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गुरुबानी और सबद कीर्तन से संगत को किया निहाल
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पुंछ जिले के डेरा दुखनिवारण में आयोजित गुरूमत समागम में भाग लेती संगत और र्कर्तन करते रागी जत्था
- फोटो : POONCH
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पुंछ। जिले के दरादुलियां गांव स्थित गुरुद्वारा डेरा दुख निवारण साहब में रविवार को 25वें गुरुमत समागम का आयोजन हुआ। इसमें जिले के साथ जम्मू कश्मीर और बाहरी राज्यों से डेरे से जुड़ी संगत के श्रद्धालुओं ने भाग लेकर गुरुबानी, सबद कीर्तन और विद्वानों के विचार सुने। साथ ही लंगर में प्रसाद ग्रहण किया।
गुरुमत समागम के चलते सुबह से ही डेरे पर संगत एकत्र होने लगी थी। सुबह नौ बजे डेरे में एक महीने से चल रहे अखंड पाठ का भोग डाला गया। 10 बजे गुरुमत समागम शुरू हुआ, जिसकी अध्यक्षता डेरा दुख निवारण प्रमुख बाबा कुलदीप सिंह ने की। जबकि, डेरा संतपुरा नंगाली साहब के महंत संतभाई मंजीत सिंह बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुए। मौके पर पंजाब से विशेष तौर पर बुलाए गए रागी जत्थों ने गुरबानी पर आधारित शब्दों का गायन करते हुए संगत को निहाल किया।
वहीं, सिख विद्वानों ने डेरा दुख निवारण के प्रचार प्रसार एवं दुखियों के दुख दूर करने के लिए दिए जा रहे योगदान को उजागर करने के साथ ही गुरुग्रंथ साहब और 10 गुरुओं की शिक्षाआें पर विचार रखते हुए संगत को गुरुओं के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। सुबह 10 बजे शुरू हुआ यह गुरुमत समागम शाम पांच बजे तक जारी रहा। इस दौरान डेरे पर लंगर का भी आयोजन किया गया था, जिसमें संगत ने पंगत में बैठ कर प्रसाद ग्रहण किया।
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डेरा दुख निवारण के संस्थापक एवं डेरा प्रमुख बाबा कुलदीप सिंह ने बताया कि 26 वर्ष पहले गांव दरादुलियां के छोटे से कमरे में डेरे की स्थापना की गई थी, जो आज एक बहुत बड़े गुरुद्वारे का रूप ले चुका है। आज डेरे के साथ न सिर्फ पुंछ जिले, बल्कि पंजाब, हिमाचल, राजस्थान और दिल्ली के साथ पूरे देश की संगत जुड़ी हुई है, जो हर वर्ष इस समागम में भाग लेने के लिए पहुंचती है।
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गुरुमत समागम के चलते सुबह से ही डेरे पर संगत एकत्र होने लगी थी। सुबह नौ बजे डेरे में एक महीने से चल रहे अखंड पाठ का भोग डाला गया। 10 बजे गुरुमत समागम शुरू हुआ, जिसकी अध्यक्षता डेरा दुख निवारण प्रमुख बाबा कुलदीप सिंह ने की। जबकि, डेरा संतपुरा नंगाली साहब के महंत संतभाई मंजीत सिंह बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुए। मौके पर पंजाब से विशेष तौर पर बुलाए गए रागी जत्थों ने गुरबानी पर आधारित शब्दों का गायन करते हुए संगत को निहाल किया।
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वहीं, सिख विद्वानों ने डेरा दुख निवारण के प्रचार प्रसार एवं दुखियों के दुख दूर करने के लिए दिए जा रहे योगदान को उजागर करने के साथ ही गुरुग्रंथ साहब और 10 गुरुओं की शिक्षाआें पर विचार रखते हुए संगत को गुरुओं के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। सुबह 10 बजे शुरू हुआ यह गुरुमत समागम शाम पांच बजे तक जारी रहा। इस दौरान डेरे पर लंगर का भी आयोजन किया गया था, जिसमें संगत ने पंगत में बैठ कर प्रसाद ग्रहण किया।
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डेरा दुख निवारण के संस्थापक एवं डेरा प्रमुख बाबा कुलदीप सिंह ने बताया कि 26 वर्ष पहले गांव दरादुलियां के छोटे से कमरे में डेरे की स्थापना की गई थी, जो आज एक बहुत बड़े गुरुद्वारे का रूप ले चुका है। आज डेरे के साथ न सिर्फ पुंछ जिले, बल्कि पंजाब, हिमाचल, राजस्थान और दिल्ली के साथ पूरे देश की संगत जुड़ी हुई है, जो हर वर्ष इस समागम में भाग लेने के लिए पहुंचती है।