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Poonch News: वंदे मातरम पर उमर को कर्रा का करारा जवाब,केरल में दो अंतरे गाने पर कोई जेल नहीं गया
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-कांग्रेस-नेकां गठबंधन में राष्ट्रगीत को लेकर बढ़ी तकरार
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर।
जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के वंदे मातरम से जुड़े बयान को हकीकत से परे बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान जमीनी हकीकत से कोसों दूर और दुर्भाग्यपूर्ण है। कर्रा ने सवाल उठाया कि केरल में स्वतंत्रता दिवस की परेड के दौरान वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो अंतरे गाए जाने के बाद क्या किसी व्यक्ति को जेल भेजा गया।
कर्रा की प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि आधिकारिक कार्यक्रमों में पूरे राष्ट्रगीत के दौरान खड़े रहना वैधानिक अनिवार्यता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी मुद्दे पर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच मतभेद उस समय खुलकर सामने आए, जब कांग्रेस ने श्रीनगर में अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के उद्घाटन के दौरान पूरा राष्ट्रगीत गाए जाने को लेकर नेकां की आलोचना की।
उमर अब्दुल्ला ने विवाद को अनावश्यक राजनीति करार देते हुए कहा था कि कानूनी तौर पर जहां भी राष्ट्रगान बजता है, वहां वंदे मातरम के सभी अंतरे गाना अनिवार्य है। यह नियम केवल जम्मू-कश्मीर नहीं, पूरे देश पर लागू है और कांग्रेस शासित राज्यों में भी सरकारी कार्यक्रमों में यही स्थिति होगी। उन्होंने कहा था कि पूरे राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े न होने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। साथ ही सवाल किया था कि क्या कांग्रेस चाहती है कि इस बहाने कश्मीरियों को जेल भेजा जाए।
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कर्रा ने सीएम के इस तर्क को खारिज करते हुए पूछा कि जब कांग्रेस की अपेक्षाएं स्पष्ट रूप से जम्मू-कश्मीर सरकार से थीं, तो इसमें जम्मू-कश्मीर की जनता को क्यों घसीटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि बहस में आम जनता की कोई भूमिका नहीं है और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा की जिम्मेदारी सीधे सरकार की है। कर्रा ने केरल, तमिलनाडु और अब कर्नाटक व तेलंगाना का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि क्या इन राज्यों में केवल पहले दो अंतरे गाए जाने पर किसी को जेल भेजा गया। उन्होंने कहा कि क्या उमर अब्दुल्ला से इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों की तरह धर्मनिरपेक्ष और समावेशी मूल्यों की रक्षा की अपेक्षा करना गलत है।
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अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर।
जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के वंदे मातरम से जुड़े बयान को हकीकत से परे बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान जमीनी हकीकत से कोसों दूर और दुर्भाग्यपूर्ण है। कर्रा ने सवाल उठाया कि केरल में स्वतंत्रता दिवस की परेड के दौरान वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो अंतरे गाए जाने के बाद क्या किसी व्यक्ति को जेल भेजा गया।
कर्रा की प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि आधिकारिक कार्यक्रमों में पूरे राष्ट्रगीत के दौरान खड़े रहना वैधानिक अनिवार्यता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी मुद्दे पर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच मतभेद उस समय खुलकर सामने आए, जब कांग्रेस ने श्रीनगर में अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के उद्घाटन के दौरान पूरा राष्ट्रगीत गाए जाने को लेकर नेकां की आलोचना की।
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उमर अब्दुल्ला ने विवाद को अनावश्यक राजनीति करार देते हुए कहा था कि कानूनी तौर पर जहां भी राष्ट्रगान बजता है, वहां वंदे मातरम के सभी अंतरे गाना अनिवार्य है। यह नियम केवल जम्मू-कश्मीर नहीं, पूरे देश पर लागू है और कांग्रेस शासित राज्यों में भी सरकारी कार्यक्रमों में यही स्थिति होगी। उन्होंने कहा था कि पूरे राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े न होने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। साथ ही सवाल किया था कि क्या कांग्रेस चाहती है कि इस बहाने कश्मीरियों को जेल भेजा जाए।
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कर्रा ने सीएम के इस तर्क को खारिज करते हुए पूछा कि जब कांग्रेस की अपेक्षाएं स्पष्ट रूप से जम्मू-कश्मीर सरकार से थीं, तो इसमें जम्मू-कश्मीर की जनता को क्यों घसीटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि बहस में आम जनता की कोई भूमिका नहीं है और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा की जिम्मेदारी सीधे सरकार की है। कर्रा ने केरल, तमिलनाडु और अब कर्नाटक व तेलंगाना का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि क्या इन राज्यों में केवल पहले दो अंतरे गाए जाने पर किसी को जेल भेजा गया। उन्होंने कहा कि क्या उमर अब्दुल्ला से इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों की तरह धर्मनिरपेक्ष और समावेशी मूल्यों की रक्षा की अपेक्षा करना गलत है।