{"_id":"5d83e6d18ebc3e01684318e4","slug":"firing-on-loc-poonch-news-jmu193519261","type":"story","status":"publish","title_hn":"पाकिस्तानी गोलीबारी के चलते नियंत्रण रेखा के किसानों को सता रही है फसल कटाई की चिंता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पाकिस्तानी गोलीबारी के चलते नियंत्रण रेखा के किसानों को सता रही है फसल कटाई की चिंता
विज्ञापन
पुंछ। नियंत्रण रेखा से सटे गांवों के किसान पाकिस्तान की तरफ से की जा रही गोलाबारी से काफी परेशान हैं। उन्हें अपनी पक चुकी मक्की और धान की फसल बर्बाद होने की चिंता सता रही है। किसान जैसे ही फसल काटने खेतों में जाते हैं तो पाकिस्तानी सैनिक गोलाबारी शुरू कर देते हैं, जिससे उन्हें काम अधूरा छोड़कर भागना पड़ता है। इसके अलावा किसानों की चिंता का दूसरा कारण मजदूरों का न मिलना भी है। गोलाबारी के डर से मजदूर कटाई का काम करने से डर रहे हैं। इसके चलते भी कटाई का काम भी अटका हुआ है। किसान खुद जान खतरे में डालकर कटाई कर रहे हैं।
पाकिस्तानी गोलाबारी से परेशान गांव करमाड़ा, दिगवार, माल्टी, सलोत्री, फकीरदारा, बालाकोट, बसूनी, सदोट, लंजोट, पोलस, बरूती, शाहु आदि के किसानों मोहम्मद रियाज, अब्दुल रहीम, जमाल दीन, संतोख सिंह, राकेश कुमार, फजल हुसैन आदि का कहना है कि पाकिस्तानी सेना अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है। एक तो पाकिस्तानी सेना ने हमारे खेतों में कड़ी मेहनत से उगाई गई फसल को गोले बरसा कर बर्बाद कर दिया है। जो फसल बची है, उसे काटने के लिए जब भी खेतों में जाते हैं तो गोलाबारी शुरू कर देती है। हमें भाग कर अपने घरों अथवा पशुशालाओं में जाकर छुपना पड़ता है। इसके बाद गोलाबारी थमती है तो फिर खेतों में जाते हैं लेकिन थोड़ी सी कटाई करते ही फिर से गोलियां बरसनी शुरू हो जाती है।
जान का खतरा देख मजदूर भी नहीं मिल रहे
गांव निवासियों ने बताया कि पहले हम लोग मिलकर एक दूसरे की फसल काटा करते थे लेकिन अब गोलीबारी के चलते हर किसी को अपनी ही फसल बचाने की चिंता लगी रहती है। गांव के बाहर किसी मजूदर को कटाई का काम करने के लिए बोलते हैं तो वह मना कर देता है। कहते हैं कि हमें अपनी जान नहीं गंवानी है वहां गोली खाने हम नहीं जा सकते हैं।
विज्ञापन
गौरतलब है कि जिले में बालाकोट से लेकर साव्जियां तक करीब108 किलोमीटर लम्बा क्षेत्र भारत पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित है। जिसमें अधिकतर पहाड़ी क्षेत्र है और वहां पर वर्ष में मुख्यत: एक ही फसल मक्की की पैदावार होती है। जिस पर किसान परिवारों एंव उनके पशुओं की जीवका निर्भर करती है। ऐसे में पाकिस्तानी गोलाबारी से नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्रों के किसानों को पिछले कई दशकों से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। क्योंकि पाकिस्तानी सेना जानबूझ कर हर वर्ष फसल की बुआई एवं कटाई के समय गोलाबारी करती है। इतना ही नहीं पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तानी सेना की तरफ से अपनी गोलाबारी की रेंज बढ़ाए जाने से अब नियंत्रण रेखा से दूर स्थित ग्रामीण क्षेत्रों में भी फसलों को नुकसान होने लगा है।
विज्ञापन
पाकिस्तानी गोलाबारी से परेशान गांव करमाड़ा, दिगवार, माल्टी, सलोत्री, फकीरदारा, बालाकोट, बसूनी, सदोट, लंजोट, पोलस, बरूती, शाहु आदि के किसानों मोहम्मद रियाज, अब्दुल रहीम, जमाल दीन, संतोख सिंह, राकेश कुमार, फजल हुसैन आदि का कहना है कि पाकिस्तानी सेना अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है। एक तो पाकिस्तानी सेना ने हमारे खेतों में कड़ी मेहनत से उगाई गई फसल को गोले बरसा कर बर्बाद कर दिया है। जो फसल बची है, उसे काटने के लिए जब भी खेतों में जाते हैं तो गोलाबारी शुरू कर देती है। हमें भाग कर अपने घरों अथवा पशुशालाओं में जाकर छुपना पड़ता है। इसके बाद गोलाबारी थमती है तो फिर खेतों में जाते हैं लेकिन थोड़ी सी कटाई करते ही फिर से गोलियां बरसनी शुरू हो जाती है।
विज्ञापन
जान का खतरा देख मजदूर भी नहीं मिल रहे
गांव निवासियों ने बताया कि पहले हम लोग मिलकर एक दूसरे की फसल काटा करते थे लेकिन अब गोलीबारी के चलते हर किसी को अपनी ही फसल बचाने की चिंता लगी रहती है। गांव के बाहर किसी मजूदर को कटाई का काम करने के लिए बोलते हैं तो वह मना कर देता है। कहते हैं कि हमें अपनी जान नहीं गंवानी है वहां गोली खाने हम नहीं जा सकते हैं।
विज्ञापन
गौरतलब है कि जिले में बालाकोट से लेकर साव्जियां तक करीब108 किलोमीटर लम्बा क्षेत्र भारत पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित है। जिसमें अधिकतर पहाड़ी क्षेत्र है और वहां पर वर्ष में मुख्यत: एक ही फसल मक्की की पैदावार होती है। जिस पर किसान परिवारों एंव उनके पशुओं की जीवका निर्भर करती है। ऐसे में पाकिस्तानी गोलाबारी से नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्रों के किसानों को पिछले कई दशकों से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। क्योंकि पाकिस्तानी सेना जानबूझ कर हर वर्ष फसल की बुआई एवं कटाई के समय गोलाबारी करती है। इतना ही नहीं पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तानी सेना की तरफ से अपनी गोलाबारी की रेंज बढ़ाए जाने से अब नियंत्रण रेखा से दूर स्थित ग्रामीण क्षेत्रों में भी फसलों को नुकसान होने लगा है।