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बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान
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बनी में गिरे ओलों से फसलों को नुकसान पहुंचा है।
- फोटो : KATHUA
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कठुआ/बिलावर। जिले में बुधवार को मौसम का मिजाज फिर बिगड़ गया, मैदानी इलाकों में आंधी के साथ बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हुई है। फसलों को समेट रहे किसानों को नुकसान का डर सता रहा है, वहीं गेहूं की कटाई भी रुक गई है। बनी सब डिवीजन के अधिकांश हिस्सों में लगातार दूसरे दिन बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इससे मक्की की बिजाई को भी नुकसान की संभावना है। ताजा की गई बुआई के बाद लगातार हो रही बारिश से बीज के खराब होने की आशंका है। बनी इलाके में सब्जियों के सीजन से पहले, पनीरी को जहां खेतों में लगाया गया था, उसे नुकसान पहुंचा है। कृषि विभाग ने सलाह दी है कि किसान नर्सरी आदी को ढककर रखें।
उधर बिलावर में भी दो दिन पहले बारिश और ओलावृष्टि होने से फसल और बागवानी को बड़ा नुकसान पहुंचा है। लगातार बदल रहे मौसम के मिजाज से तापमान में भी गिरावट आई है । बुधवार सुबह से दोपहर बाद तक मौसम साफ रहा, जिससे किसानों ने निचले इलाकों में गेहूं की कटाई का काम शुरू कर दिया, लेकिन शाम 4:00 बजे एक बार फिर मौसम ने करवट बदली, जिसके बाद काले बादल छा गए और शाम 5:00 बजे बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। दिन में अधिकतम तापमान 34 डिग्री रिकॉर्ड किया गया और न्यूनतम 19 डिग्री सेल्सियस रहा।
बादल देख किसानों की बढ़ी बेचैनी
रामकोट। गेहूं की फसल तैयार हो गई है, लेकिर मौसम के बार-बार करवट बदलने से किसान परेशान हैं। किसान बृजमोहन, हंसराज रणवीर वर्मा, रजनीश कुमार नरेंद्र शर्मा ने बताया कि बीते दिनों हुई लगातार बारिश से उनकी फसल को नुकसान पहुंचा है। अब जो थोड़ी बहुत बची है, वह अब हो रही बारिश से पूरी तरह खराब हो जाएगी। उन्होंने बताया कि तीन-चार दिन लगातार धूप खिलने से फसल की कटाई शुरू कर दी थी। मौसम की बेरुखी को देखते हुए काटी गई फसल बर्बाद हो जाएगी। कई इलाकों में जमीन में अधिक नमी के चलते गेहूं तैयार नहीं हो पाई है। किसानों के अनुसार मौसम करीब 20 दिन साफ रहने से फसल की कटाई कर सकते हैं।
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बिलावर में 60 फीसदी फसल तैयार
बिलावर। उपजिले के किसान सामाजिक दूरी को ध्यान में रखकर गेहूं की कटाई कर रहे हैं। 60 फीसदी से ज्यादा क्षेत्र में फसल पककर तैयार हो गई है। किसान राजपाल, सुरेंद्र कुमार, सुभाष सिंह, पवन कुमार, गिरधारी लाल आदि ने बताया कि इस वर्ष गेहूं की फसल पिछले वर्ष की तुलना में एक महीना देरी से तैयार हुई है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन होने से कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल पा रहे, इसलिए किसान परिवार खुद गेहूं की कटाई करने में जुटे हैं। उपजिले के जिन क्षेत्रों में सिंचाई की व्यवस्था है उन क्षेत्रों में कटाई का काम किसानों ने जोरशोर से शुरू कर दिया है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में अभी भी फसल को पकने में एक पखवाड़ा लगेगा, जिसके बाद ऊपरी क्षेत्रों के किसान फसल की कटाई शुरू करेंगे।
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उधर बिलावर में भी दो दिन पहले बारिश और ओलावृष्टि होने से फसल और बागवानी को बड़ा नुकसान पहुंचा है। लगातार बदल रहे मौसम के मिजाज से तापमान में भी गिरावट आई है । बुधवार सुबह से दोपहर बाद तक मौसम साफ रहा, जिससे किसानों ने निचले इलाकों में गेहूं की कटाई का काम शुरू कर दिया, लेकिन शाम 4:00 बजे एक बार फिर मौसम ने करवट बदली, जिसके बाद काले बादल छा गए और शाम 5:00 बजे बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। दिन में अधिकतम तापमान 34 डिग्री रिकॉर्ड किया गया और न्यूनतम 19 डिग्री सेल्सियस रहा।
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बादल देख किसानों की बढ़ी बेचैनी
रामकोट। गेहूं की फसल तैयार हो गई है, लेकिर मौसम के बार-बार करवट बदलने से किसान परेशान हैं। किसान बृजमोहन, हंसराज रणवीर वर्मा, रजनीश कुमार नरेंद्र शर्मा ने बताया कि बीते दिनों हुई लगातार बारिश से उनकी फसल को नुकसान पहुंचा है। अब जो थोड़ी बहुत बची है, वह अब हो रही बारिश से पूरी तरह खराब हो जाएगी। उन्होंने बताया कि तीन-चार दिन लगातार धूप खिलने से फसल की कटाई शुरू कर दी थी। मौसम की बेरुखी को देखते हुए काटी गई फसल बर्बाद हो जाएगी। कई इलाकों में जमीन में अधिक नमी के चलते गेहूं तैयार नहीं हो पाई है। किसानों के अनुसार मौसम करीब 20 दिन साफ रहने से फसल की कटाई कर सकते हैं।
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बिलावर में 60 फीसदी फसल तैयार
बिलावर। उपजिले के किसान सामाजिक दूरी को ध्यान में रखकर गेहूं की कटाई कर रहे हैं। 60 फीसदी से ज्यादा क्षेत्र में फसल पककर तैयार हो गई है। किसान राजपाल, सुरेंद्र कुमार, सुभाष सिंह, पवन कुमार, गिरधारी लाल आदि ने बताया कि इस वर्ष गेहूं की फसल पिछले वर्ष की तुलना में एक महीना देरी से तैयार हुई है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन होने से कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल पा रहे, इसलिए किसान परिवार खुद गेहूं की कटाई करने में जुटे हैं। उपजिले के जिन क्षेत्रों में सिंचाई की व्यवस्था है उन क्षेत्रों में कटाई का काम किसानों ने जोरशोर से शुरू कर दिया है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में अभी भी फसल को पकने में एक पखवाड़ा लगेगा, जिसके बाद ऊपरी क्षेत्रों के किसान फसल की कटाई शुरू करेंगे।