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Poonch News: भद्रवाह के लैवेंडर से महकेगा पुंछ जिले का मेंढर
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पुंछ। पुंछ जिले का उपजिला मेंढर भी भद्रवाह के लैवेंडर की सुगंध से महकेगा। मेंढर में लैवेंडर की खेती शुरू करवाने की पहल के तहत रविवार को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड मेडिसिन (आईआईआईएम) जम्मू ने जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें स्थानीय रेशम विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित कारीगर डॉ. रूबिया बुखारी का सहयोग लिया जा रहा है। कार्यक्रम में किसानों को जागरूक करने के साथ ही उनमें भद्रवाह से लाए गए लैवेंडर के पौधे और अन्य सामग्री वितरित की गई।
रविवार देर शाम को मेंढर में आईआईआईएम जम्मू के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ. सिया राम मीना, डॉ. रुबिया बुखारी, डॉ. वाजिद शाह, आकाश वर्मा तकनीकी सहायक आईआईआईएम जम्मू और विनोद फोगट परियोजना सहायक आईआईआईएम द्वारा किसानों के बीच लैवेंडर की 1.5 लाख से अधिक गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री वितरित की गई।
आईआईआईएम जम्मू के निदेशक डॉ. ज़बीर अहमद ने अपने संदेश में पुंछ के समुदाय के भारी समर्थन और भागीदारी को देखकर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने स्थानीय कृषि पहलों को बढ़ावा देने, आजीविका बढ़ाने और क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा देने में लैवेंडर की खेती की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित करने के महत्व पर जोर दिया।
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इस अवसर पर डॉ. सिया राम मीना ने लैवेंडर की खेती की तकनीकों पर गहन चर्चा करते हुए उपस्थित किसानों को इस सुगंधित फसल के पोषण की बारीकियों के बारे में बताया। वर्षों के अनुभव और शोध से प्रेरित होकर डॉ. मीना ने मेंढर की अनूठी जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप मिट्टी की तैयारी, सिंचाई विधी, कीट प्रबंधन और कटाई तकनीक में अमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान की। उन्होंने न किसानों को व्यावहारिक जानकारी प्रदान की, बल्कि उनमें लैवेंडर की खेती शुरू करने के लिए आत्मविश्वास और उत्साह की भावना भी पैदा की।
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रविवार देर शाम को मेंढर में आईआईआईएम जम्मू के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ. सिया राम मीना, डॉ. रुबिया बुखारी, डॉ. वाजिद शाह, आकाश वर्मा तकनीकी सहायक आईआईआईएम जम्मू और विनोद फोगट परियोजना सहायक आईआईआईएम द्वारा किसानों के बीच लैवेंडर की 1.5 लाख से अधिक गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री वितरित की गई।
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आईआईआईएम जम्मू के निदेशक डॉ. ज़बीर अहमद ने अपने संदेश में पुंछ के समुदाय के भारी समर्थन और भागीदारी को देखकर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने स्थानीय कृषि पहलों को बढ़ावा देने, आजीविका बढ़ाने और क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा देने में लैवेंडर की खेती की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित करने के महत्व पर जोर दिया।
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इस अवसर पर डॉ. सिया राम मीना ने लैवेंडर की खेती की तकनीकों पर गहन चर्चा करते हुए उपस्थित किसानों को इस सुगंधित फसल के पोषण की बारीकियों के बारे में बताया। वर्षों के अनुभव और शोध से प्रेरित होकर डॉ. मीना ने मेंढर की अनूठी जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप मिट्टी की तैयारी, सिंचाई विधी, कीट प्रबंधन और कटाई तकनीक में अमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान की। उन्होंने न किसानों को व्यावहारिक जानकारी प्रदान की, बल्कि उनमें लैवेंडर की खेती शुरू करने के लिए आत्मविश्वास और उत्साह की भावना भी पैदा की।