पाकिस्तान की नई साजिश: LoC पर धड़ल्ले से खड़े कर रहा मोबाइल टावर, खुफिया एजेंसियों के लिए ऐसे बनेगा चुनौती
पाकिस्तान संघर्ष विराम की आड़ में एलओसी के पास मोबाइल टावर लगा रहा है। इससे पूर्व आतंकियों की ओर से इक्का-दुक्का सेटेलाइट फोन का प्रयोग किया जाता रहा है, लेकिन सेटेलाइट फोन काफी महंगे होने के कारण वे इसका अधिक प्रयोग नहीं कर पाते।
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जम्मू-कश्मीर में तीन दशक से अधिक समय से जारी पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद जहां अब दम तोड़ने लगा था। वहीं, इसे जिंदा और पोषित करने के लिए अब पाकिस्तान नई साजिश रच रहा है। आतंकियों की घुसपैठ कराने और ड्रोन से हथियार, ड्रग्स व पैसा भेजने के साथ अब पाकिस्तान अपने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में एलओसी के पास धड़ल्ले से मोबाइल टावर लगा रहा है। इसका प्रमाण पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर स्थित किसी भी ग्रामीण क्षेत्र में देखने को मिल जाएगा। जहां पर पिछले कुछ महीने में पाकिस्तान ने बड़े-बड़े और उच्च क्षमता के मोबाइल टावर लगाए हैं।
भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित गांव दिगवार के सरपंच परविंदर सिंह का कहना है कि हमारे गांव से पाकिस्तान की ओर से हाल ही में नियंत्रण रेखा के पास लगाए गए दो मोबाइल टावर दिखते हैं। जबकि खड़ी करमाड़ा, सलोत्री से लेकर बालाकोट और साब्जियां में भी पाकिस्तानी टावर दिख रहे हैं, जो आतंकवाद को बढ़ावा देने का काम करेंगे, क्योंकि इन टावरों से पुंछ जिले के हर क्षेत्र में पाकिस्तानी नेटवर्क उपलब्ध हो जाएगा। इसका प्रयोग यहां मौजूद आतंकी और उनके मददगार आपस में संपर्क साधने के साथ ही उस पार बैठे आकाओं से भी आसानी से बात कर सकेंगे।
पाकिस्तानी नेटवर्क को तोड़ना बड़ी चुनौती
दिगवार से पूर्व सैन्य अधिकारी कैप्टन नजीर हुसैन का कहना है कि आज तकनीकी दौर है। ऐसे में पाकिस्तानी मोबाइल नेटवर्क हमारे जिले में उपलब्ध होना आतंकियों की गतिविधियों को बढ़ाने में सहयोग करेगा, क्योंकि आज अगर आतंकी या उनके मददगार भारतीय सिमकार्ड से नियंत्रण रेखा के उस पार संपर्क करते हैं तो हमारी खुफिया एजेंसियां उस सिमकार्ड का पता लगा लेती हैं। लेकिन जब उस पार के नेटवर्क से बातचीत होगी तो इसका पता लगाना मुश्किल हो जाएगा। शायद इसलिए पाकिस्तान संघर्ष विराम की आड़ में एलओसी के पास मोबाइल टावर लगा रहा है।
इससे पूर्व आतंकियों की ओर से इक्का-दुक्का सेटेलाइट फोन का प्रयोग किया जाता रहा है, लेकिन सेटेलाइट फोन काफी महंगे होने के कारण वे इसका अधिक प्रयोग नहीं कर पाते। अब पुंछ में हर तरफ आसानी से पाकिस्तानी मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध होगा तो आतंकियों को काफी आसानी हो जाएगी। नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्रों के ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र सरकार को पाकिस्तान की इस साजिश को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।
भाटादूड़ियां में आतंकियों की तलाश में जुटे सुरक्षा बल, बारिश ने रोका रास्ता
जम्मू-पुछ राष्ट्रीय राजमार्ग पर 17 दिन पहले सैन्य वाहन पर हुए आतंकी हमले के बाद शनिवार को भी सुरक्षाबलों ने आतंकियों की तलाश में अभियान जारी रखा। इस दौरान भाटादूड़ियां, नाढ़खास, संगेयोट और तोता गली के जंगलों को खंगाला गया, लेकिन दोपहर बाद मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि के बाद धुंध ने सैन्य जवानों के तलाशी अभियान में रुकावट डाल दी। हालांकि, अभी तक आतंकियों का कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। वहीं, शुक्रवार को राजोरी के केसरी हिल में हमला करने वाले एक आतंकी को ढेर करने के बाद भाटादूड़ियां में तलाशी अभियान में जुटे सुरक्षा बलों को उम्मीद जगी है कि जल्द उन्हें क्षेत्र में आतंकियों के खिलाफ सफलता मिलेगी।