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Poonch News: बाबा नाथ जी का 23वां बलिदान दिवस मनाया
Sat, 07 Sep 2024 05:32 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पुंछ
संवाद न्यूज एजेंसी, पुंछ
Updated Sat, 07 Sep 2024 05:32 AM IST
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सभी समुदायों के हजारों लोगों ने लिया भाग
पुंछ। नगर के मोहल्ला डुंगस स्थित बाबा नाथ जी की कुटिया पर शुक्रवार को नाथ जी के 23वें बलिदान दिवस पर यज्ञ एवं भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें सभी समुदायों के लोगों ने भाग लेते हुए भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।
बाबा नाथ जी की कुटिया पर दिनभर भजन कीर्तन जारी रहा। सुबह से ही बाबा नाथ जी की कुटिया पर श्रद्धालुओं के आने जाने का क्रम शुरू हो गया था। इसमें सर्वप्रथम सुबह 9 बजे पिछले दो दिन से जारी श्रीरामायण के अखंड पाठ का भोग डाला गया। इसके बाद यज्ञ शुरू किया गया। इसकी पूर्णाहुति के साथ ही एक बजे भंडारा शुरू किया गया, जो देर शाम तक जारी रहा।
गौरतलब है कि पुंछ के मोहल्ला डुंगस में एक कुटिया में रहने वाले बाबा नाथ जी हर समय प्रभु में लीन रहते थे। उन्हें हर धर्म समुदाय के लोग मानते थे। हालांकि वह किसी से भी ज्यादा बातचीत नहीं करते थे मगर उनके पास हिंदू, मुस्लिम एवं सिख सभी समुदायों के लोग सुबह शाम बैठते थे। वर्ष 2001 में जब पुंछ जिले में आतंकवाद चरम पर था। इस दौरान आज ही के दिन बाहर से विषेश तौर पर आतंकवाद से निपटने के लिए बुलाए गए सुरक्षाबलों के एक जवान ने बाबा नाथ जी पर सुबह उस समय गोलियां दाग दी जब वह दशनामी अखाड़ा मंदिर में पानी पीने जा रहे थे। इस घटना के बाद प्रशासन ने नगर में कर्फ्यू लगाए जाने के बावजूद हजारों लोग कुटिया पर एकत्रित हो गए थे और शोभायात्रा निकाल कर बाबा नाथ जी को कुटिया के सामने स्थित शिव मंदिर में समाधि दी गई थी। पुंछ के लोगों का मानना है कि बाबा नाथ जी के बलिदान के साथ ही एक वर्ष में पुंछ राजोरी जिलों से आतंकवाद पूरी तरह समाप्त हो गया था।
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पुंछ। नगर के मोहल्ला डुंगस स्थित बाबा नाथ जी की कुटिया पर शुक्रवार को नाथ जी के 23वें बलिदान दिवस पर यज्ञ एवं भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें सभी समुदायों के लोगों ने भाग लेते हुए भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।
बाबा नाथ जी की कुटिया पर दिनभर भजन कीर्तन जारी रहा। सुबह से ही बाबा नाथ जी की कुटिया पर श्रद्धालुओं के आने जाने का क्रम शुरू हो गया था। इसमें सर्वप्रथम सुबह 9 बजे पिछले दो दिन से जारी श्रीरामायण के अखंड पाठ का भोग डाला गया। इसके बाद यज्ञ शुरू किया गया। इसकी पूर्णाहुति के साथ ही एक बजे भंडारा शुरू किया गया, जो देर शाम तक जारी रहा।
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गौरतलब है कि पुंछ के मोहल्ला डुंगस में एक कुटिया में रहने वाले बाबा नाथ जी हर समय प्रभु में लीन रहते थे। उन्हें हर धर्म समुदाय के लोग मानते थे। हालांकि वह किसी से भी ज्यादा बातचीत नहीं करते थे मगर उनके पास हिंदू, मुस्लिम एवं सिख सभी समुदायों के लोग सुबह शाम बैठते थे। वर्ष 2001 में जब पुंछ जिले में आतंकवाद चरम पर था। इस दौरान आज ही के दिन बाहर से विषेश तौर पर आतंकवाद से निपटने के लिए बुलाए गए सुरक्षाबलों के एक जवान ने बाबा नाथ जी पर सुबह उस समय गोलियां दाग दी जब वह दशनामी अखाड़ा मंदिर में पानी पीने जा रहे थे। इस घटना के बाद प्रशासन ने नगर में कर्फ्यू लगाए जाने के बावजूद हजारों लोग कुटिया पर एकत्रित हो गए थे और शोभायात्रा निकाल कर बाबा नाथ जी को कुटिया के सामने स्थित शिव मंदिर में समाधि दी गई थी। पुंछ के लोगों का मानना है कि बाबा नाथ जी के बलिदान के साथ ही एक वर्ष में पुंछ राजोरी जिलों से आतंकवाद पूरी तरह समाप्त हो गया था।
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