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1700 शिक्षकों के पद रिक्त
राजोरी/अमर उजाला, ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jun 2015 01:30 AM IST
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जिले के सरकारी स्कूलों के दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा के नतीजे संतोषजनक नहीं रहे। इससे अभिभावक चिंतित हैं।
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इसके पीछे के कारणों का पता लगा तो चौकानेवाले तथ्य सामने आए। जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के करीब 50 फीसदी पद रिक्त पड़े हैं।
पिछले करीब सात वर्षों में जिले में एक भी जनरल लाइन टीचर की नियुक्ति नहीं की गई। यही कारण है कि स्कूलों में पद रिक्त पड़े हैं और बच्चों का भविष्य राम भरोसे है।
जानकारी के मुताबिक जिले में 15 शिक्षा जोन हैं, जिनमें करीब 1724 सरकारी स्कूल काम कर रहे हैं। इनमें से 41 हायर सेकेंडरी स्कूल हैं, 114 हाईस्कूल, 550 मिडिल स्कूल और करीब 1011 प्राइमरी स्कूल हैं।
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सभी सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर विद्यार्थियों की संख्या करीब 103722 है। राजोरी शहर व आस पास के कुछ क्षेत्रों के अलावा दूरदराज के अन्य सभी सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की बहुत कमी है।
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कई सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां एक ही शिक्षक तैनात है और कई हाईस्कूल ऐसे हैं जहां छह से भी कम शिक्षक काम चला रहे हैं। जिले में शिक्षकों के करीब 3398 पद हैं, जिनमें से करीब 1700 पद रिक्त पड़े हैं।
इन रिक्त पदों को भरने के लिए पिछले कई वर्षों से कोई कदम नहीं उठाया गया है। इतना ही नहीं, जिले मे लेक्चररों के 521 पदों में से 167 पद रिक्त हैं।
जिले के सरकारी स्कूलों में मास्टरों के 1380 पदों में से करीब 230 पद रिक्त पड़े हैं। हेडमास्टरों की 112 पोस्ट में से करीब 12 पोस्ट खाली हैं।
गौरतलब है कि जिले के सरकारी स्कूलों में पिछले करीब सात वर्ष में एक भी जनरल लाइन शिक्षक की नियुक्ति हुई। कुछ वर्ष पहले शिक्षकों की एक लिस्ट तो निकाली गई थी, लेकिन उसमें बड़े पैमाने पर धांधली के चलते हाईकोर्ट ने उस सूची को रद कर दिया था।
उसके बाद उस सूची में नियुक्त हुए उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट में केस दर्ज किया था, जो अभी तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित पड़ा है।