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सिंचाई के लिए पानी न होने के चलते किसान परेशान
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बिलावर। उपमंडल के लगभग 95 फीसदी इलाके में सिंचाई की व्यवस्था न होने के कारण किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिन इलाकों के किसानों के पास व्यवस्थाएं हैं, उन्होंने 15 दिन पूर्व धान की रोपाई का काम पूरा कर लिया है। अब बाकियों को चिंता सताने लगी है।
किसानों ने बताया कि उनकी ओर से लगाई गई धान की नर्सरी तेज धूप और बारिश न होने के कारण खराब हो गई है। धान के बीज पर उन्होंने कई हजार रुपये खर्च किए हैं, लेकिन सिंचाई की व्यवस्था न होने के कारण उन्हें काफी नुकसान पहुंचा है। नर्सरी के खराब होने से धान की रोपाई नहीं कर सकेंगे। किसानों ने सरकार से इलाके में सिंचाई की व्यवस्था करने की मांग की है।
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धार डूगनू के किसान बेली राम ने कहा कि उन्होंने धान की नर्सरी लगाने के लिए पांच हजार रुपये खर्च किए थे, जो बर्बाद हो गए। इस वजह से उन्हें काफी निराशा हुई है।
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किशनपुर के किसान रोशन लाल ने कहा कि खेतों में की गई मेहनत पर पानी फिर गया है। बारिश ना होने से धान की पनीरी खराब हो गई है।
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वहीं, किसान विद्यासागर ने कहा कि इलाके के ज्यादातर किसान केवल बारिश के पानी पर ही निर्भर रहते हैं। कई बार किसानों की मेहनत का सही फल नहीं मिल पाता है, क्योंकि ज्यादातर इलाके में सिंचाई की व्यवस्था नहीं है।
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किसानों ने बताया कि उनकी ओर से लगाई गई धान की नर्सरी तेज धूप और बारिश न होने के कारण खराब हो गई है। धान के बीज पर उन्होंने कई हजार रुपये खर्च किए हैं, लेकिन सिंचाई की व्यवस्था न होने के कारण उन्हें काफी नुकसान पहुंचा है। नर्सरी के खराब होने से धान की रोपाई नहीं कर सकेंगे। किसानों ने सरकार से इलाके में सिंचाई की व्यवस्था करने की मांग की है।
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धार डूगनू के किसान बेली राम ने कहा कि उन्होंने धान की नर्सरी लगाने के लिए पांच हजार रुपये खर्च किए थे, जो बर्बाद हो गए। इस वजह से उन्हें काफी निराशा हुई है।
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किशनपुर के किसान रोशन लाल ने कहा कि खेतों में की गई मेहनत पर पानी फिर गया है। बारिश ना होने से धान की पनीरी खराब हो गई है।
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वहीं, किसान विद्यासागर ने कहा कि इलाके के ज्यादातर किसान केवल बारिश के पानी पर ही निर्भर रहते हैं। कई बार किसानों की मेहनत का सही फल नहीं मिल पाता है, क्योंकि ज्यादातर इलाके में सिंचाई की व्यवस्था नहीं है।