात का डर सताता रहता है कि कहीं पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी में हमारा कोई अपना हमसे सदा के लिए बिछुड़ न गया हो।
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रविवार को गांव करमाड़ा के मोहम्मद बशीर के बेटे की शादी थी। सुबह करमाड़ा से पड़ोस के गांव गुलपुर के लिए बड़े धूमधाम से बारात निकाली गई थी। इसमें करीब 200 लोग शामिल हुए थे। देर शाम करीब साढ़े पांच बजे जैसे ही बारात गांव गुलपुर से दुल्हन को लेकर करमाड़ा के सरकारी हाई स्कूल के पास पहुंची, तो आगे गांव में पाकिस्तानी सेना की भारी गोलाबारी जारी थी।
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इसके चलते बारात के सभी वाहनों को वहां तैनात पुलिस ने स्कूल के पास ही रोक दिया। एक घंटे बाद गोलाबारी बंद हो गई, लेकिन बारात में शामिल लोग अपने वाहनों को अंधेरा होने तक वहीं रोके रहे कि कहीं वह बारात के साथ गांव की तरफ बढ़ें और उस पार से फिर गोलाबारी शुरू न शुरू हो जाए।
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जैसे ही अंधेरा हुआ, बारात के वाहन गांव की तरफ बढ़े, लेकिन उस वक्त न तो बारात में बाजे बजाए गए और न किसी प्रकार की कोई खुशी नजर का आ रही थी। बारात में शामिल हर किसी को इस बात का डर सता रहा था कि कहीं गोलाबारी में उनके घर में किसी को कोई नुकसान न पहुंचा हो।
बारात के साथ लौट रहे मोहम्मद गुलजार का कहना था कि जब भी हम गांव से कहीं बाहर जाते हैं तो घर लौटते समय हम लोगों को हमेशा इस बात का डर सताता रहता है कि कहीं पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी में हमारा कोई अपना हमसे सदा के लिए बिछुड़ न गया हो।