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Kathua News: गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर में गहराया जलसंकट
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कठुआ। गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर में लोगों की पानी की जरूरत में भी इजाफा हो गया है। इसके कारण जलशक्ति विभाग पर लोगों को पर्याप्त पेयजल आपूर्ति करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। शहर में अब जगह-जगह पब्लिक स्टैंडों पर पानी भरने वालों की भीड़ देखी जा रही है। वहीं शहर के निचले इलाके में जहां लोग अपनी पानी की जरूरत हैंडपंप से पूरी कर लेते थे, वहां भूमिगत जलस्तर के नीचे चले जाने से लोगों को पानी के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है।
शहर के वार्ड 2, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और 17 ऐसे वार्ड हैं, जहां लोग पानी के लिए जलशक्ति विभाग की सप्लाई पर कम ही आश्रित हैं। यहां हर घर में लगे हैंडपंप लोगों की पानी की जरूरत को पूरा करते हैं लेकिन भूमिगत जलस्तर के नीचे चले जाने के बाद से इन वार्डों में पानी का संकट गहरा गया है। यहां शहर की आधी से ज्यादा आबादी रहती है। सबसे ज्यादा खराब स्थित शहर के वार्ड 7 में देखने को मिल रही है। यहां चार दशक पूर्व बिछाई गई पाइप लाइन के क्षतिग्रस्त होने के बाद विभाग ने नई बिछाई गई पाइप लाइन तो बिछा दी है लेकिन अभी तक लोगों को कनेक्शन भी नहीं मिले हैं। इससे लोग अपनी पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए दूसरे मोहल्ले के पब्लिक स्टैंड का सहारा ले रहे हैं।
दरअसल शहर के शहीदी चौक से नीचे बसे वार्डों में भूमिगत जलस्तर काफी ऊंचा होने के कारण इस इलाकों में लोग कभी कुओं का पानी इस्तेमाल करते थे। समय के साथ इन कुओं का स्थान हैंडपंपों ने ले लिया था। लेकिन कुछ वर्षों से हर साल गर्मी के मौसम में हैंडपंप सूखते जा रहे हैं। इससे हर साल गर्मी के दिनों में इन वार्डों में पानी का संकट गहराता जा रहा है। ऊपरी इलाकों में तो लोगों के जलशक्ति विभाग द्वारा सप्लाई किए जाने वाले पानी पर आश्रित होने के कारण वहां हर घर में पानी की स्टोरेज के लिए इंतजाम होते हैं लेकिन निचले इलाकों में भूमिगत जल हर समय उपलब्ध होने के कारण ऐसे कोई इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में अगर दिन में एक बार पानी आता भी है तो लोग उसे इतना रख नहीं पाते हैं कि अगले दिन तक वह उनकी जरूरत को पूरा कर पाए।
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स्थानीय निवासी गुरमीत सिंह ने बताया कि रावी दरिया में बेतहाशा खनन के बाद से ही शहर के इन क्षेत्रों में भूमिगत जलस्तर कम होने का संकट आने लगा है। पिछले कुछ सालों से आ रही यह समस्या मई और जून में लोगों को परेशान करती थी लेकिन इस बार तो अप्रैल महीना शुरू होने के साथ ही हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। इससे लोगों के सामने पानी की किल्लत बड़ी समस्या बन रही है। उन्होंने प्रशासन से पेयजल आपूर्ति की समयावधि को बढ़ाने या फिर इसे दिन में दो बार करने की मांग उठाई है।
स्थानीय निवासी राजकुमार ने बताया कि घर का हैंडपंप सूखने के बाद हर रोज पानी दूसरे मोहल्ले से ढोना मजबूरी बन गया है क्योंकि घर में ज्यादा पानी स्टोर करने के लिए कोई प्रबंध नहीं है। अभी तो दिन में एक बार पानी लाने से गुजारा हो जा रहा है। मई जून की भीषण गर्मी में यह समस्या और बढ़ेगी। शहर के सबसे घनी आबादी वाले इलाके में मौजूदा सूरते-ए-हाल यह है कि अगर लोगों को दिन में दो बार पानी की आपूर्ति हो तो ही राहत मिल सकती है।
