केसर और बासमती के लिए बनेंगे माडल विलेज
- संबूरा और किश्तवाड़ में केसर, आरएस पुरा और सागाम में उगेगी बासमती
- समीक्षा बैठक में लिए गए फैसलों पर अमल को तय की समय सीमा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रियासत में केसर और उन्नत किस्म की बासमती की पैदावार बढ़ाने को सरकार की ओर से केसर और बासमती के लिए दो माडल विलेज बनाने का फैसला किया गया है। मुख्यमंत्री ने कृषि विकास विभाग की समीक्षा बैठक में लिए गए फैसलों पर अमल को समय सीमा भी तय की।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वे निजी तौर पर सभी फैसलों के अमल पर निगरानी रखेंगी। महबूबा ने विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान संबंधित अधिकारियों को कश्मीर संभाग के जिला पुलवामा के संगूरा गांव और जम्मू संभाग के किश्तवाड़ में केसर और जम्मू के आरएस पुरा और कोकरनाग के सागाम में बासमती और मुश्कबुज्जी माडल विलेज बनाने के निर्देश जारी किए।
केसर के खेतों में सिंचाई के लिए फव्वारे लगाने के लिए महबूबा ने अधिकारियों को छह सप्ताह का समय दिया। चार महीने के भीतर स्पाइस पार्क शुरू करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने सेब, अखरोट और अन्य फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए भी उचित कदम उठाने को कहा। कहा कि कृषि क्षेत्र में रियासत को आत्म निर्भर बनाने से आर्थिक ढांचा भी सुधरेगा।
फूलों की पैदावार बढ़ाने के निर्देश दिए
उन्होंने फूलों की पैदावार बढ़ाने और इससे जुडे़ व्यवसाय को और विकसित करने तथा केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं को किसानों तक पहुंचाने और इनका लाभ लेने के बारे में किसानों को जागरूक बनाने के भी निर्देश दिए। इन योजनाओं का उचित लाभ नहीं ले पाने पर भी मुख्यमंत्री ने चिंता और गंभीरता जताई।
नागरिक सचिवालय में हुई समीक्षा बैठक में कृषि विकास मंत्री गुलाम नबी लोन, मुख्य सचिव बार आर शर्मा, वित्त एवं योजना और विकास आयुक्त बीबी व्यास, प्रमुख सचिव कृषि विकास विभाग संदीप नायक, प्रमुख सचिव (सीएम) नवीन चौधरी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
महबूबा ने विभाग की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार लाने और पैदावार बढ़ाने के लिए अफसरों को रूटीन के प्रशासनिक कार्यों से हटकर किसानों तक पहुंचने और उन्हें नई तकनीक से अवगत कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने हैरानी जताई कि उपजाऊ भूमि और सिंचाई के पर्याप्त साधन होने के बावजूद रियासत कृषि पैदावार में पिछड़ी है।
रियासत की क्षमता के मुकाबले केवल तीसरे हिस्से का ही इस्तेमाल हो पा रहा है। उन्होंने बैठक के दौरान कृषि पैदावार के हासिल कर लेने योग्य टारगेट भी तय किए।