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पाकिस्तानी गोलाबारी के डर से दिन के बजाए रात को गेहूं की कटाई करने को मजबूर नियंत्रण रेखा से सटे गांव के किसान

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2020 08:44 PM IST
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Farmers Near Loc Hawest West Crops In Night
पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा के पास के गांव में रात को गैंहू की कटाई करते हुए किसान - फोटो : AMAR UJALA
मुनीष शर्मा
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पुंछ।पिछले कई महीनों से लगातार पाकिस्तानी सेना द्वारा नियंत्रण रेखा के आस पास के रिहाईशी इलाकों को निशाना बना कर की जाने वाली गोलाबारी के डर के मारे नियंत्रण रेखा के आस पास बसे क्षेत्रों के किसान अब दिन के बजाए रात के अंधेरे में अपने खेतों में पक कर तैयार गेहूं की कटाई के काम को अंजाम दे रहे है।जिसके चलते एक तरफ जहां आम लोग रात को अपने घरों में चैन की नींद सो रहे होते हैं वहीं नियंत्रण रेखा के आस पास के किसान अपने परिवार के पुरूष सदस्योंके साथ खेतों में कटाई के काम में जुटे होते हैं ताकि किसी तरह अपनी खून पसीने की कमाई से तैयार फसल को काट एंव समेट कर घर के अंदर पहुंचा सकें।नियंत्रण रेखा पार पाक सेना की अग्रीम चोकियों से मात्र दो डाई सो मीटर की दूरी पर बसे गांव जलास सलोत्री में रात के समय कटाई के काम में जुटे किसानों मंगतराम, सुमित कुमार,शुभम बाली और अश्विनी शर्मा का कहना हैकि अगर हम लोग दिन के समय खेतों में काम के लिए आते हैं तो पाक सेना द्वारा हमें देख कर ही गोलाबारी शुरू कर दी जाती है।जिसके चलते हमें जान बचा कर भागना पड़ता है।इन का कहना हैकि हालांकि एक तरफ कोरोना महामारी और दूसरी तरफ पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी हमें दिन में फसल की कटाई एंव खेतों में अन्य काम करने का मोका नहीं देती है।ऐसे रात को कटाई करने में भी हमंे सांप और दूसरे जहरीले जीव जंतुओं का खतरा बना रहता है परन्तू दिन में हमारे लिए सबसे बड़ा खतरा पाकिस्तानी सेना की तरफ से की जाने वाली मोर्टार और यूनिवर्सल मशीन गनों की गोलीबारी है जिसमें वो सीधे सीधे हमें निशाना बना सकते हंै।पहले भी कई बार खेतों में काम करते हुए कई किसान अपनी जान गंवा चुके हैं।गुपअंधेरे में अंदाजे पर गैहूं की कटाई के काम में लगे किसानों का कहना हैकि इस बार हमारी गैहूं की फसल अच्छी पैदा हुई है हम रात को मोका मिलते ही कटाई का काम कर रहें है ताकि मैहनत के कुछ दाने घरों में पहुंच जाएं और बच्चों की रोजी रोटी का जुगाड़ हो जाए।किसानों का कहना हैकि हमारे खेतों से पाकिस्तानी सीमा मात्र दो सो मीटर दूर है जहां से वह दिन के समय हमारी जरा सी हरकत पर गोलियां दागने लगते हैं।रात में कम से कम इस बात का डर नहीं होता कि वह गोलीबारी करेंगे क्योंकि रात को उन्हें हमारी हरकत नजर नहीं आती है। हम भी खेतों में काम करते हुए किसी प्रकार की लाईट का प्रयोग नहीं करते हैं आपस में बातें भी धीमें स्वर में करते हैं।नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्रों के किसानों का कहना हैकि भारत सरकार की तरफ से हमें कई प्रकार की सुविधाएं प्रदान की जाती हैं समय पर खाद,बीज आदि उपल्बध कराया जाता है परन्तू पाकिस्तानी गोलाबारी हमारे लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनी हुई है।
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