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पाक गोलाबारी से विद्या का मंदिर भी छलनी

Sun, 08 Sep 2013 05:37 AM IST
Punch
Punch Updated Sun, 08 Sep 2013 05:37 AM IST
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पुंछ। पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी से सीमांत क्षेत्रों में विद्या का मंदिर भी छलनी हो रहा है। स्कूल की दीवारें इसका गवाह भी हैं, जिनमें कभी गोलियां टकराती हैं, तो कभी गोलों के टुकड़े आकर वहां सुराख बना जाते हैं। सीमा पार की नापाक हरकत से सहमें बच्चे धमाके सुनते ही जान बचाने के लिए मेज के नीचे छुपकर बैठ जाते हैं।
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पाकिस्तानी सेना की तरफ से बार-बार सीज फायर का उल्लंघन कर सीमांत क्षेत्रों में की जा रही गोलाबारी से ग्रामीणों में हर समय दहशत का माहौल दिखाई देता है। मासूम भी इससे डरे-सहमें रहते हैं। हालात यह हो चले हैं कि बच्चे स्कूल में पढ़ाई भी ठीक से नहीं कर पा रहे। गोलाबारी की जरा सी आवाज उनकी धड़कन तेज कर देती है। स्कूल की दीवारों पर टकराती गोलियां और मोर्टारों के टुकड़े के बीच पढ़ाई की यह तस्वीर हर दिन की है। सीमा पार से नापाक हरकत की आहट मिलते ही शिक्षक और बच्चे सहम जाते हैं। बच्चे भाग कर मेज के नीचे छुप जाते हैं। कुछ अलमारियों की ओट में बैठ जाते हैं। सरकारी मिडिल स्कूल किरनी में यह बात आम हो गई है, जहां रह-रह कर सीमा पार से गोलीबारी की जा रही है। शिक्षक इन हालातों में बचने के लिए भी बच्चों को बतातें हैं। यानी पढ़ाई के साथ उनके उपर सुरक्षित रखने की भी जिम्मेदारी बन गई है। इस स्कूल में 125 के करीब विद्यार्थी हैं। मिडल स्कूल किरनी के हेडमास्टर मोहम्मद अमीन पिछले तीन दिनों से लगातार बच्चों को पाक सेना द्वारा की जाने वाली गोलाबारी से बचने के गुर सिखा रहे हैं। अमीन बच्चों को पाक गोलीबारी का जरा सा संके त देते हैं, तो स्कूल के छात्र छात्राएं भाग कर दो कमरों में डेस्कों के नीचे छुप जाते हैं।
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मोहम्मद अमीन का कहना है कि हमारा यह स्कूल नियंत्रण पर है, जो पाकिस्तानी सेना की तीन चौकियों की गोलाबारी की जद में आता है। जब गोलाबारी शुरू होती है, तो पाक सेना द्वारा दागी गई गोलियां हमारे स्कूल की दीवारों में आकर लगती हैं। ऐसे में हम उस समय बच्चों को छुट्टी भी नहीं कर सकते हैं। कई बार तो बच्चों को छुपते-छुपाते घरों को भेजना पड़ता है। स्कूल में दो कमरे और दो शिक्षक होने के कारण कई कक्षाएं बाहर लगानी पड़ती हैं।
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अब रोते नहीं, हिम्मत से काम लेते हैं
विद्यार्थी आसिया, शाहिदा, नुसरत, शबबीर, माशूक, वसीम आदि का कहना है कि पहले जब सीजफायर था, तो हमारी पढ़ाई अच्छे तरीके से होती थी, लेकिन पिछले एक महीने से पाकिस्तानी फौज की तरफ से गोलीबारी किए जाने से हमारी पढ़ाई नहीं हो पा रही है। पहले हम गोलीबारी होने पर डर कर रोने लगते थे, लेकिन अब मास्टर जी गोलीबारी के दौरान छुपने के तरीके सिखा रहे हैं। हमारा डर कम होने लगा है।

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