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तनावपूर्ण हालात में तारबंदी के आगे खेती करने से सीमावर्ती किसानों ने किया इन्कार

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To cultivate further fenced in stressful situations denied by the border farmers
सीमावर्ती गांव करोल कृष्णा में लोगों से बैठक करते कठुआ के उपायुक्त ओपी भगत - फोटो : AMAR UJALA
हीरानगर। किसानों के पास न तो बख्तरबंद ट्रैक्टर हैं न ही बुलेट प्रूफ जैकेट। प्रशासन तारबंदी के आगे की जमीन को खेती योग्य बना भी दे तो वह आम किसान कैसे खेती कर सकता है। ऐसे में सीमावर्ती किसान तनावपूर्ण हालात में तारबंदी के आगे खेती नहीं कर सकते हैं। यह बात कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर स्थित करोल कृष्णा गांव के सरपंच एवं बॉर्डर यूनियन के अध्यक्ष भारत भूषण शर्मा ने कही। उन्होंने यह बात रविवार को गांव के दौरे पर पहुंचे डीसी कठुआ ओपी भगत से हुई बैठक में कही। डीसी तारबंदी के आगे की भूमि को खेती योग्य बनाने के जारी कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने तारबंदी के आगे की जमीन पर खेती करने के संबंध में लोगों की राय जानने के लिए बैठक भी की।
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बैठक के दौरान स्थानीय सरपंच एवं बॉर्डर यूनियन के अध्यक्ष भारत भूषण शर्मा ने कहा कि तारबंदी के आगे खेती करना खतरे से खाली नहीं है। कोई भी किसान अपनी जान जोखिम में नहीं डालेगा। इस जमीन को खेती करने योग्य बनाने के लिए काम चल रहा हैै। सीमा सुरक्षा बल के बख्तरबंद ट्रैक्टर काम कर रहे हैं। इससे साफ जाहिर है कि यहां काम करना किसी खतरे से खाली नहीं है। किसानों के पास न तो बख्तरबंद ट्रैक्टर हैं और न ही बुलेट प्रूफ जैकेट। इसलिए सभी सीमावर्ती किसानों ने निर्णय लिया है कि तारबंदी के आगे खेती नहीं करेंगे।
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वहीं, बैठक के दौरान डीसी कठुआ ओपी भगत ने कहा कि तारबंदी के आगे खेती के लिए तैयार हो रही जमीन पर पहली फसल प्रशासन लगाएगा। इस दौरान जो भी समस्याएं अथवा कठिनाइयां पेश आएंगी, उसका अनुभव भी हो जाएगा। पहली फसल के बाद किसान भी इस भूमि पर खेती कर सकते हैं।
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बैठक के दौरान किसानों ने तारबंदी के आगे की जमीन की निशानदेही करने और सीमा पर चल रहे सुरक्षा बांध के कार्य में आई जमीन का मुआवजा जल्द देने की मांग भी की।

1300 कनाल भूमि खेती के लिए तैयार
15 सितंबर को मनियारी गांव में तारबंदी के आगे की भूमि को खेती योग्य बनाने का काम शुरू किया गया था। प्रशासन ने बीएसएफ की मदद से यह काम शुरू किया था। अब तक करीब 1300 कनाल भूमि से सरकंडे और अन्य झाड़ियों को साफ करके खेती करने योग्य बनाया जा चुका है।
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