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Kathua News: पंजाब में किसान आंदोलन से जम्मू-कश्मीर राजमार्ग पर यातायात थमा
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- बाड़ी ब्राह्मना, सांबा, धार रोड और बिलावर में रोके गए डेढ़ हजार से ज्यादा मालवाहक वाहन
- रेल यातायात भी रहा प्रभावित, बसों में बैठकर इंतजार करने को मजबूर हुए यात्री
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। पंजाब में किसानों की ओर से बंद के आह्वान के कारण जम्मू-कश्मीर में जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित रहा। नौ घंटे तक राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर माल वाहक और यात्री वाहनों के पहिये थमे रहे। लखनपुर, सांबा, बाड़ी ब्राह्मणा, धार रोड समेत कई नाकों पर डेढ़ हजार से ज्यादा वाहनों को रोक दिया गया। उधर, रेल यातायात पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिला। प्रदेश में सुबह सात बजे के बाद कोई भी ट्रेन शाम छह बजे तक दाखिल नहीं हुई थी।
पंजाब के माधोपुर बार्डर पर आंदोलनकारी किसान सुबह लगभग साढ़े सात बजे राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर बैठ गए। अपनी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर यहां केंद्र के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान हाईवे पर ट्रैफिक को भी रोक दिया गया। इससे आंदोलन स्थल से मात्र दो किलोमीटर दूर लखनपुर में एकाएक वाहनों का जाम लगना शुरू हो गया। राजमार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें मग्गर खड्ड पुल तक लग गईं। इसके बाद यातायात विभाग ने मोर्चा संभाला और छोटे वाहनों को कीड़ियां गंडियाल मार्ग से डायवर्ट किया।
उधर, ट्रकों को हाईवे की एक लेन पर रोककर बाकी ट्रैफिक एक ही लेन से चलाया गया। लखनपुर में लगभग डेढ़ किलोमीटर तक ट्रकों की कतारें लगने के बाद यातायात विभाग ने हटली मोड़, कालीबड़ी, चड़वाल, दियालाचक, धार रोड़, दियालाचक छलां रूट, सांबा, बाड़ी ब्राह्मणा में ट्रकों को रोक दिया। लगभग डेढ़ हजार ट्रक दोपहर तक जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे और धार रोड पर रोके जा चुके थे। हाईवे ठप होने का सबसे ज्यादा असर यात्री बसों में सवार होकर जाने वाले लोगों पर देखने को मिला।
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महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग घंटों बसों में ही समय बिताने को मजबूर हुए। अव्यवस्था के लिए प्रशासन और आंदोलनकारी किसानों को भी उन्होंने जमकर कोसा। कहा कि यदि उन्हें पूर्व में इसकी सूचना होती तो वो घर से निकलते ही नहीं। उधर, रेलवे स्टेशन और पंजाब के माधोपुर तक यात्रियों को पहुंचाने के लिए ई- रिक्शा चालकों ने भी जमकर चांदी कूटी। पंजाब में चार बजे के बाद प्रदर्शनकारियों के हाईवे से हटने के बाद लखनपुर से ट्रैफिक को बहाल किया गया। यातायात विभाग के डीटीआई पवन सिंह ने बताया कि जिला कठुआ में दो सौ से ज्यादा ट्रकों को विभिन्न जगह पर रोका गया था। जाम की स्थिति से निपटने के लिए शाम सवा चार बजे इन्हें नियंत्रित तरीके से पंजाब की ओर रवाना कर दिया गया है।
रेल यातायात भी चरमराया
पंजाब में रेलवे ट्रैक पर आंदोलनकारी किसानों के उतरने से जम्मू-कश्मीर का रेल यातायात भी ठप होकर रह गया। जम्मू और पठानकोट के बीच चलने वाली डीएमयू में कई यात्री सवार होकर पठानकोट की ओर निकलने को मजबूर हुए। उधर, सुबह सात बजे से ही पंजाब की ओर से जम्मू-कश्मीर में कोई भी ट्रेन दोपहर तक दाखिल नहीं हुई। पंजाब के टांडा में हिमसागर एक्सप्रेस को रोक दिया गया। यह ट्रेन जम्मू-कश्मीर में सुबह पौने सात बजे के लगभग पहुंचती है। देरी की वजह से यह ट्रेन किसान आंदोलन में फंस गई। इसके बाद ये शाम छह बजे के लगभग कठुआ पहुंची। इसी तरह से झेलम एक्सप्रेस भी सुबह आठ बजे कठुआ में अपने निर्धारित समय के बजाय 11 घंटे देरी से शाम सात बजे पहुंची।
