{"_id":"5d5da4318ebc3e6c9e07669a","slug":"poonch-in-jammu-kashmir-poonch-news-jmu191717337","type":"story","status":"publish","title_hn":"छोटे भाई को खाना भी न हो सका नसीब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छोटे भाई को खाना भी न हो सका नसीब
विज्ञापन
पुंछ जिले के गांव दबराज में गमगीन करीम के परजन।
- फोटो : POONCH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुंछ। पाकिस्तान ने मेरा सब कुछ छीन लिया है। मेरे छोटे भाई को अंतिम समय में खाना भी नसीब हो सका। यह कहना है मंगलवार को जिले के नियंत्रण रेखा पर स्थित आखिरी गांव दबराज में पाकिस्तानी गोलाबारी में मारे गए युवक मोहम्मद करीम के बड़े भाई मोहम्मद नईम का। भाई को याद कर उनकी आंख भर आई। आंसुओं को साफ करते हुए नईम बताते है कि मंगलवार सुबह 11बजे से पाकिस्तान की तरफ से हमारे गांव में भारी गोलाबारी की जा रही थी। हम दोनों भाई घर के नीचे पशुशाला में छिपे हुए थे। मां और दो बहनें ऊपर वाले मकान में छिपी हुई थी। सभी भूखे प्यासे थे। इस दौरान करीब साढे़ तीन बजे कुछ समय के लिए गोलाबारी थमी तो करीम कहने लगा कि चलो ऊपर चल कर मां और बहनों के साथ हम खाना खाते हैं। पहले मैने मना कर दिया फिर सोचा इसको भूख लगी होगी तो मैने कहा चलो तो वो एक दम मुझ से आगे बाहर निकला। जैसे ही वह बाहर निकला तो एक गोला कुछ दूरी पर आ कर फटा जिसमें वह बुरी तरह जख्मी हो गया। जैसे ही मैने खींच कर उसे अंदर पहुंचाया तो उसके पेट और टांग से खून निकल रहा था। वो मुझे कहने लगा मेरा खून बंद करो मुझे बचा लो। इससे पहले हम उसे कहीं ले जाते फिर गोलाबारी शुरू हो गई। मेरे भाई को खाना भी नसीब न हुआ और उसके प्राण पखेरू उड़ गए। इतना कहते हुए नईम फिर रोने लगता है। कहते है कि काश गांव में सड़क बनी होती तो शायद मेरा भाई बच जाता। हम समय पर गाड़ी में डाल कर अस्पताल पहुंचा देते उसका इलाज हो जाता। कलेजे के टुकड़े को पाकिस्तानी गोलाबारी में खोने से पूरी तरह टूट चुकी करीम की मां जमीला बी रोते हुए कहने लगती है हमारे लिए तो यहां बार्डर पर हर दिन जंग हो रही ह। ै इमरान खान और मोदी एक दूसरे को जंग की धमकी देते हैं और हम हर दिन जंग का सामना करते हैं। आठ साल पहले मेरे पति की मौत होने के बाद यह दो बेटे मेरा सहारा थे। हालांकि दोनो बेरोजगार थे पर मेहनत मजदूरी कर परिवार चला रहे थे। अब मेरा और मेरी बेटियों का क्या होगा।
युवक की मौत के बाद दबराज में छाया मातम
पुंछ। जिले के मेंढर सब डिवीजन की मनकोट तहसील में भारत पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित आखरी गांव दबराज में मंगलवार देर शाम को पाकिस्तानी गोलाबारी में मोहम्मद करीम (22) पुत्र फक्कर दीन की मौत हो गई। इसके बाद पूरे गांव में मातम छाया हुआ है। गांव के अधिकतर घरों में आज चूल्हा तक नहीं जला।
पाकिस्तानी सेना के दोबारा गोलाबारी किए जाने के डर से गांव के बहुत कम लोग पीड़ित परिवार के पास उनके गम में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं। अधिकतर लोग अपने घरों के अंदर सुरक्षित स्थानों पर छुपे हुुए हैं। करीम के घर में जमा ग्रामीणों का आरोप कि पाकिस्तानी सेना की तरफ से कई दिनों से लगातार गांव को निशाना बनाकर भारी गोलाबारी की जा रही है। इससे सभी गांव वालों का जीना दूभर हो गया है। गांव निवासी मोहम्मद फरीद, एजीज अहमद, नजाकत हुसैन आदि कहना है कि हमारे गांव के लिए आज तक किसी प्रकार की कोई सुविधा तक नहीं है। अगर गांव में मूलभूत सुविधाएं सड़क, बिजली, पानी तक की कोई सुविधा नहीं है। सरकारी घोषणाओं के बाद भी गांव में बंकर तक नहीं बनाए गए हैं। जहां वह अपनी और बच्चों की जान बचा सकें। ऐसे में वह बड़े मजबूर और परेशान हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
युवक की मौत के बाद दबराज में छाया मातम
पुंछ। जिले के मेंढर सब डिवीजन की मनकोट तहसील में भारत पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित आखरी गांव दबराज में मंगलवार देर शाम को पाकिस्तानी गोलाबारी में मोहम्मद करीम (22) पुत्र फक्कर दीन की मौत हो गई। इसके बाद पूरे गांव में मातम छाया हुआ है। गांव के अधिकतर घरों में आज चूल्हा तक नहीं जला।
विज्ञापन
पाकिस्तानी सेना के दोबारा गोलाबारी किए जाने के डर से गांव के बहुत कम लोग पीड़ित परिवार के पास उनके गम में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं। अधिकतर लोग अपने घरों के अंदर सुरक्षित स्थानों पर छुपे हुुए हैं। करीम के घर में जमा ग्रामीणों का आरोप कि पाकिस्तानी सेना की तरफ से कई दिनों से लगातार गांव को निशाना बनाकर भारी गोलाबारी की जा रही है। इससे सभी गांव वालों का जीना दूभर हो गया है। गांव निवासी मोहम्मद फरीद, एजीज अहमद, नजाकत हुसैन आदि कहना है कि हमारे गांव के लिए आज तक किसी प्रकार की कोई सुविधा तक नहीं है। अगर गांव में मूलभूत सुविधाएं सड़क, बिजली, पानी तक की कोई सुविधा नहीं है। सरकारी घोषणाओं के बाद भी गांव में बंकर तक नहीं बनाए गए हैं। जहां वह अपनी और बच्चों की जान बचा सकें। ऐसे में वह बड़े मजबूर और परेशान हैं।
विज्ञापन