विभाग अपने शेड्यूल के अनुसार पानी की नियमित सप्लाई कर रहा है ताकि लोगों को किसी तरह से पानी के लिए परेशान न होना पड़े। शहर के वार्ड सात में अगर लोगों के कनेक्शन पाइप लाइन से नहीं जोड़े गए हैं तो वे अपने कनेक्शन नंबर के साथ उनके कार्यालय में आएं। सभी कनेक्शनों को रिस्टोर किया जाएगा। इसके अलावा भी कुछ और लोग पानी के लिए कलेक्शन लेना चाहते हैं तो वे विभाग के साथ संपर्क कर सकते हैं। इस त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
-गिरधारी लाल गुप्ता, कार्यकारी अभियंता जलशक्ति विभाग कठुआ
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शहर के वार्ड 2, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और 17 ऐसे वार्ड हैं, जहां लोग पानी के लिए जलशक्ति विभाग की सप्लाई पर कम ही आश्रित हैं। यहां हर घर में लगे हैंडपंप लोगों की पानी की जरूरत को पूरा करते हैं लेकिन भूमिगत जलस्तर के नीचे चले जाने के बाद से इन वार्डों में पानी का संकट गहरा गया है। यहां शहर की आधी से ज्यादा आबादी रहती है। सबसे ज्यादा खराब स्थित शहर के वार्ड 7 में देखने को मिल रही है। यहां चार दशक पूर्व बिछाई गई पाइप लाइन के क्षतिग्रस्त होने के बाद विभाग ने नई बिछाई गई पाइप लाइन तो बिछा दी है लेकिन अभी तक लोगों को कनेक्शन भी नहीं मिले हैं। इससे लोग अपनी पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए दूसरे मोहल्ले के पब्लिक स्टैंड का सहारा ले रहे हैं।
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दरअसल शहर के शहीदी चौक से नीचे बसे वार्डों में भूमिगत जलस्तर काफी ऊंचा होने के कारण इस इलाकों में लोग कभी कुओं का पानी इस्तेमाल करते थे। समय के साथ इन कुओं का स्थान हैंडपंपों ने ले लिया था। लेकिन कुछ वर्षों से हर साल गर्मी के मौसम में हैंडपंप सूखते जा रहे हैं। इससे हर साल गर्मी के दिनों में इन वार्डों में पानी का संकट गहराता जा रहा है। ऊपरी इलाकों में तो लोगों के जलशक्ति विभाग द्वारा सप्लाई किए जाने वाले पानी पर आश्रित होने के कारण वहां हर घर में पानी की स्टोरेज के लिए इंतजाम होते हैं लेकिन निचले इलाकों में भूमिगत जल हर समय उपलब्ध होने के कारण ऐसे कोई इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में अगर दिन में एक बार पानी आता भी है तो लोग उसे इतना रख नहीं पाते हैं कि अगले दिन तक वह उनकी जरूरत को पूरा कर पाए।
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स्थानीय निवासी गुरमीत सिंह ने बताया कि रावी दरिया में बेतहाशा खनन के बाद से ही शहर के इन क्षेत्रों में भूमिगत जलस्तर कम होने का संकट आने लगा है। पिछले कुछ सालों से आ रही यह समस्या मई और जून में लोगों को परेशान करती थी लेकिन इस बार तो अप्रैल महीना शुरू होने के साथ ही हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। इससे लोगों के सामने पानी की किल्लत बड़ी समस्या बन रही है। उन्होंने प्रशासन से पेयजल आपूर्ति की समयावधि को बढ़ाने या फिर इसे दिन में दो बार करने की मांग उठाई है।
स्थानीय निवासी राजकुमार ने बताया कि घर का हैंडपंप सूखने के बाद हर रोज पानी दूसरे मोहल्ले से ढोना मजबूरी बन गया है क्योंकि घर में ज्यादा पानी स्टोर करने के लिए कोई प्रबंध नहीं है। अभी तो दिन में एक बार पानी लाने से गुजारा हो जा रहा है। मई जून की भीषण गर्मी में यह समस्या और बढ़ेगी। शहर के सबसे घनी आबादी वाले इलाके में मौजूदा सूरते-ए-हाल यह है कि अगर लोगों को दिन में दो बार पानी की आपूर्ति हो तो ही राहत मिल सकती है।
विभाग अपने शेड्यूल के अनुसार पानी की नियमित सप्लाई कर रहा है ताकि लोगों को किसी तरह से पानी के लिए परेशान न होना पड़े। शहर के वार्ड सात में अगर लोगों के कनेक्शन पाइप लाइन से नहीं जोड़े गए हैं तो वे अपने कनेक्शन नंबर के साथ उनके कार्यालय में आएं। सभी कनेक्शनों को रिस्टोर किया जाएगा। इसके अलावा भी कुछ और लोग पानी के लिए कलेक्शन लेना चाहते हैं तो वे विभाग के साथ संपर्क कर सकते हैं। इस त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
-गिरधारी लाल गुप्ता, कार्यकारी अभियंता जलशक्ति विभाग कठुआ