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- रेल यातायात भी रहा प्रभावित, बसों में बैठकर इंतजार करने को मजबूर हुए यात्री
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। पंजाब में किसानों की ओर से बंद के आह्वान के कारण जम्मू-कश्मीर में जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित रहा। नौ घंटे तक राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर माल वाहक और यात्री वाहनों के पहिये थमे रहे। लखनपुर, सांबा, बाड़ी ब्राह्मणा, धार रोड समेत कई नाकों पर डेढ़ हजार से ज्यादा वाहनों को रोक दिया गया। उधर, रेल यातायात पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिला। प्रदेश में सुबह सात बजे के बाद कोई भी ट्रेन शाम छह बजे तक दाखिल नहीं हुई थी।
पंजाब के माधोपुर बार्डर पर आंदोलनकारी किसान सुबह लगभग साढ़े सात बजे राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर बैठ गए। अपनी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर यहां केंद्र के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान हाईवे पर ट्रैफिक को भी रोक दिया गया। इससे आंदोलन स्थल से मात्र दो किलोमीटर दूर लखनपुर में एकाएक वाहनों का जाम लगना शुरू हो गया। राजमार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें मग्गर खड्ड पुल तक लग गईं। इसके बाद यातायात विभाग ने मोर्चा संभाला और छोटे वाहनों को कीड़ियां गंडियाल मार्ग से डायवर्ट किया।
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उधर, ट्रकों को हाईवे की एक लेन पर रोककर बाकी ट्रैफिक एक ही लेन से चलाया गया। लखनपुर में लगभग डेढ़ किलोमीटर तक ट्रकों की कतारें लगने के बाद यातायात विभाग ने हटली मोड़, कालीबड़ी, चड़वाल, दियालाचक, धार रोड़, दियालाचक छलां रूट, सांबा, बाड़ी ब्राह्मणा में ट्रकों को रोक दिया। लगभग डेढ़ हजार ट्रक दोपहर तक जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे और धार रोड पर रोके जा चुके थे। हाईवे ठप होने का सबसे ज्यादा असर यात्री बसों में सवार होकर जाने वाले लोगों पर देखने को मिला।
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महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग घंटों बसों में ही समय बिताने को मजबूर हुए। अव्यवस्था के लिए प्रशासन और आंदोलनकारी किसानों को भी उन्होंने जमकर कोसा। कहा कि यदि उन्हें पूर्व में इसकी सूचना होती तो वो घर से निकलते ही नहीं। उधर, रेलवे स्टेशन और पंजाब के माधोपुर तक यात्रियों को पहुंचाने के लिए ई- रिक्शा चालकों ने भी जमकर चांदी कूटी। पंजाब में चार बजे के बाद प्रदर्शनकारियों के हाईवे से हटने के बाद लखनपुर से ट्रैफिक को बहाल किया गया। यातायात विभाग के डीटीआई पवन सिंह ने बताया कि जिला कठुआ में दो सौ से ज्यादा ट्रकों को विभिन्न जगह पर रोका गया था। जाम की स्थिति से निपटने के लिए शाम सवा चार बजे इन्हें नियंत्रित तरीके से पंजाब की ओर रवाना कर दिया गया है।
रेल यातायात भी चरमराया
पंजाब में रेलवे ट्रैक पर आंदोलनकारी किसानों के उतरने से जम्मू-कश्मीर का रेल यातायात भी ठप होकर रह गया। जम्मू और पठानकोट के बीच चलने वाली डीएमयू में कई यात्री सवार होकर पठानकोट की ओर निकलने को मजबूर हुए। उधर, सुबह सात बजे से ही पंजाब की ओर से जम्मू-कश्मीर में कोई भी ट्रेन दोपहर तक दाखिल नहीं हुई। पंजाब के टांडा में हिमसागर एक्सप्रेस को रोक दिया गया। यह ट्रेन जम्मू-कश्मीर में सुबह पौने सात बजे के लगभग पहुंचती है। देरी की वजह से यह ट्रेन किसान आंदोलन में फंस गई। इसके बाद ये शाम छह बजे के लगभग कठुआ पहुंची। इसी तरह से झेलम एक्सप्रेस भी सुबह आठ बजे कठुआ में अपने निर्धारित समय के बजाय 11 घंटे देरी से शाम सात बजे पहुंची।