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ढाबों पर वसूले जा रहे मनमाने दाम
Rajouri
Updated Tue, 01 Jul 2014 05:32 AM IST
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राजोरी। पीक सीजन के शुरू होते ही राजोरी- पुंछ जिलों के धार्मिक और अन्य पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटकों की तादाद बढ़ गई है। इसके साथ ही इन पर्यटकों के साथ लूट -खसूट भी बढ़ गई है। आलम यह है कि हाईवे पर स्थित ढाबों पर यात्रियों से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। वहीं, इसकी तरफ प्रशासन की कोई नजर नहीं जा रही।
जम्मू से लेकर पुंछ तक हाईवे पर अखनूर, वामला, सुंदरबनी, लंबेड़ी, सयोट, नारियां, चिंगस, राजोरी, मांजाकोट, बिंबर गली, सुरनकोट आदि जगहों पर यात्री मुख्य रूप से ठहरते हैं। जबकि इस 250 किलोमीटर लंबे रूट पर करीब 300 ढाबें हैं। थोड़ी -थोड़ी दूरी पर ढाबे बने हुए हैं। लेकिन मुख्य रूप से यात्री उक्त स्थानों पर बने ढाबों पर ही रुकते हैं। बस, टैंपों और सूमो चालक इन्हीं ढाबों पर वाहनों को रोकते हैं। यहां पर यात्री खाना खाने के लिए रुकते हैं। सबसे अधिक लूट खसूट वामला में है। यहां पर निर्धारित दामों से 30 फीसदी अधिक वसूली होती है। जम्मू से राजोरी आ रहे अरुण संग्राल ने बताया कि वह वामला में खाना खाने के लिए ठहरे। यहां पर आधी प्लेट राजमा चावल के लिए 50 रुपये वसूले गए। वहीं, अमन शर्मा ने बताया कि दो रोटियां और दाल खानें पर उससे 60 रुपये की वसूली की गई। दोनों ने कहा कि जब रेट को लेकर ढाबा मालिकों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इतना ही रेट है। यही नहीं, जब इतने दाम नहीं दिए गए तो वह बदतमीजी करने लगे। दोनों ने इसकी शिकायत राजोरी के एडीसी से कर दी है।
टैंपों ट्रेवल और ढाबा मालिकों की मिलीभगत की शिकायत
जानकारी के अनुसार टैंपो ट्रेवल और ढाबा मालिकों की मिलीभगत से यात्रियों को लूटा जा रहा है। हर एक चालक को ढाबे के आगे वाहन खड़ा करने पर कमीशन मिलता है और निशुल्क खाना मिलता है। इसलिए वह वाहनों को यहां खड़े करते हैं। यात्रियों के लिए और खाना खाने का विकल्प नहीं बचता।
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परोसा जा रहा है बासी खाना
ढाबों पर अधिक वसूली के साथ बासी खाना भी परोसा जा रहा है। मुगल रोड के शुरू होने और गर्मी की छुटिट्यां होने से इस रोड पर आने जाने वालों की संख्या में दोगुना इजाफा हुआ है। इसलिए ढाबा मालिकों ने भी बासी खाना परोसना शुरू कर दिया है। कई जगहों से इस तरह की शिकायतें आ रही हैं।
इसकी शिकायतें काफी पहुंच रही हैं, इसलिए एक कमेटी का गठन किया गया है। इसमें पर्यटन विकास प्राधिकरण राजोरी के सीईओ, एडी पर्यटन विभाग, संबंधित तहसीलदार, डीएसपी, म्यूनिसिपल कमेटी, मापतौल विभाग के अधिकारी शामिल किए गए हैं। जल्द ही इस कमेटी के लोग ढाबा मालिकों से बात करेंगे और रेट निर्धारित करेंगे। यहां तक कि ए बी सी श्रेणी के ढाबे होंगे। ऐसा नहीं होगा कि किसी ढाबा वाले के पास सुविधा नहीं और वह वसूली अधिक करे।
- एडीसी, राजोरी, सलीम मलिक
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जम्मू से लेकर पुंछ तक हाईवे पर अखनूर, वामला, सुंदरबनी, लंबेड़ी, सयोट, नारियां, चिंगस, राजोरी, मांजाकोट, बिंबर गली, सुरनकोट आदि जगहों पर यात्री मुख्य रूप से ठहरते हैं। जबकि इस 250 किलोमीटर लंबे रूट पर करीब 300 ढाबें हैं। थोड़ी -थोड़ी दूरी पर ढाबे बने हुए हैं। लेकिन मुख्य रूप से यात्री उक्त स्थानों पर बने ढाबों पर ही रुकते हैं। बस, टैंपों और सूमो चालक इन्हीं ढाबों पर वाहनों को रोकते हैं। यहां पर यात्री खाना खाने के लिए रुकते हैं। सबसे अधिक लूट खसूट वामला में है। यहां पर निर्धारित दामों से 30 फीसदी अधिक वसूली होती है। जम्मू से राजोरी आ रहे अरुण संग्राल ने बताया कि वह वामला में खाना खाने के लिए ठहरे। यहां पर आधी प्लेट राजमा चावल के लिए 50 रुपये वसूले गए। वहीं, अमन शर्मा ने बताया कि दो रोटियां और दाल खानें पर उससे 60 रुपये की वसूली की गई। दोनों ने कहा कि जब रेट को लेकर ढाबा मालिकों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इतना ही रेट है। यही नहीं, जब इतने दाम नहीं दिए गए तो वह बदतमीजी करने लगे। दोनों ने इसकी शिकायत राजोरी के एडीसी से कर दी है।
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टैंपों ट्रेवल और ढाबा मालिकों की मिलीभगत की शिकायत
जानकारी के अनुसार टैंपो ट्रेवल और ढाबा मालिकों की मिलीभगत से यात्रियों को लूटा जा रहा है। हर एक चालक को ढाबे के आगे वाहन खड़ा करने पर कमीशन मिलता है और निशुल्क खाना मिलता है। इसलिए वह वाहनों को यहां खड़े करते हैं। यात्रियों के लिए और खाना खाने का विकल्प नहीं बचता।
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परोसा जा रहा है बासी खाना
ढाबों पर अधिक वसूली के साथ बासी खाना भी परोसा जा रहा है। मुगल रोड के शुरू होने और गर्मी की छुटिट्यां होने से इस रोड पर आने जाने वालों की संख्या में दोगुना इजाफा हुआ है। इसलिए ढाबा मालिकों ने भी बासी खाना परोसना शुरू कर दिया है। कई जगहों से इस तरह की शिकायतें आ रही हैं।
इसकी शिकायतें काफी पहुंच रही हैं, इसलिए एक कमेटी का गठन किया गया है। इसमें पर्यटन विकास प्राधिकरण राजोरी के सीईओ, एडी पर्यटन विभाग, संबंधित तहसीलदार, डीएसपी, म्यूनिसिपल कमेटी, मापतौल विभाग के अधिकारी शामिल किए गए हैं। जल्द ही इस कमेटी के लोग ढाबा मालिकों से बात करेंगे और रेट निर्धारित करेंगे। यहां तक कि ए बी सी श्रेणी के ढाबे होंगे। ऐसा नहीं होगा कि किसी ढाबा वाले के पास सुविधा नहीं और वह वसूली अधिक करे।
- एडीसी, राजोरी, सलीम मलिक