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पीडब्ल्यूडी के नीड बेस कर्मचारी हड़ताल पर
Updated Thu, 20 Sep 2018 01:08 AM IST
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राजोरी। अपनी लंबित मांगों के समर्थन में पीडब्ल्यूडी के नीड बेस कर्मचारी बुधवार को एक बार फिर से हड़ताल पर चले गए। पीडब्ल्यूडी नीड बेस, कैजुअल वर्कर्स के बैनर तले बड़ी संख्या में कर्मियों ने काम काज छोड़ सरकार व विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
विभाग के एक्सईएन कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे कर्मियों ने नारेबाजी की व उनके साथ भेदभाव खतम कर उनके साथ न्याय करने की गुहार लगाई। उन्होंने अपनी लंबित मांगों को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि लंबे समय का बकाया वेतन जारी करना, वर्ष 2017 के एसआरओ नं. 520 को फास्ट ट्रैक आधार पर नियमित करना और वेजेज हेड के कार्यान्वयन करना उनकी मुख्य मांगे हैं। यूनियन के जिला प्रधान मोहम्मद रियाज मुगल ने बताया कि हड़ताल पर बैठे कर्मचारी जम्मू-कश्मीर सरकार का ध्यान गरीब आकस्मिक मजदूरों, जरूरतमंद श्रमिकों, पीडब्ल्यूडी आईटीआई प्रशिक्षित श्रमिकों की जायज व लंबित मांगों की ओर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, जो कि वर्ष 1994 से काम कर रहे हैं। वे नियमितीकरण नीति के कार्यान्वयन में देरी के कारण बुरी तरह पीड़ित हैं। उन्होंने पीडब्ल्यूडी में काम कर नीड बेस कर्मियों के वास्तविक मुद्दों के बारे में जम्मू-कश्मीर सरकार की देरी वाली व सुस्त नीति की निंदा की। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही सरकार ने उनकी सुध नहीं ली तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
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विभाग के एक्सईएन कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे कर्मियों ने नारेबाजी की व उनके साथ भेदभाव खतम कर उनके साथ न्याय करने की गुहार लगाई। उन्होंने अपनी लंबित मांगों को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि लंबे समय का बकाया वेतन जारी करना, वर्ष 2017 के एसआरओ नं. 520 को फास्ट ट्रैक आधार पर नियमित करना और वेजेज हेड के कार्यान्वयन करना उनकी मुख्य मांगे हैं। यूनियन के जिला प्रधान मोहम्मद रियाज मुगल ने बताया कि हड़ताल पर बैठे कर्मचारी जम्मू-कश्मीर सरकार का ध्यान गरीब आकस्मिक मजदूरों, जरूरतमंद श्रमिकों, पीडब्ल्यूडी आईटीआई प्रशिक्षित श्रमिकों की जायज व लंबित मांगों की ओर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, जो कि वर्ष 1994 से काम कर रहे हैं। वे नियमितीकरण नीति के कार्यान्वयन में देरी के कारण बुरी तरह पीड़ित हैं। उन्होंने पीडब्ल्यूडी में काम कर नीड बेस कर्मियों के वास्तविक मुद्दों के बारे में जम्मू-कश्मीर सरकार की देरी वाली व सुस्त नीति की निंदा की। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही सरकार ने उनकी सुध नहीं ली तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
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